# अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटरों पर ईडी का छापा, पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में 220 कर्मचारी पकड़े गए

> प्रवर्तन निदेशालय ने अमेरिकी नागरिकों से धोखाधड़ी करने वाले कॉल सेंटर नेटवर्क के खिलाफ पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में छापेमारी कर 220 लोगों की पहचान की है. इस तलाशी अभियान में 66 मोबाइल, 13 लैपटॉप और महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज बरामद किए गए हैं.

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/us-nagarikon-ko-nishana-banane-vale-pharji-kola-sentaron-para-ed-ka-chhapa-patiala-pune-aura-chandigarh-men-220-karmachari-pakare--33971 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रवर्तन निदेशालय, फर्जी कॉल सेंटर, पटियाला, पुणे, चंडीगढ़, साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग, अमेरिकी नागरिक

प्रवर्तन निदेशालय के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के बाशिंदों को निशाना बनाकर चलाए जा रहे फर्जी कॉल सेंटर गिरोह के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया है. धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत की गई इस कानूनी कार्रवाई में पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ के 4 अलग-अलग परिसरों पर एक साथ तलाशी ली गई. जांच अधिकारियों ने पाया कि जब छापेमारी की गई, उस वक्त भी 3 बड़े कॉल सेंटर पूरी तरह चालू हालत में थे. इन केंद्रों के भीतर करीब 220 कर्मचारी मौजूद रहकर फोन कॉलिंग के जरिए लोगों को फंसाने में लगे हुए थे. जांच दल अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और उनके संगठनात्मक ढांचे की गहराई से पड़ताल कर रहा है.

## पटियाला और पुणे में मिले सक्रिय कॉल सेंटर
प्रवर्तन निदेशालय को अपने जमीनी सत्यापन और खुफिया विश्लेषण के दौरान यह पुख्ता इनपुट मिला था कि एक संगठित समूह विभिन्न राज्यों में अवैध कॉल सेंटर स्थापित कर धोखाधड़ी कर रहा है. इस सटीक सूचना के आधार पर जांच अधिकारियों की विशेष टीमों ने पटियाला में 2 ठिकानों और पुणे में 1 केंद्र पर धावा बोला. तलाशी के दौरान यह सामने आया कि इन सभी परिसरों को कॉर्पोरेट दफ्तरों की तर्ज पर डिजाइन किया गया था, जहां बड़े पैमाने पर क्यूबिकल्स और वर्कस्टेशन स्थापित किए गए थे. वहां काम कर रहे लोगों के पास कंप्यूटर, हेडसेट, स्मार्टफोन और अत्याधुनिक नेटवर्किंग उपकरण मौजूद थे. मौके पर सक्रिय मिले लगभग 220 कर्मचारियों की पहचान दर्ज कर ली गई है. एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन केंद्रों के भीतर रिपोर्टिंग का पदानुक्रम क्या था और किस कर्मचारी की क्या भूमिका निर्धारित की गई थी.

## अमेरिकी नागरिकों को जाल में फंसाने की कार्यप्रणाली
इन अवैध केंद्रों से मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग के जरिए संपर्क किया जाता था. कॉल करने वाले टेलीकॉलर पीड़ितों को डराने या भ्रमित करने के लिए मनगढ़ंत कहानियां सुनाते थे और उनसे विभिन्न बहानों के तहत पैसे भेजने का दबाव बनाते थे. पटियाला में पकड़े गए दोनों केंद्रों से ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो अमेरिकी बाशिंदों से वसूली और ठगी की पुष्टि करते हैं. तलाशी के दौरान बरामद मोबाइल फोन और एक प्रमुख लैपटॉप में इस सिंडिकेट के काम करने का पूरा कच्चा-चिट्ठा मिला है. इस डिजिटल सामग्री में उन सभी पीड़ितों का ब्योरा दर्ज है जिनसे अब तक पैसे ऐंठे गए थे, साथ ही ठगी से प्राप्त हुई रकम का लेखा-जोखा भी इन दस्तावेजों में पाया गया है.

