# त्योहारों के बाद दिल्ली में हवा लगातार तीसरे दिन खराब, कई इलाकों में सूचकांक ढाई सौ के पार

> राष्ट्रीय राजधानी में प्रतिकूल मौसम और धुएं के बीच वायु गुणवत्ता लगातार तीसरे दिन खराब श्रेणी में दर्ज की गई, जहां जहांगीरपुरी और मुंडका समेत कई क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/tyoharon-ke-bada-delhi-men-hava-lagatara-tisare-dina-kharaba-kai-ilakon-men-suchakanka-dhai-sau-ke-para-51257 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिल्ली प्रदूषण, वायु गुणवत्ता सूचकांक, ग्रैप 1, प्रदूषण नियंत्रण, सीएक्यूएम, मनजिंदर सिंह सिरसा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में त्योहारों के बाद लगातार तीसरे दिन भी आबोहवा में कोई सुधार नहीं दिखा और शनिवार को वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी में बनी रही। ताजे सरकारी आंकड़ों के मुताबिक समूची दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 180 दर्ज किया गया है। दशहरा उत्सव के बाद वातावरण में फैले धुएं और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। हवा की गति धीमी पड़ने और पारे में उतार-चढ़ाव की वजह से प्रदूषक तत्व निचले वायुमंडल में ही फंसे रह गए हैं, जिसके चलते शहर के ऊपर धुंध की एक मोटी चादर छाई हुई है। हालात पर काबू पाने के लिए प्रशासनिक तंत्र ने जमीन पर प्रदूषण रोधी उपायों को काफी तेज कर दिया है।

## कई निगरानी केंद्रों पर स्थिति अधिक गंभीर
राजधानी के समग्र औसत के मुकाबले कई प्रमुख इलाकों में वायु प्रदूषण की स्थिति कहीं ज्यादा चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली के अलग-अलग निगरानी केंद्रों से मिले आंकड़ों से पता चलता है कि बाहरी और घनी आबादी वाले कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक ढाई सौ के स्तर को पार कर गया। निगरानी केंद्रों के अनुसार जहांगीरपुरी में एक्यूआई 270 दर्ज हुआ, जबकि मुंडका में यह 264 रहा। इसके अलावा विवेक विहार में सूचकांक 261 और अलीपुर में 254 रिकॉर्ड किया गया।

इसी तरह शहर के अन्य प्रमुख रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों में भी प्रदूषण बढ़ा हुआ मिला। पंजाबी बाग केंद्र पर एक्यूआई 247, आरके पुरम में 240, आईआईटी दिल्ली में 221 और बुराड़ी क्रॉसिंग पर 217 दर्ज किया गया। पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में यह स्तर 211 रहा, जबकि पूसा और सिरिफोर्ट में एक्यूआई 209 तथा द्वारका सेक्टर-8 में 206 दर्ज किया गया। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को तो स्थिति और भी नाजुक हो गई थी, जब तीन केंद्रों पर वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में दर्ज हुई थी। उस दिन पंजाबी बाग में 302, पूसा में 319 और आरके पुरम में 307 एक्यूआई रहा था। शुक्रवार को आंकड़े देने वाले कुल 56 निगरानी केंद्रों में से 36 पर हवा खराब श्रेणी में पाई गई थी, जबकि बाकी केंद्रों पर यह मध्यम स्तर पर थी।

## प्रदूषण के हॉटस्पॉट के लिए बनेगा लक्षित एक्शन प्लान
गंभीर होते हालातों की समीक्षा के लिए आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि शहर के सबसे प्रभावित हॉटस्पॉट की फौरन पहचान की जाए और उनके लिए एक लक्षित कार्ययोजना तैयार की जाए। पर्यावरण मंत्री ने अधिकारियों से विभिन्न निगरानी केंद्रों से आ रहे एक्यूआई आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करने को कहा ताकि हर इलाके में प्रदूषण बढ़ने के असली स्थानीय कारणों का पता लगाया जा सके।

समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया गया कि विश्लेषण पूरा होते ही संबंधित जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी और तय समयसीमा के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने होंगे। अधिकारियों के अनुसार स्थानीय स्तर पर प्रदूषण फैलाने वाले संभावित कारकों में सड़कों पर उड़ने वाली धूल, ट्रैफिक जाम के कारण वाहनों की भीड़, अनियंत्रित निर्माण गतिविधियां, अनधिकृत पार्किंग और खुले में कचरा जलाना शामिल हैं। अब अधिकारियों को इन्हीं स्थानीय कारणों के आधार पर इलाकेवार सख्त कार्रवाई की विस्तृत रूपरेखा तैयार करनी होगी।

