# त्योहारी मांग से शंकरपुरा चमेली के भाव में जोरदार उछाल, 15 दिनों में पांच गुना से ज्यादा बढ़ी कीमत

> त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से शंकरपुरा चमेली के दाम करीब 15 दिनों में ₹240 से ₹300 प्रति अट्टे से बढ़कर ₹1,600 तक पहुंच गए हैं। वहीं जाजी फूलों की कीमतों में भी खुला बाजार और उत्पादक संघ की तय दर के बीच बड़ा अंतर देखा जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/tyohari-manga-se-shankarpura-chameli-ke-bhava-men-joradara-uchhala-15-dinon-men-pancha-guna-se-jyada-barhi-kimata-46888 · **Language:** Hindi
**Tags:** शंकरपुरा चमेली, फूलों का बाजार, नवरात्रि, मल्लिगे उत्पादक संघ, जाजी फूल, त्योहारी मांग, फूलों के दाम

त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही फूलों की मंडियों में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है। नवरात्रि और दशहरा के दौरान पूजा अनुष्ठानों तथा सजावट के लिए फूलों की जरूरत अचानक बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर इनकी कीमतों पर पड़ा है। अपनी खास महक के लिए पहचानी जाने वाली शंकरपुरा चमेली की कीमतों में पिछले लगभग पंद्रह दिनों के भीतर भारी उछाल दर्ज किया गया है। जहां कुछ समय पहले तक यह ₹240 से ₹300 प्रति अट्टे के भाव पर मिल रही थी, वहीं अब इसकी कीमत उछलकर ₹1,600 प्रति अट्टे के स्तर पर पहुंच चुकी है। इस तेज तेजी ने त्योहारों की तैयारी कर रहे आम खरीदारों और श्रद्धालुओं के घरेलू बजट पर खासा दबाव बना दिया है।

## खुले बाजार में रविवार को रिकॉर्ड स्तर पर बिके फूल
रविवार, 11 अक्टूबर को शंकरपुरा चमेली के दाम खुले बाजार में ₹1,600 प्रति अट्टे तक दर्ज किए गए। अगर करीब पंद्रह दिन पहले के भावों से तुलना करें, तो यह पुरानी कीमत के मुकाबले पांच गुना से भी अधिक महंगा हो चुका है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी आराधना, मंदिरों में चढ़ावे और घरों की सजावट के लिए इन ताजे फूलों का व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल होता है। मांग में आए इस अचानक उभार ने मंडियों में उपलब्ध सीमित आवक पर दबाव बढ़ा दिया, जिससे कीमतों में यह अभूतपूर्व तेजी सामने आई है।

## उत्पादक संघ की तय दर और खुदरा कीमतों में भारी अंतर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरान करने वाला पहलू उत्पादक संघ की ओर से निर्धारित दर और खुले बाजार में बिक रहे फूलों की कीमत के बीच का बहुत बड़ा अंतर है। मल्लिगे उत्पादक संघ ने शंकरपुरा चमेली के लिए ₹570 प्रति अट्टे की दर तय की थी, लेकिन खुले बाजार में यही फूल ग्राहकों को ₹1,600 प्रति अट्टे तक बेचे जा रहे हैं।

- **शंकरपुरा चमेली का खुला बाजार भाव:** ₹1,600 प्रति अट्टे तक
- **मल्लिगे उत्पादक संघ की निर्धारित दर:** ₹570 प्रति अट्टे

इस भारी अंतर के कारण अलग-अलग दुकानों और मंडियों में ग्राहकों को कीमतों में भारी फेरबदल का सामना करना पड़ रहा है। बाजार विश्लेषकों के लिए भी यह विषय चर्चा में है कि आखिर उत्पादक संघ की तय सीमा से कहीं अधिक दर पर खुले बाजार में यह बिक्री किस वजह से हो रही है। यहां यह समझना भी जरूरी है कि ‘अट्टे’ फूलों को मापने की एक पारंपरिक स्थानीय इकाई है, जिसकी सटीक मात्रा का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।

## जाजी फूलों के दामों में भी देखा गया भारी अंतर
दामों में यह भारी उछाल केवल चमेली तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि जाजी फूलों के भाव भी तेजी से ऊपर चढ़े हैं। खुले बाजार में जाजी फूलों की बिक्री ₹800 प्रति अट्टे तक पहुंच गई। इसकी तुलना में उत्पादक संघ ने जाजी फूलों के लिए मात्र ₹160 प्रति अट्टे की दर तय की थी। इस तरह जाजी के मामले में भी संघ की आधिकारिक दर और खुले बाजार के दाम के बीच भारी विसंगति बनी हुई है।

## मांग में बदलाव से कीमतों की चाल
कीमतों में आए इस भारी फेरबदल की मुख्य वजह त्योहारी चक्र के दौरान मांग का उतार-चढ़ाव है। दरअसल, पितृ पक्ष के दौरान आमतौर पर पूजा और मांगलिक आयोजनों के सीमित रहने से फूलों की मांग काफी गिर जाती है और भाव निचले स्तरों पर आ जाते हैं। इसके उलट, जैसे ही नवरात्रि और दशहरा का पर्व शुरू होता है, मंदिरों, पंडालों और घरों में दैनिक पूजन तथा भव्य सजावट के लिए फूलों की खरीदारी बहुत तेजी से बढ़ जाती है। इसी अचानक बढ़ी हुई उपभोक्ता मांग ने मंडियों में शंकरपुरा चमेली और जाजी फूलों के भाव को आसमान पर पहुंचा दिया है।

