# त्योहारी सीजन में घर लौटने की जद्दोजहद, बेंगलुरू से बिहार जाने वाली बसों में मची अफरातफरी

> दिवाली और छठ महापर्व के चलते घर जाने वालों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां बेंगलुरू से बिहार जाने वाली बसों के सामने अफरातफरी का माहौल देखा गया और पुणे-नागपुर रूट पर किराया आसमान छू रहा है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/tyohari-sijana-men-ghara-lautane-ki-jaddojahada-bengaluru-se-bihar-jane-vali-bason-men-machi-apharataphari-56154 · **Language:** Hindi
**Tags:** छठ पूजा, दिवाली, बेंगलुरू, बिहार, बस किराया, पुणे, नागपुर

दिवाली और उसके तुरंत बाद आने वाले छठ महापर्व को लेकर अपने घरों की तरफ लौटने वाले प्रवासियों के लिए सफर एक बड़ी चुनौती बन गया है। काम और रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग जब त्योहार मनाने अपने गृह राज्य बिहार जाने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें सीटों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जिन्होंने पहले से रिजर्वेशन करा भी लिया है, उन्हें भी अपनी सीट तक पहुंचने के लिए भारी धक्का-मुक्की और भीड़ से जूझना पड़ रहा है।

## बेंगलुरू से बिहार जाने वाली स्लीपर बस के बाहर भारी जमावड़ा
बेंगलुरू से बिहार के लिए रवाना होने वाली एक स्लीपर बस के सामने का दृश्य बेहद तनावपूर्ण देखने को मिला। सोशल मीडिया पर सामने आए दृश्यों में साफ दिखा कि पहले से पूरी तरह बुक हो चुकी इस बस के बाहर यात्रियों का ऐसा भारी हुजूम उमड़ पड़ा, जैसा आमतौर पर किसी सामान्य रोडवेज बस स्टैंड पर त्योहारी दिनों में देखने को मिलता है। बस में दाखिल होने को लेकर मुसाफिरों के बीच तीखी नोकझोंक और जुबानी तकरार शुरू हो गई।

भीड़ में खड़े बहुत से यात्री इस उम्मीद में घंटों बस को घेरे रहे कि शायद किसी कंफर्म टिकट वाले यात्री के न आने पर कोई खाली सीट मिल सके। वे मौके पर ही तुरंत पूरा किराया चुकाकर बस में सवार होने की ताक में थे। घर पहुंचने की बेताबी के कारण लोग किसी भी तरह यात्रा पूरी करने के लिए बेबस नजर आए।

## ट्रेनों में जगह नहीं, फ्लाइट और निजी बसों के किराए में बेतहाशा उछाल
त्योहारों के इस मौसम में सार्वजनिक और निजी परिवहन दोनों पर जबर्दस्त दबाव बना हुआ है। केवल लंबी दूरी की अंतरराज्यीय बसें ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख मार्गों पर भी हालात गंभीर हैं। पुणे और नागपुर के बीच यात्रा करने वालों के सामने भी ऐसा ही बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस रूट पर नियमित ट्रेनों में सीटें पूरी तरह फुल हो चुकी हैं, जिसके चलते लोग अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।

विकल्पों की कमी का फायदा उठाते हुए निजी ट्रैवल ऑपरेटरों और एयरलाइंस ने किराए कई गुना बढ़ा दिए हैं। पुणे से नागपुर के बीच हवाई टिकट का खर्च 19000 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं सड़क मार्ग पर लगभग 700 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली निजी बसों में एक सीट के लिए 7000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। अत्यधिक मांग और सीमित साधनों के कारण अपने परिवारों के पास पहुंचने की कोशिश कर रहे आम यात्रियों की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है।

## इसका आप पर असर
त्योहारी सीजन में घर जाने की योजना बना रहे यात्रियों को भारी भीड़ और अतिरिक्त किराए के लिए तैयार रहना होगा।

- **भारत में:** प्रमुख शहरों से त्योहारी रूटों पर सार्वजनिक और निजी परिवहन में क्षमता से कई गुना अधिक मांग बनी हुई है। यदि आपने पहले से टिकट बुक नहीं कराया है, तो अंतिम समय पर यात्रा करने से बचें या वैकल्पिक तारीखें तलाशें।
- **बिहार और महाराष्ट्र में:** बेंगलुरू से बिहार जाने वाली बसों में अत्यधिक भीड़ के कारण बोर्डिंग के समय पहले पहुंचना जरूरी है। पुणे से नागपुर जाने वाले यात्रियों को 700 किलोमीटर के सफर के लिए 7000 रुपये तक और हवाई यात्रा के लिए 19000 रुपये तक का भारी खर्च उठाना पड़ सकता है।
- **सीट उपलब्धता:** रिजर्वेशन होने के बावजूद बसों के पास भारी भीड़ और नोकझोंक की स्थिति बन रही है। बिना कंफर्म टिकट वाले यात्री खाली सीट की उम्मीद में समय बर्बाद करने के बजाय अधिकृत माध्यमों से ही सीट सुनिश्चित करें।
- **बजट पर असर:** सीमित साधनों और अचानक बढ़ी मांग के चलते निजी ऑपरेटर सामान्य से कई गुना अधिक किराया वसूल रहे हैं। यात्रियों को अपनी जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को ध्यान में रखकर ही यात्रा का प्रबंध करना चाहिए।

## ऐसा क्यों हुआ
दिवाली और छठ महापर्व के एक साथ पड़ने के कारण बड़े शहरों से अपने गृह राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई है।

- **लगातार दो बड़े त्योहार:** दिवाली के तुरंत बाद छठ पूजा होने से दूसरे राज्यों में रहने वाले कामकाजी लोग एक साथ घर वापसी कर रहे हैं। इस भारी संख्या के चलते परिवहन के नियमित साधन पूरी तरह नाकाफी साबित हो रहे हैं।
- **ट्रेनों की पूरी क्षमता भरना:** प्रमुख मार्गों पर चलने वाली ट्रेनों में सीटें बहुत पहले से पूरी तरह बुक हो चुकी हैं। रेल टिकट न मिलने के कारण यात्रियों का पूरा दबाव निजी बसों और उड़ानों पर आ गया है।
- **मांग और आपूर्ति में भारी अंतर:** अतिरिक्त भीड़ की तुलना में बसों और उड़ानों की संख्या सीमित है। इसी भारी मांग के कारण निजी बस ऑपरेटर 700 किलोमीटर के सफर के 7000 रुपये और एयरलाइंस 19000 रुपये तक वसूल रही हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. बेंगलुरू से बिहार जाने वाली बस के बाहर भीड़ क्यों जमा थी?
यात्री इस उम्मीद में बस घेरे खड़े थे कि यदि किसी यात्री की सीट छूट जाए तो वे तुरंत पैसा देकर उसमें सवार हो सकें।

### 2. पुणे से नागपुर के बीच निजी बसों का किराया कितना पहुंच गया है?
700 किलोमीटर की इस दूरी के लिए निजी बसों में एक सीट का किराया 7000 रुपये तक वसूला जा रहा है।

### 3. पुणे और नागपुर मार्ग पर हवाई यात्रा का किराया कितना दर्ज किया गया?
इस रूट पर बढ़ती मांग के कारण उड़ानों का किराया 19000 रुपये तक पहुंच गया है।

### 4. इस भारी भीड़ और यात्रा संकट का मुख्य कारण क्या है?
दिवाली और उसके तुरंत बाद छठ पर्व होने के कारण भारी संख्या में प्रवासी एक साथ घर लौट रहे हैं और ट्रेनें पूरी तरह फुल हैं।

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