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  "type": "article",
  "title": "उत्तर प्रदेश में जलमार्गों के लिए बनी नई नीति, मंत्रिमंडल ने अंतर्देशीय जलयान नियमावली 2026 को दी स्वीकृति",
  "summary": "उत्तर प्रदेश सरकार ने नदियों और जल निकायों पर नावों और जहाजों के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए अंतर्देशीय जलयान नियमावली 2026 को मंजूरी दी है। इस कदम से नाविकों का पंजीकरण होगा और दुर्घटना बीमा की सुविधा मिलेगी।",
  "content": "उत्तर प्रदेश में नदियों और प्रमुख जल निकायों के माध्यम से होने वाले परिवहन को अधिक सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार ने कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद 'उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली 2026' को मंत्रिमंडल द्वारा औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी गई है। राज्य के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने इस प्रशासनिक निर्णय की विस्तृत जानकारी मीडिया से साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश के जलक्षेत्र में अब तक नावों, स्टीमरों और बड़े जहाजों के निर्बाध संचालन के लिए कोई कानूनी ढांचा या निश्चित नियमावली अस्तित्व में नहीं थी, जिसके कारण सुरक्षा प्रबंधन में कई व्यावहारिक कठिनाइयां आती थीं।\n\nजलयानों का दो मुख्य श्रेणियों में विभाजन\nमंत्रिमंडल से अंतर्देशीय जलयान नियमावली को स्वीकृति मिलने के बाद अब प्रदेश के सभी जलमार्गों पर दोहरी व्यवस्था लागू की जाएगी। इस नई नीति के तहत जलक्षेत्र में तैरने वाले सभी साधनों को दो स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी यांत्रिक (Mechanical) जलयानों की होगी, जिसके अंतर्गत डीजल या अन्य इंजनों से चलने वाले स्टीमर, बड़ी मोटर बोट और भारी मालवाहक जहाजों को रखा गया है। वहीं दूसरी श्रेणी गैर-यांत्रिक (Non-mechanical) जलयानों की बनाई गई है। इस दूसरी श्रेणी में चप्पू या पतवार के सहारे नाविकों द्वारा पारंपरिक रूप से चलाई जाने वाली साधारण नावों को सम्मिलित किया गया है।\n\n \n\nपंजीकरण प्रणाली और 50 रुपये का शुल्क\nप्रेस वार्ता के दौरान परिवहन राज्य मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में केवल बड़े जहाजों के संबंध में ही कुछ बुनियादी विवरण उपलब्ध थे, जबकि गैर-यांत्रिक श्रेणी की नावों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था। डेटा के इस अभाव को दूर करने के लिए अब गैर-यांत्रिक नावों का अनिवार्य पंजीकरण किया जाएगा। स्थानीय नाविकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, उनके लिए रजिस्ट्रेशन फीस मात्र 50 रुपये तय की गई है। इस प्रतीकात्मक फीस के माध्यम से राज्य भर की नावों और उनके संचालकों का एक सटीक और व्यवस्थित डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा।\n\nयांत्रिक जलयानों के लिए तीन अलग श्रेणियां\nइंजन संचालित जहाजों और बड़े स्टीमरों के सुचारू विनियमन हेतु यांत्रिक श्रेणी को तीन अलग-अलग उप-वर्गों में विभाजित किया गया है। पहला वर्ग 0 से 3 टन तक की क्षमता वाले छोटे यांत्रिक जलयानों का होगा। दूसरा वर्ग 5 से 10 यात्रियों को ले जाने तथा 0.5 टन तक माल ढोने वाले मध्यम जहाजों के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं तीसरा वर्ग 10 से अधिक यात्रियों की क्षमता अथवा 5 टन से अधिक भार ढोने वाले बड़े जहाजों और स्टीमरों का होगा। इन तीनों श्रेणियों की माल वहन और यात्री क्षमता के अनुसार ही अलग-अलग पंजीकरण शुल्क राशि तय की जाएगी।\n\nबीमा सुरक्षा और प्रशासनिक जिम्मेदारी\nइस नई नियमावली का एक अन्य प्रमुख उद्देश्य नाविकों और यात्रियों दोनों को कानूनी सुरक्षा का दायरा प्रदान करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी जिले में तो स्थानीय नाविकों की सूची पहले से तैयार थी, लेकिन मथुरा जैसे अन्य जनपदों में ऐसा कोई डेटा उपलब्ध नहीं हो सका था। नए प्रावधानों के तहत असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी नाविकों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की जाएगी। योजना के सुचारू कार्यान्वयन की जिम्मेदारी जिला स्तर पर सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ-प्रशासन) और तहसील स्तर पर राजस्व निरीक्षक (आरआई) को सौंपी गई है। शासन की आधिकारिक अधिसूचना के तहत यह कदम सुरक्षा मानकों को मजबूत करेगा।