## ग्रैप का पहला चरण लागू और प्रदूषण के मुख्य स्रोत
इस सप्ताह की शुरुआत में जब वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में दर्ज होना शुरू हुआ था, तब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पूरे दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण को लागू करने के निर्देश दिए थे। इस चरण के तहत निर्माण एवं तोड़फोड़ से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन कराने, सड़कों पर पानी का छिड़काव कर धूल नियंत्रण करने, कचरा प्रबंधन में सुधार लाने और पुराने व धुआं उगलने वाले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर पाबंदी लगाने पर मुख्य जोर दिया जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों में दिल्ली के प्रदूषण स्रोतों का एक विस्तृत विवरण भी सामने आया है। इस सूची के अनुसार राजधानी की आबोहवा बिगाड़ने में सबसे बड़ी हिस्सेदारी परिवहन क्षेत्र की है, जो अकेले 20.3 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद आवासीय स्रोतों का योगदान 5.2 प्रतिशत, औद्योगिक गतिविधियों का 4.2 प्रतिशत और निर्माण कार्यों का 2.6 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं ऊर्जा क्षेत्र से 2 प्रतिशत, खुले में कचरा जलाने से 1.8 प्रतिशत, सड़कों की उड़ती धूल से 1.4 प्रतिशत और अन्य फुटकर स्रोतों से 1.3 प्रतिशत प्रदूषण फैलता है। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान ग्रैप के नियमों को जमीन पर सख्ती से लागू करने पर केंद्रित है ताकि हवा को और अधिक जहरीला होने से रोका जा सके।

## इसका आप पर असर
दिल्ली और एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब होने से आम नागरिकों के स्वास्थ्य और दिनचर्या पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

- **दिल्ली-एनसीआर में:** ग्रैप के पहले चरण के लागू होने से निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के नियम बेहद सख्त हो गए हैं। निर्माण से जुड़े ठेकेदारों और मकान मालिकों को नियमों का उल्लंघन करने पर भारी चालान और काम बंद होने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
- **दैनिक यात्रियों के लिए:** प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 20.3 प्रतिशत होने के कारण ट्रैफिक पुलिस पुराने और अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले वाहनों की सघन जांच कर रही है। बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, इसलिए चालकों को तुरंत अपनी जांच पूरी करानी चाहिए।
- **बुजुर्गों और बच्चों के लिए:** जहांगीरपुरी, मुंडका और विवेक विहार जैसे इलाकों में एक्यूआई 250 से ऊपर जाने से सांस के मरीजों को बाहर निकलने पर परेशानी हो सकती है। चिकित्सकों ने सुबह की सैर सीमित करने और घर से बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग करने की सलाह दी है।
- **स्थानीय निवासियों के लिए:** खुले में कूड़ा जलाने और अनाधिकृत पार्किंग पर स्थानीय निकायों की निगरानी कड़ी कर दी गई है। कूड़ा जलाने या अवैध पार्किंग पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माना तय किया जा रहा है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति त्योहारों के बाद पैदा हुए धुएं, मौसमी बदलाव और स्थानीय उत्सर्जन के परस्पर मिलने की वजह से उत्पन्न हुई है।

- **सीधा कारण:** दशहरा उत्सव के बाद हवा में जमा हुआ धुआं और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां हवा के बिगड़ने की मुख्य वजह बनी हैं। शांत हवाओं के कारण प्रदूषक कण वायुमंडल के निचले हिस्से में जमा हो गए हैं और बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
- **उत्सर्जन के स्थानीय स्रोत:** राजधानी में वाहनों का धुआं कुल सूचीबद्ध प्रदूषण में 20.3 प्रतिशत की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखता है, जबकि रिहायशी इलाकों, उद्योगों और निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। सड़कों पर जाम और अनियंत्रित पार्किंग भी स्थानीय प्रदूषण को बढ़ाती है।
- **मौसमी परिस्थितियां:** हर साल सर्दियों की शुरुआत और त्योहारों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में हवा की गति धीमी हो जाती है और तापमान गिरने लगता है। इस मौसमी बदलाव के कारण हवा में धुंध और धुएं की परत छाई रहती है, जिससे हर साल इस समय एक्यूआई खराब श्रेणी में पहुंच जाता है।
- **आगामी कदम:** हालात को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप का पहला चरण लागू किया है और चिह्नित हॉटस्पॉट के लिए अलग-अलग एक्शन प्लान तैयार किए जा रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. शनिवार को दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) कितना दर्ज किया गया?
शनिवार को दिल्ली का औसत एक्यूआई 180 दर्ज किया गया, जो 'खराब' श्रेणी के अंतर्गत आता है।

### 2. दिल्ली में किन इलाकों में प्रदूषण सबसे अधिक दर्ज हुआ?
जहांगीरपुरी में एक्यूआई 270, मुंडका में 264, विवेक विहार में 261 और अलीपुर में 254 दर्ज किया गया।

### 3. दिल्ली के प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान किस क्षेत्र का है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के सूचीबद्ध प्रदूषण में परिवहन यानी वाहनों की हिस्सेदारी सर्वाधिक 20.3 प्रतिशत है।

### 4. प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कौन सा कदम उठाया है?
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप के पहले चरण को लागू कर दिया है और अत्यधिक प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट के लिए लक्षित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

### 5. शुक्रवार को किन निगरानी केंद्रों पर हवा 'बेहद खराब' श्रेणी में दर्ज की गई थी?
शुक्रवार को पंजाबी बाग (302), पूसा (319) और आरके पुरम (307) में वायु गुणवत्ता 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई थी।

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