## पुणे केंद्र और दोनों शहरों के नेटवर्क का संबंध
पुणे में जिस तीसरे कॉल सेंटर पर छापा मारा गया, वहां भी अमेरिकी नागरिकों को ठगने का बिल्कुल वही तरीका अपनाया जा रहा था जो पटियाला में देखने को मिला. जांच अधिकारी अब दोनों शहरों के बीच मौजूद आंतरिक संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में लगे हैं. इस जांच का मुख्य केंद्र बिंदु यह समझना है कि क्या दोनों शहरों के इन केंद्रों को एक ही संगठित गिरोह द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था, कॉलिंग का केंद्रीय सिस्टम कहां से संचालित होता था और दोनों ठिकानों के बीच वित्तीय संसाधनों का आदान-प्रदान किस माध्यम से किया जा रहा था. इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर इन दोनों केंद्रों का दैनिक प्रबंधन किन लोगों के हाथों में सौंपा गया था.

## चंडीगढ़ से संचालित हो रहा था मास्टरमाइंड का ठिकाना
इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचने के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने चंडीगढ़ स्थित एक आवासीय परिसर पर भी छापा मारा. इस आवासीय परिसर का इस्तेमाल पटियाला के केंद्रों को नियंत्रित करने और पूरे ऑपरेशन की निगरानी करने वाले मास्टरमाइंड द्वारा किया जा रहा था. इस ठिकाने की तलाशी के दौरान कई अहम डिजिटल उपकरण मिले हैं जिनमें कॉल सेंटरों के संचालन से जुड़ा संवेदनशील डेटा सुरक्षित रखा गया था. इसी परिसर से एक ऐसे व्यक्ति की पहचान भी सामने आई है जो अमेरिकी डॉलर में हासिल की गई अवैध रकम को भारतीय रुपये में बदलने और उसे विभिन्न खातों में व्यवस्थित करने का काम संभालता था. जांच एजेंसी अब इस व्यक्ति के बैंक खातों और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है.

## डिजिटल उपकरणों की जब्ती और आगे की जांच
चारों ठिकानों पर चलाए गए इस तलाशी अभियान के दौरान जांच अधिकारियों ने 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, नकदी, आधुनिक संचार उपकरण और कई अहम कागजात अपने कब्जे में लिए हैं. इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को विस्तृत तकनीकी और फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए सुरक्षित किया गया है. जांचकर्ताओं का प्राथमिक लक्ष्य यह पता लगाना है कि अमेरिकी नागरिकों को फोन करते समय किस तरह की कॉल स्क्रिप्ट का उपयोग किया जाता था और अंतरराष्ट्रीय कॉल करने के लिए किस डायलर या वीओआईपी (VoIP) तकनीक का सहारा लिया जा रहा था. एजेंसी यह भी जांच रही है कि पीड़ितों के संपर्क सूत्र कहां से खरीदे गए थे और ठगी के पैसों को किन-किन रास्तों से होकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाया गया. इस पूरे रैकेट की कड़ियों को पूरी तरह बेनकाब करने के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

## इसका आप पर असर
इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोहों की कार्यप्रणाली और नागरिकों की सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ेगा.

- **भारत में:** देश भर में अवैध कॉल सेंटरों पर सुरक्षा और वित्तीय एजेंसियों की निगरानी और अधिक सख्त होगी. आम नागरिकों और युवाओं को रोजगार की तलाश में बिना पृष्ठभूमि जांचे ऐसे संदेहास्पद अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटरों में काम करने से बचना चाहिए.
- **पटियाला और पुणे में:** इन दोनों शहरों में व्यावसायिक परिसरों और आईटी स्पेस को किराए पर देने वाले मकान मालिकों को अब किरायेदारों का सत्यापन अनिवार्य रूप से बढ़ाना होगा. स्थानीय स्तर पर काम तलाशने वाले युवाओं को कॉल सेंटर की आड़ में चल रहे फर्जी वित्तीय अभियानों की पहचान कर सचेत रहना होगा.
- **डिजिटल सुरक्षा:** इस जांच से वीओआईपी तकनीक और अनधिकृत अंतरराष्ट्रीय गेटवे के दुरुपयोग पर तकनीकी पाबंदियां लगने की संभावना बढ़ेगी. आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अनजान अंतरराष्ट्रीय नंबरों से आने वाली कॉल और धमकियों से सतर्क रहने में मदद मिलेगी.
- **वित्तीय जागरूकता:** विदेशी मुद्रा को अनौपचारिक रास्तों से घरेलू मुद्रा में बदलने वाले हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग चैनलों पर कानूनी शिकंजा कसेगा. संदिग्ध बैंक खातों और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए होने वाले असामान्य लेन-देन पर बैंकों की रिपोर्टिंग प्रणाली और तेज होगी.