\n\nइसका आप पर असर\nइस फैसले से उत्तर प्रदेश में जल परिवहन अधिक सुरक्षित और उत्तरदायी बनेगा, जिससे पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों दोनों को लाभ होगा।\n\n• भारत में: देश भर से उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों को नदियों में सुरक्षित नौकायन की सुविधा मिलेगी। दुर्घटनाओं की स्थिति में बीमा कवरेज मिलने से यात्रियों का विश्वास बढ़ेगा।\n• उत्तर प्रदेश में: राज्य के पारंपरिक नाविक मात्र 50 रुपये में पंजीकरण कराकर औपचारिक डेटाबेस का हिस्सा बन सकेंगे। इसके अलावा दुर्घटना बीमा और सुरक्षा व्यवस्था मिलने से उनकी आजीविका अधिक सुरक्षित होगी।\n• यात्रियों के लिए नियम: स्टीमर और बड़ी नावों की क्षमता तय होने से ओवरलोडिंग पर रोक लगेगी। क्षमता और वजन मानकों का पालन होने से जल हादसों में कमी आएगी।\n• प्रशासनिक स्तर पर: जिला और तहसील स्तर पर एआरटीओ और राजस्व निरीक्षकों को निगरानी का अधिकार मिलने से नियमों का पालन सुनिश्चित होगा। इससे अवैध नौका संचालन पर प्रभावी रूप से लगाम लगेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nउत्तर प्रदेश के विभिन्न जलमार्गों पर नावों और जहाजों के संचालन के लिए पहले कोई व्यापक कानूनी ढांचा उपलब्ध नहीं था। नियमित डेटाबेस की कमी और हादसों के जोखिम को देखते हुए मंत्रिमंडल ने इस नियमावली को पारित किया।\n\n• कानूनी ढांचे की कमी: राज्य में अब तक पानी के जहाजों और नावों के नियमन के लिए कोई स्पष्ट नियमावली मौजूद नहीं थी। बिना नियमों के संचालन से सुरक्षा संबंधी चुनौतियां खड़ी हो रही थीं।\n• नाविकों के डेटा का अभाव: वाराणसी को छोड़कर मथुरा जैसे कई जनपदों में गैर-यांत्रिक नावों और नाविकों की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। एक आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करना राज्य सरकार की प्राथमिकता थी।\n• सुरक्षा और दुर्घटना नियंत्रण: ओवरलोडिंग और बिना मानक वाले स्टीमर के संचालन से नदियों में हादसों की आशंका बनी रहती थी। जहाजों को क्षमता के आधार पर वर्गीकृत करना अनिवार्य हो गया था।\n• सामाजिक सुरक्षा की जरूरत: असंगठित क्षेत्र के नाविकों और नदी में सफर करने वाले यात्रियों के लिए कोई बीमा सुरक्षा योजना लागू नहीं थी। आपदा की स्थिति में वित्तीय सहायता देने के लिए यह नीति लाई गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय जलयान नियमावली 2026 क्या है?\nयह उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर की गई एक नई नियमावली है, जो राज्य के जलमार्गों पर चलने वाली नावों और जहाजों का पंजीकरण, वर्गीकरण और सुरक्षा नियम तय करती है।\n\n2. पारंपरिक नावों के पंजीकरण का शुल्क कितना रखा गया है?\nगैर-यांत्रिक यानी हाथ से चलाई जाने वाली पारंपरिक नावों के पंजीकरण के लिए मात्र 50 रुपये का शुल्क तय किया गया है।\n\n3. यांत्रिक जलयानों को किन श्रेणियों में बांटा गया है?\nइन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है: 0 से 3 टन भार, 5 से 10 यात्री और 0.5 टन भार, तथा 10 से अधिक यात्री या 5 टन से ज्यादा भार क्षमता वाले जहाज।\n\n4. इस नियमावली को लागू करने की जिम्मेदारी किन अधिकारियों को दी गई है?\nजिला स्तर पर सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ-प्रशासन) और तहसील स्तर पर राजस्व निरीक्षक (आरआई) को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।\n\n5. क्या नियमावली में नाविकों और यात्रियों के लिए बीमा का प्रावधान है?\nहां, इसमें असंगठित क्षेत्र के नाविकों और यात्रियों के लिए दुर्घटना बीमा और सुरक्षा सुविधाएं देने का प्रस्ताव शामिल है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-27",
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    "जलयान नियमावली 2026",
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