उदयपुर के गुप्त ठिकाने से दबोचा गया राहुल रावत, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने 700 किलोमीटर किया पीछा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 700 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद रोहित चौधरी गिरोह के भगोड़े अपराधी राहुल रावत को राजस्थान के उदयपुर से गिरफ्तार कर लिया है। 28 साल का यह आरोपी तिहाड़ जेल में जानलेवा हमले और कारजैकिंग समेत कई संगीन मामलों में चार अदालतों द्वारा घोषित भगोड़ा अपराधी करार दिया जा चुका था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता मिली है। राष्ट्रीय राजधानी से करीब 700 किलोमीटर दूर राजस्थान के उदयपुर में एक विशेष अभियान चलाते हुए पुलिस टीम ने कुख्यात रोहित चौधरी गिरोह के सक्रिय सदस्य राहुल रावत को धर दबोचा। 28 वर्ष का यह आरोपी तिहाड़ जेल के भीतर एक कैदी पर नुकीले हथियारों से जानलेवा हमला करने समेत कई संगीन मामलों में शामिल रहा है। लगातार अदालत की सुनवाइयों से गैरहाजिर रहने और फरारी काटने के चलते विभिन्न अदालतों द्वारा उसे चार अलग-अलग आपराधिक मामलों में घोषित भगोड़ा अपराधी करार दिया जा चुका था। लंबे समय से कानून की गिरफ्त से दूर भाग रहे इस अपराधी को पकड़ने के लिए पुलिस की विशेष टीम ने कई दिनों तक दूसरे राज्य में डेरा डाले रखा था। उदयपुर में गुप्त निगरानी और 700 किलोमीटर का पीछा पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, राहुल रावत गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। वह एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर छिपता रहा ताकि पुलिस की तकनीकी निगरानी और खुफिया तंत्र को गच्चा दे सके। हालांकि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की SWR टीम उसकी हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए थी। इस बीच 17 जुलाई 2026 को पुलिस को सटीक गुप्त सूचना मिली कि फरार चल रहा राहुल रावत राजस्थान के उदयपुर शहर में छिपा हुआ है। सूचना मिलते ही स्पेशल सेल की समर्पित टीम तुरंत राजस्थान के लिए रवाना हुई। उदयपुर पहुंचकर टीम ने सीधे छापेमारी करने के बजाय स्थानीय स्तर पर कई दिनों तक अत्यंत गुप्त तरीके से निगरानी रखी। पुलिस कर्मियों ने वहां की संदिग्ध गतिविधियों और खुफिया इनपुट का बारीकी से सत्यापन किया। जब इस बात की पूरी तरह से पुष्टि हो गई कि आरोपी वहीं मौजूद है, तब 18 जुलाई 2026 को उदयपुर के अग्रवाल कॉलोनी स्थित एक ठिकाने पर घेराबंदी करके उसे गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली से उदयपुर तक का यह पूरा ऑपरेशन लगभग 700 किलोमीटर लंबे पीछा करने के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। तिहाड़ जेल के भीतर जानलेवा हमला और पुरानी रंजिश गिरफ्तार किए गए आरोपी राहुल रावत के आपराधिक इतिहास में सबसे गंभीर मामला तिहाड़ जेल के भीतर हुई एक हिंसक घटना से जुड़ा है। मई 2023 में राहुल रावत ने अपने अन्य आपराधिक सहयोगियों के साथ मिलकर जेल परिसर के अंदर ही एक कैदी को निशाना बनाया था। एक सोची-समझी साजिश के तहत आरोपियों ने नुकीले और धारदार हथियारों से उस कैदी पर अचानक जानलेवा हमला बोल दिया था। उस समय जेल प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों की त्वरित मुस्तैदी के कारण पीड़ित कैदी की जान बचाई जा सकी थी। इस हिंसक वारदात के बाद दिल्ली के हरि नगर पुलिस स्टेशन में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में धारा 147, 148, 149, 307 और 34 शामिल की गई थीं। जांच के दौरान सामने आया था कि जिस कैदी पर तिहाड़ में हमला किया गया था, उसका शुरुआती संबंध रंदीप भाटी गिरोह से था और बाद में वह हिमांशु उर्फ भाऊ गिरोह के संपर्क में आ गया था। हालांकि वह पीड़ित कैदी बाद में फरवरी 2026 में आगरा में उत्तर प्रदेश एसटीएफ और स्थानीय पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारा गया था। दशकों पुराना आपराधिक रिकॉर्ड और भगोड़ा घोषित होना पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राहुल रावत का आपराधिक इतिहास काफी पुराना और विस्तृत रहा है। उसके खिलाफ दिल्ली के अलग-अलग थानों में कारजैकिंग, अपहरण, लूटपाट, मारपीट, मोबाइल झपटमारी, गवाहों को धमकाने, अवैध हथियार रखने और जेल के भीतर हत्या के प्रयास जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं। वह लंबे समय से राजधानी में सक्रिय विभिन्न गिरोहों के संपर्क में रहकर वारदातों को अंजाम दे रहा था। आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड वर्ष 2016 में तब शुरू