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी कार्रवाई उन अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी सिंडिकेट्स के खिलाफ शुरू की गई जो भारत से तकनीकी ढांचे का दुरुपयोग कर विदेशी नागरिकों से धन ऐंठ रहे थे.

- **सीधा कारण:** प्रवर्तन निदेशालय के हैदराबाद जोनल ऑफिस को जमीनी खुफिया जांच के दौरान इन फर्जी कॉल सेंटरों के संचालन और वित्तीय हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिले थे. इसी सटीक सूचना के आधार पर धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत तलाशी की शुरुआत की गई.
- **तकनीकी व्यवस्था:** कॉल सेंटरों ने आधुनिक वीओआईपी प्रणालियों, ऑटोमेटेड डायलर और पेशेवर क्यूबिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग कर विदेशी नागरिकों को बड़े पैमाने पर कॉलिंग की सुविधा तैयार कर रखी थी. इस सुव्यवस्थित व्यवस्था के जरिए अमेरिकी नागरिकों को डराकर और झूठे दावे कर पैसे ऐंठे जा रहे थे.
- **अवैध मुद्रा रूपांतरण:** इस रैकेट में अमेरिकी डॉलर में ऐंठी गई रकम को भारतीय रुपये में बदलने के लिए चंडीगढ़ स्थित मास्टरमाइंड और हवाला ऑपरेटरों के समानांतर नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा था. अवैध वित्तीय लाभ को खपाने के लिए ही मनी लॉन्ड्रिंग के तहत यह जांच शुरू हुई.
- **अगला कदम:** एजेंसी अब जब्त किए गए 66 फोन, 13 लैपटॉप और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कर रही है ताकि कॉलिंग स्क्रिप्ट, अंतरराष्ट्रीय सर्वर लिंक और वित्तीय लाभार्थियों की पूरी सूची सामने लाई जा सके.

## सवाल-जवाब

### 1. प्रवर्तन निदेशालय ने किन शहरों में यह छापेमारी की?
प्रवर्तन निदेशालय की हैदराबाद जोनल टीम ने पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में कुल 4 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया.

### 2. छापेमारी के दौरान कितने कॉल सेंटर सक्रिय मिले?
तलाशी के वक्त पटियाला में 2 और पुणे में 1 यानी कुल 3 फर्जी कॉल सेंटर पूरी तरह चालू हालत में पाए गए.

### 3. इन कॉल सेंटरों में कितने लोग काम करते मिले?
इन केंद्रों में लगभग 220 कर्मचारी काम करते हुए पाए गए, जिनकी भूमिका और रिपोर्टिंग पदानुक्रम की अब जांच की जा रही है.

### 4. कॉल सेंटरों के जरिए किन लोगों को निशाना बनाया जाता था?
इन केंद्रों से मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को फोन करके झूठे बहानों के तहत पैसे ऐंठने और ठगी का काम किया जाता था.

### 5. तलाशी अभियान में क्या-क्या सामान और उपकरण जब्त किए गए?
तलाशी के दौरान 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, संचार उपकरण, नकदी और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं.

### 6. चंडीगढ़ के आवासीय परिसर से किस बात का खुलासा हुआ?
चंडीगढ़ स्थित परिसर से पटियाला केंद्रों को नियंत्रित करने वाले मास्टरमाइंड का डेटा और डॉलर को रुपये में बदलने वाले व्यक्ति का पता चला.

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._