यूपी और छत्तीसगढ़ समेत 14 राज्यों में भारी बारिश से तबाही, लखनऊ और कानपुर में टूटा दशकों का रिकॉर्ड भारत के 14 से अधिक राज्यों में सितंबर के अंत में आई भारी बारिश और आंधी-तूफान ने भयंकर तबाही मचाई है, जिसमें उत्तर प्रदेश में दशकों पुराने रिकॉर्ड टूट गए हैं और जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। सितंबर महीने का आखिरी हफ्ता देश के कई हिस्सों के लिए आफत बनकर आया है। भारत के 14 से अधिक राज्यों में इस समय सैलाबी संकट की स्थिति बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। उत्तर-पूर्वी राज्यों से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों तक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे मैदानी राज्यों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण सड़कों पर पानी भर गया है और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में 29 सितंबर तक मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के 63 जिले इस समय इस विनाशकारी आंधी-पानी की चपेट में हैं, जहां लखनऊ, कानपुर और गोरखपुर जैसे बड़े शहरों के शहरी क्षेत्र पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। आखिर क्यों हो रही है सितंबर के अंत में इतनी भयंकर बारिश? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बेमौसम और अत्यधिक बारिश के पीछे का मुख्य कारण दक्षिण छत्तीसगढ़ और उसके आस-पास के क्षेत्रों के ऊपर बना एक मजबूत मौसमी तंत्र है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में डीप डिप्रेशन कहा जाता है। यह डीप डिप्रेशन वर्तमान में मध्य और पूर्वी भारत के मौसम को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। यह मौसमी प्रणाली धीरे-धीरे उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही है, जिसके चलते समुद्र से भारी मात्रा में नमी वाली हवाएं मैदानी इलाकों की तरफ आ रही हैं। इन हवाओं के मार्ग में आने वाले सभी राज्यों में बड़े पैमाने पर और लगातार बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे जलभराव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। क्या होता है डीप डिप्रेशन और यह कैसे बनता है? समुद्र के ऊपर डीप डिप्रेशन का निर्माण वायुमंडलीय दबाव में होने वाली भारी कमी और समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि के कारण होता है। जब समुद्र की सतह का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो वहां की हवा गर्म होकर तेजी से ऊपर की ओर उठने लगती है। गर्म हवा के ऊपर उठने से समुद्र की सतह के ठीक ऊपर एक खाली स्थान बन जाता है, जिसे विज्ञान में लो प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र कहा जाता है। जब यह कम दबाव का क्षेत्र और अधिक शक्तिशाली हो जाता है और इसके केंद्र में हवाओं की गति 31 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है, तो इसे सामान्य डिप्रेशन कहा जाता है। लेकिन, जब यह मौसमी सिस्टम और अधिक सघन हो जाता है और हवा की गति बढ़कर 51 से 62 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है, तो इसे डीप डिप्रेशन का नाम दिया जाता है। यही सिस्टम इस समय भारी आंधी और बारिश का कारण बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के 63 जिलों में तबाही और बिजली संकट उत्तर प्रदेश के लिए यह मानसूनी बारिश बेहद नुकसानदेह साबित हो रही है। राज्य के लखनऊ, कानपुर, गोंडा, श्रावस्ती और गोरखपुर समेत कुल 63 जिले इस समय मूसलाधार बारिश की मार झेल रहे हैं। लगातार जारी बारिश के कारण रिहायशी इलाकों में कई फीट तक पानी भर गया है और सड़कें नदियों में तब्दील हो गई हैं। गोरखपुर, देवरिया, मऊ और बलिया के ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी खराब है, जहां तेज आंधी और बारिश के कारण सैकड़ों स्थानों पर पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। इसके कारण इन जिलों के बड़े हिस्से में पावर कट घोषित कर दिया गया है और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। मौसम के इस बिगड़े मिजाज के कारण राजनीतिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा है और श्रावस्ती में होने वाला AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का दौरा रद्द करना पड़ा है। लखनऊ और कानपुर में टूटे दशकों पुराने रिकॉर्ड इस बार की बारिश ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में इतिहास के पन्ने पलट दिए हैं। राज्य की राजधानी लखनऊ में बारिश ने पिछले 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जबकि औद्योगिक नगरी कानपुर में 45 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त हो गया है। लगातार हो रही बारिश से गांवों से लेकर शहरों की तंग गलियों तक में पानी भर गया है। खेतों में खड़ी सैकड़ों बीघा फसलें पानी में डूबकर पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। भारी बारिश, आंधी-तूफान और वज्रपात के कारण राज्य भर में जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूरे राज्य में बारिश जनित हादसों के कारण 15 लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है और करीब 117 पक्के और कच्चे मकान ढह गए हैं। ऐतिहासिक इमारतों और बुनियादी ढांचे को पहुंचा नुकसान इस आपदा का