हुआ जब उसके खिलाफ दिल्ली कैंट इलाके में एक टैक्सी कारजैकिंग का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद वर्ष 2018 में दिल्ली के संगम विहार इलाके में हुए एक सनसनीखेज अपहरण और लूटपाट के केस में भी उसका नाम प्रमुखता से सामने आया था। इन मामलों में जमानत मिलने या जेल से बाहर आने के बाद राहुल रावत ने अदालती कार्यवाहियों से दूरी बना ली। वह लगातार अदालतों की तारीखों पर अनुपस्थित रहता था और पुलिस को चकमा देकर फरार हो जाता था। उसकी इस लगातार गैरहाजिरी के कारण ही अलग-अलग मामलों की सुनवाई कर रही अदालतों ने उसे चार बार घोषित भगोड़ा अपराधी करार दिया था। अपराध की दुनिया का आकर्षण और पुलिस की आगे की पूछताछ पुलिस की शुरुआती जांच-पड़ताल में राहुल रावत की पृष्ठभूमि को लेकर कई अहम खुलासे हुए हैं। उसने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी की थी और उसका परिवार एक सामान्य आर्थिक स्थिति वाला परिवार है। उसके पिता स्थानीय बेकरी में काम करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि वर्ष 2022 में उसकी मां का देहांत हो गया था। सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद वह गिरोहबाजों के रुतबे, उनके पास मौजूद पैसों और इलाके में बनने वाले खौफ से बहुत जल्द प्रभावित हो गया। जल्दी और आसान तरीके से पैसा कमाने तथा अपने आसपास दबदबा कायम करने की चाहत ने उसे आपराधिक तत्वों के करीब ला खड़ा किया। धीरे-धीरे वह स्थानीय अपराधियों के संपर्क में आया और फिर संगठित अपराध नेटवर्क में गहराई तक धंसता चला गया, जिसके बाद वह रोहित चौधरी गिरोह का एक सक्रिय सदस्य बन गया। गिरफ्तारी के बाद स्पेशल सेल की टीम राहुल रावत को दिल्ली ले आई है, जहां उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि अपनी फरारी के दौरान उसने किन-किन स्थानों पर शरण ली, किन लोगों ने उसे आर्थिक और लॉजिस्टिकल मदद दी, वह किन गैंगस्टरों के संपर्क में था और क्या वह किसी नई बड़ी आपराधिक साजिश को अंजाम देने की फिराक में था। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से रोहित चौधरी गिरोह के पूरे नेटवर्क और उसके सहयोगियों के बारे में कई नई जानकारियां उजागर होंगी। इसका आप पर असर भारत में: अंतरराज्यीय गिरोहों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई से राज्यों के बीच अपराधियों की आवाजाही पर लगाम कसेगी और कानून-व्यवस्था की स्थिति मजबूत होगी। दिल्ली और उदयपुर में: रोहित चौधरी गैंग के सक्रिय सदस्य की गिरफ्तारी से दिल्ली के रिहायशी इलाकों में आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगेगा, वहीं उदयपुर में शरण लेने वाले बाहरी अपराधियों के नेटवर्क का पर्दाफाश होगा। सवाल-जवाब 1. राहुल रावत कौन है? राहुल रावत रोहित चौधरी गिरोह का 28 वर्षीय सक्रिय सदस्य है, जिसे चार अलग-अलग आपराधिक मामलों में अदालत द्वारा घोषित भगोड़ा अपराधी करार दिया गया था। 2. राहुल रावत को कहां और कैसे गिरफ्तार किया गया? उसे 18 जुलाई 2026 को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की SWR टीम ने करीब 700 किलोमीटर पीछा करने के बाद राजस्थान के उदयपुर स्थित अग्रवाल कॉलोनी से गिरफ्तार किया। 3. राहुल रावत से जुड़ा तिहाड़ जेल का मुख्य मामला क्या था? मई 2023 में राहुल रावत और उसके साथियों ने तिहाड़ जेल के अंदर एक कैदी पर नुकीले हथियारों से जानलेवा हमला किया था, जिसके बाद हरि नगर थाने में हत्या के प्रयास का मामला दर्ज हुआ था। 4. तिहाड़ जेल में हमले के शिकार हुए कैदी का क्या हुआ? जेल प्रशासन के समय पर हस्तक्षेप से वह कैदी 2023 के हमले में बच गया था, लेकिन बाद में फरवरी 2026 में आगरा में उत्तर प्रदेश एसटीएफ और पुलिस के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। 5. राहुल रावत के खिलाफ और कौन-कौन से आपराधिक मामले दर्ज हैं? उसके आपराधिक रिकॉर्ड में 2016 का दिल्ली कैंट कारजैकिंग मामला, 2018 का संगम विहार में अपहरण और लूट का केस, गवाहों को धमकाने, अवैध हथियार रखने तथा मोबाइल लूट के मामले शामिल हैं। 6. अपराध की दुनिया में उसके आने को लेकर पुलिस जांच में क्या सामने आया? पुलिस जांच में पता चला कि 12वीं तक पढ़े होने और एक सामान्य परिवार (पिता बेकरी में कार्यरत) से आने के बावजूद वह गैंग्स्टर की जीवनशैली और दबदबे से प्रभावित होकर अपराध की राह पर चला गया था। https://trendkia.com/national/udaipur-ke-gupta-thikane-se-dabocha-gaya-rahul-rawat-delhi-pulisa-speshala-sela-ne-700-kilomitara-kiya-pichha-14024 TrendKia — Har trend, sabse pehle.