## इसका आप पर असर
त्योहारी सीजन में फूलों के दाम पांच गुना तक बढ़ जाने से पूजा, धार्मिक अनुष्ठानों और सजावट का खर्च काफी बढ़ गया है।

- **पूजा और त्योहार के बजट पर असर:** शंकरपुरा चमेली ₹1,600 और जाजी फूल ₹800 प्रति अट्टे तक बिकने से श्रद्धालुओं को काफी अधिक पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। इससे त्योहारों के दौरान होने वाले दैनिक घरेलू खर्च में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो गई है।
- **खुदरा खरीदारी में सतर्कता:** उत्पादक संघ की तय दर और खुले बाजार के भाव में ₹1,000 से अधिक का भारी अंतर मौजूद है। ऐसे में खरीदारों को अलग-अलग मंडियों और दुकानों पर मोलभाव करके ही खरीदारी करनी चाहिए।
- **वैकल्पिक फूलों का चयन:** अत्यधिक महंगी चमेली की तुलना में उपभोक्ता अन्य सुलभ व किफायती फूलों का रुख कर सकते हैं। इससे अनुष्ठान की जरूरतों को कम खर्च में पूरा किया जा सकता है।
- **त्योहारी चक्र पर नजर:** पितृ पक्ष के बाद नवरात्रि में मांग बढ़ते ही कीमतों में यह उछाल आता है। खरीदार आगे के आयोजनों के लिए बाजार के इस मौसमी रुख को ध्यान में रखकर अग्रिम योजना बना सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
नवरात्रि और दशहरा पर्व की शुरुआत के साथ ही फूलों की मांग में अचानक भारी तेजी आई, जिससे बाजार भाव आसमान पर पहुंच गए।

- **त्योहारी मांग में अचानक उछाल:** पितृ पक्ष समाप्त होते ही नवरात्रि के दौरान देवी पूजा, धार्मिक चढ़ावे और सजावट के लिए ताजे फूलों की खरीदारी में भारी तेजी दर्ज की गई। सीमित आवक के मुकाबले तेज मांग ने खुले बाजार में कीमतों को ऊपर धकेल दिया।
- **खुले बाजार और संघ की दर में बड़ा फासला:** उत्पादक संघ द्वारा तय की गई दर और खुले बाजार की वास्तविक बिक्री दर के बीच बहुत बड़ा अंतर देखा गया। हालांकि, खुले बाजार में संघ की निर्धारित दर से इतना अधिक भाव वसूलने के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
- **मौसमी चक्र का प्रभाव:** पितृ पक्ष के दौरान मांग में आई सुस्ती के चलते कीमतें काफी नीचे चली गई थीं। जैसे ही त्योहारी सीजन शुरू हुआ, दबी हुई मांग एकदम से बाहर आई और भाव 15 दिनों में पांच गुना से अधिक बढ़ गए।

## सवाल-जवाब

### 1. शंकरपुरा चमेली की कीमत में कितना उछाल आया है?
शंकरपुरा चमेली के दाम करीब 15 दिनों में ₹240–300 प्रति अट्टे से बढ़कर ₹1,600 प्रति अट्टे तक पहुंच गए हैं, जो पांच गुने से भी अधिक की बढ़ोतरी है।

### 2. रविवार, 11 अक्टूबर को खुले बाजार में चमेली का क्या भाव रहा?
रविवार, 11 अक्टूबर को खुले बाजार में शंकरपुरा चमेली ₹1,600 प्रति अट्टे तक के भाव पर बिकी।

### 3. मल्लिगे उत्पादक संघ ने चमेली की क्या दर तय की थी?
मल्लिगे उत्पादक संघ ने शंकरपुरा चमेली के लिए ₹570 प्रति अट्टे की दर निर्धारित की थी।

### 4. जाजी फूलों के बाजार भाव और संघ की तय दर में क्या अंतर रहा?
जाजी फूल खुले बाजार में ₹800 प्रति अट्टे तक बिके, जबकि उत्पादक संघ ने इसके लिए ₹160 प्रति अट्टे की दर तय की थी।

### 5. फूलों की कीमतों में इतनी तेजी आने की मुख्य वजह क्या है?
पितृ पक्ष के बाद नवरात्रि और दशहरा के दौरान पूजा, धार्मिक चढ़ावे और सजावट के लिए फूलों की मांग अचानक बढ़ जाना इसकी मुख्य वजह है।

### 6. फूलों की माप के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘अट्टे’ का क्या अर्थ है?
‘अट्टे’ फूलों की एक खास मात्रा को दर्शाने वाली माप है, हालांकि इसकी सटीक वजन या संख्या स्पष्ट नहीं है।

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