असर लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों पर भी पड़ा है। शहर में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण हुसैनाबाद गेट का एक ऊपरी हिस्सा अचानक भरभरा कर गिर गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे के वक्त गेट के नीचे कोई मौजूद नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने मलबे को हटाने और गेट के नीचे से गुजरने वाले रास्ते को बंद कर दिया है। स्थानीय प्रशासन ने जल्द ही इस ऐतिहासिक गेट के जीर्णोद्धार का काम शुरू करने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की तस्वीरें उन्नाव से भी सामने आई हैं, जहां गंगा एक्सप्रेसवे के बशीरतगंज टोल प्लाजा के पास भारी जलभराव हो गया है। एक्सप्रेसवे के चारों तरफ पानी भर जाने के कारण वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है और लंबी कतारें लग गई हैं। अन्य राज्यों में भी हाहाकार और बचाव कार्य उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य पड़ोसी राज्यों में भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए SDRF और NDRF की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। बिहार की बात करें तो वहां कोसी और गंडक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में तेज हवाओं के साथ समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं, जिसके कारण प्रशासन ने मछुआरों और स्थानीय लोगों को समुद्र तट से दूर रहने की सख्त हिदायत जारी की है। वहीं, उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है, जिससे मैदानी इलाकों में भी तापमान में गिरावट आई है। इसका आप पर असर इस भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति से देश के कई हिस्सों में रहने वाले नागरिकों का दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है। • यातायात में रुकावट: उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में जलभराव के कारण सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है। यात्रियों को घर से निकलने से पहले स्थानीय ट्रैफिक रूट की जांच करनी चाहिए। • आवास और सुरक्षा: उत्तर प्रदेश में कमजोर संरचना वाले मकानों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहना होगा क्योंकि राज्य में 117 घर पहले ही ढह चुके हैं। प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है। • कृषि और फसलें: खेतों में पानी भरने के कारण किसानों की तैयार फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसके चलते आने वाले दिनों में स्थानीय बाजारों में सब्जियों और अनाज की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। • बिजली और संचार सेवाएं: आंधी के कारण पेड़ गिरने से कई जिलों में बिजली कटौती की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपने मोबाइल और पावर बैंक पहले से चार्ज रखें। ऐसा क्यों हुआ इस अप्रत्याशित आंधी-पानी और बाढ़ जैसी स्थिति का कारण एक विशेष मौसमी प्रणाली का सक्रिय होना है। • डीप डिप्रेशन का प्रभाव: दक्षिण छत्तीसगढ़ और उसके आस-पास बने डीप डिप्रेशन के कारण पूर्वी और मध्य भारत में भारी मात्रा में नमी वाली हवाएं आ रही हैं। यह सिस्टम उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। • समुद्री तापमान में वृद्धि: बंगाल की खाड़ी और समुद्री सतह का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने के कारण वहां लो प्रेशर एरिया बना। यही सिस्टम आगे चलकर तीव्र होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया। • हवा की तेज गति: इस सिस्टम के मजबूत होने पर हवा की रफ्तार 51 से 62 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई, जिससे बादलों के बनने और तेजी से बरसने की प्रक्रिया तेज हो गई। सवाल-जवाब 1. सितंबर के अंत में इतनी भारी बारिश क्यों हो रही है? दक्षिण छत्तीसगढ़ और उसके आस-पास के इलाकों में बने एक डीप डिप्रेशन के कारण यह मूसलाधार बारिश हो रही है, जो नमी वाली हवाओं को मैदानी इलाकों की तरफ ला रहा है। 2. मौसम विभाग ने किन राज्यों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है? मौसम विभाग ने 29 सितंबर तक छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी से अत्यंत भारी बारिश के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। 3. उत्तर प्रदेश के कौन से शहरों में बारिश के ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूटे हैं? इस बारिश ने लखनऊ में पिछले 15 साल का और कानपुर में पिछले 45 साल का पुराना बारिश का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 4. लखनऊ के किस ऐतिहासिक गेट का हिस्सा बारिश के कारण गिर गया? लगातार हो रही बारिश के कारण लखनऊ के ऐतिहासिक हुसैनाबाद गेट का एक ऊपरी हिस्सा ढह गया है, जिसके बाद सुरक्षा के लिए वहां का रास्ता बंद कर दिया गया है। 5. बिहार में कौन सी प्रमुख नदियां खतरे के निशान की ओर बढ़ रही हैं? बिहार में लगातार हो रही बारिश के कारण कोसी और गंडक नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। https://trendkia.com/national/up-aura-chhattisgarh-sameta-14-rajyon-men-bhari-barisha-se-tabahi-lucknow-aura-kanpur-men-tuta-dashakon-ka-rikorda-39410 TrendKia — Har trend, sabse pehle.