उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में लगातार बारिश से धान की खेतों पर संकट, प्रोफेसर अनुपम ने बताए जलभराव से बचाव के उपाय गोरखपुर में भारी बारिश के कारण धान के खेतों में अतिरिक्त पानी भर गया है, जिससे फसल खराब होने की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर अनुपम ने जल निकासी और गोबर-गुड़ से बनी जैविक खाद के इस्तेमाल की सलाह दी है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में लगातार हो रही तेज बारिश ने आम जनजीवन के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में कृषि व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। शहर में जहां जलजमाव और सड़कों पर आवाजाही की गंभीर स्थिति बनी हुई है, वहीं देहाती क्षेत्रों के किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। जिन किसानों ने हाल ही में धान की रोपाई का काम पूरा किया था, उनके खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा हो चुका है। फसल को सड़ने और नष्ट होने से बचाने के उद्देश्य से किसान अब अपने स्तर पर खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी करने के प्रयासों में लगे हुए हैं। धान की फसल पर अत्यधिक जलजमाव के दुष्परिणाम धान की खेती के शुरुआती चरण में पानी की उपस्थिति आवश्यक मानी जाती है, लेकिन खेतों में जरूरत से ज्यादा जलभराव फसल के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। लगातार पानी जमा रहने की स्थिति में पौधों की जड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है, जिससे उनकी जड़ें कमजोर होने लगती हैं और पौधों का विकास रुक जाता है। इसके अतिरिक्त, खेतों में लंबे समय तक ठहरे हुए पानी के कारण फसल में तरह-तरह के रोग और फंगल संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसी जोखिम को देखते हुए गोरखपुर के अनेक गांवों में किसान खुद नालियां तैयार करके खेतों में जमा फालतू पानी को बाहर बहा रहे हैं। लगातार बारिश से कीटनाशक छिड़काव में पैदा हो रही रुकावटें मौसम की इस मार के कारण किसान अपनी धान की फसल में आवश्यक दवाओं और कीटनाशकों का छिड़काव भी नहीं कर पा रहे हैं। लगातार होती बारिश और खेतों में बनी अत्यधिक नमी के कारण रासायनिक दवाओं का प्रभाव बेअसर हो जाता है। अगर बारिश के बीच दवा डाली भी जाए तो वह पानी के साथ बह जाती है, जिससे कीड़ों और कीट जनित बीमारियों से फसल की सुरक्षा करना बेहद कठिन हो गया है। मौसम के साफ होने का इंतजार कर रहे किसानों की चिंता हर बीतते दिन के साथ गहराती जा रही है, क्योंकि समय पर उपचार न मिलने से कीटों का हमला बढ़ने का डर है। प्रोफेसर अनुपम की सलाह: प्राकृतिक खाद से मिलेगी फसल को सुरक्षा कृषि संकट की इस स्थिति में गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के प्रोफेसर अनुपम ने किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि यदि किसान फसल चक्र की शुरुआत से ही गोबर और गुड़ के मिश्रण से तैयार की गई प्राकृतिक खाद का प्रयोग करें, तो मिट्टी की गुणवत्ता में काफी सुधार आता है। प्राकृतिक खाद के उपयोग से खेत की प्राकृतिक उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है और पौधे अधिक मजबूत तथा सहनशील बनते हैं। इसके उपयोग से फसलों की सुरक्षा के लिए रासायनिक दवाओं पर किसानों की निर्भरता भी काफी हद तक घट जाती है। मिट्टी की मजबूती और बेहतर पैदावार का आधार प्रोफेसर अनुपम के अनुसार, गोबर और गुड़ से बनी जैविक खाद मिट्टी में पहले से मौजूद लाभदायक सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करने का कार्य करती है। जब ये सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं, तो पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता में स्वतः ही वृद्धि होती है। इस प्रकार की प्राकृतिक पद्धतियों से तैयार किए गए खेतों में नमी और पानी का संतुलन अन्य रासायनिक खेतों की तुलना में अधिक बेहतर बना रहता है। इससे प्रतिकूल मौसम के बावजूद फसल का उत्पादन सुधरता है। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यदि किसान समय रहते खेतों से जल निकासी की व्यवस्था करें और प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाएं, तो बारिश से होने वाले संभावित नुकसान को बहुत सीमा तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसका आप पर असर भारत में: भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के दौरान समय रहते जल निकासी और प्राकृतिक खेती की तकनीकें अपनाकर किसान अपनी पैदावार सुरक्षित रख सकते हैं। उत्तर प्रदेश (गोरखपुर) में: जलजमाव की समस्या झेल रहे स्थानीय किसान खेतों से नालियां बनाकर पानी निकालें और गोबर-गुड़ आधारित खाद का प्रयोग कर फसल को सड़ने से बचाएं। सवाल-जवाब 1. गोरखपुर में भारी बारिश से धान की फसल पर क्या बुरा असर पड़ रहा है? खेतों में अत्यधिक पानी जमा होने से पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है, जिससे जड़ें कमजोर हो रही हैं और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। 2. लगातार बारिश के दौरान किसान फसलों पर दवा का छिड़काव क्यों नहीं कर पा रहे हैं? अत्यधिक नमी और लगातार बारिश के कारण छिड़की गई दवाएं बह जाती हैं, जिससे कीटनाशकों का असर खत्म हो जाता है। 3. प्रोफेसर अनुपम ने फसल को नुकसान से बचाने के लिए क्या उपाय सुझाया है? उन्होंने समय पर खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने और शुरुआत से ही गोबर तथा गुड़ से बनी प्राकृतिक खाद का उपयोग करने की सलाह दी है। 4. गोबर और गुड़ से तैयार प्राकृतिक खाद से मिट्टी और फसल को क्या लाभ होता है? यह खाद मिट्टी में सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करती है, पौधों की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करती है। https://trendkia.com/national/uttar-pradesh-ke-gorakhpur-men-lagatara-barisha-se-dhana-ki-kheton-para-snkata-professor-anupam-ne-batae-jalabharava-se-bachava-ke-12025 TrendKia — Har trend, sabse pehle.