उत्तर भारत में नया मौसमी चक्र सक्रिय, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में आंधी के साथ बौछारों के आसार हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय मौसमी विक्षोभ और कई चक्रवाती परिसंचरणों के चलते उत्तर से लेकर पूर्वी भारत तक आंधी, बिजली चमकने और बारिश का नया दौर शुरू होने जा रहा है। पहाड़ी घाटियों से लेकर मैदानी इलाकों तक वातावरण में तेजी से हलचल बढ़ रही है, क्योंकि अलग-अलग हिस्सों में बने मौसमी सिस्टम एक साथ जोर पकड़ने लगे हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर पहुंचे नए पश्चिमी विक्षोभ ने पूरे उत्तर भारत की आबोहवा पर असर डालना शुरू कर दिया है। इसके चलते पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इलाकों में धूल भरी आंधी और फुहारें पड़ने के आसार बन गए हैं। वहीं दूसरी तरफ, पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली बादलों की रेखा बिहार, बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के राज्यों तक अपना असर दिखा रही है। कई सूबों में तेज झोंके 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकते हैं, जिससे सामान्य जनजीवन पर असर पड़ने की संभावना है। सप्ताह भर बदलता रहेगा मिजाज अगले 7 दिनों के दौरान देश के व्यापक भूभाग पर गरज, बिजली और तेज झोंके वाली हवाओं का दौर चलने का अनुमान है। केवल उत्तर-पश्चिम भारत ही नहीं, बल्कि मध्य राज्यों, पूर्वोत्तर, पूर्वी हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीप के कई इलाकों में भी फुहारें दर्ज की जा सकती हैं। बादलों के इस नए रुख से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे कई राज्य सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। तापमान में उतार-चढ़ाव के साथ ही आसमान में घने बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। वायुमंडल की परतों में सक्रिय प्रणालियां मध्य और ऊपरी वायुमंडल में पछुआ हवाओं के बीच यह मौसमी विक्षोभ एक ट्रफ के आकार में मौजूद है। इसकी मुख्य धुरी समुद्र तल से लगभग 5.8 किलोमीटर ऊपर, 32 डिग्री उत्तरी अक्षांश के ऊपरी भाग में 74 डिग्री पूर्वी देशांतर के इर्द-गिर्द टिकी है। इसके अतिरिक्त उत्तराखंड और उससे लगे हिमाचल प्रदेश के इलाकों पर चक्रवाती परिसंचरण की स्थिति देखी जा रही है। दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश और समीपवर्ती छत्तीसगढ़ के साथ-साथ दक्षिणी झारखंड के वायुमंडल में भी चक्रवाती हवाओं के घेरे सक्रिय हैं। इसी तरह मन्नार की खाड़ी से शुरू होकर उत्तरी आंतरिक कर्नाटक से गुजरते हुए मध्य महाराष्ट्र तक एक दबाव रेखा खिंची हुई है। दूसरी ट्रफ रेखा दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होकर उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तक फैली है। इन दोनों प्रणालियों के सम्मिलित असर से कई राज्यों में मेघगर्जन और वर्षा की गतिविधियों में भारी उछाल आने का अनुमान लगाया गया है। पहाड़ी इलाकों में आंधी और वर्षा का दौर जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद के क्षेत्रों में 8 अक्टूबर को अनेक स्थानों पर पानी बरसने की संभावना बनी हुई है। इन पर्वतीय हिस्सों में 10 अक्टूबर को भी व्यापक स्तर पर बौछारें पड़ने की उम्मीद है, जबकि 9 और 11 अक्टूबर के दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस अवधि में आंधी की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की जा सकती है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचे और निचले दोनों भागों में मौसम के तेवर तल्ख रह सकते हैं, जहां तेज हवाओं के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त किया गया है। स्थानीय प्रशासन ने निवासियों और यात्रियों को अनावश्यक आवाजाही से बचने तथा सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उधर उत्तराखंड में 8 से 13 अक्टूबर के बीच लगातार कई जगहों पर पानी बरसने का अनुमान है। राज्य में 9 अक्टूबर तक बादलों की गड़गड़ाहट और आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी प्रभावी रहेगी, जहां सामान्य रूप से 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी और झोंकों में यह रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इसका आप पर असर आने वाले दिनों में आंधी और बारिश के कारण दैनिक यात्रा, फसल कटाई और खुले में होने वाले कामकाज प्रभावित हो सकते हैं। • भारत में: उत्तर से लेकर पूर्व और दक्षिण भारत तक तेज हवाओं और बिजली गिरने से हवाई व रेल यातायात में हल्की देरी हो सकती है। खुले में रहने वाले लोग और किसान अपनी कटी हुई फसलों को भीगने से बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों पर भंडारण का प्रबंध करें। • उत्तराखंड और हिमाचल में: पहाड़ी ढलानों और सड़कों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के चलते पेड़ गिरने या भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय नागरिक तथा पर्यटक 8 से 13 अक्टूबर के दौरान अनावश्यक पर्वतीय यात्राएं टालें और सुरक्षित आश्रयों में रहें। • दिल्ली और उत्तर प्रदेश में: अचानक चलने वाली आंधी और फुहारों से शाम के समय सड़कों पर दृश्यता घट सकती है और यातायात धीमा हो सकता है। दोपहिया वाहन चालक और राहगीर कमजोर ढांचों या होर्डिंग्स के नीचे खड़े होने से बचें। • बिहार और बंगाल में: ट्रफ लाइन की सक्रियता के कारण गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम रहेगा। खेतों में काम करने वाले मजदूर और किसान बादलों की तेज गड़गड़ाहट के समय खुले मैदानों से हटकर पक्के मकानों की शरण लें। ऐसा क्यों हुआ यह मौसमी बदलाव एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और देश के अलग-अलग हिस्सों में एक साथ बने कई चक्रवाती परिसंचरणों के मिलन का परिणाम है। • पश्चिमी विक्षोभ की धुरी: समुद्र तल से लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर पछुआ हवाओं के साथ आए विक्षोभ ने मध्य क्षोभमंडल में कम दबाव की स्थिति बनाई है। इससे हिमालय की चोटियों पर नमी का भारी जमावड़ा हुआ, जो मैदानी इलाकों की तरफ फैल रहा है। • दोहरी ट्रफ प्रणालियों का दबाव: एक ट्रफ मन्नार की खाड़ी से मध्य महाराष्ट्र तक और दूसरी दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक खिंची हुई है। इन दोनों धाराओं ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींचकर मध्य व पूर्वी भारत में बादलों का घना दायरा बना दिया है। • क्षेत्रीय चक्रवाती घेरे: हिमाचल, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के वायुमंडल में बने चक्रवाती परिसंचरणों ने हवा के दबाव में भारी असंतुलन पैदा किया है। इन प्रणालियों के आपस में टकराने के कारण तेज आंधी, बिजली और लगातार बारिश का माहौल तैयार हुआ है। सवाल-जवाब 1. 8 अक्टूबर को उत्तर भारत के किन इलाकों में आंधी और बारिश के आसार हैं? जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। 2. इस मौसमी बदलाव के दौरान हवाओं की रफ्तार कितनी रह सकती है? कई प्रभावित राज्यों में झोंके 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक पहुंच सकते हैं। 3. उत्तराखंड में मौसम की यह गतिविधि कब तक बनी रहेगी? उत्तराखंड में 8 से 13 अक्टूबर तक कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान है, जिसमें 9 अक्टूबर तक आंधी और बिजली की चेतावनी शामिल है। 4. पूर्वी भारत के कौन-कौन से राज्य इस प्रणाली से प्रभावित हो रहे हैं? पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों में ट्रफ लाइन और चक्रवाती परिसंचरण के कारण मौसम बदल रहा है। https://trendkia.com/national/uttara-bharata-men-naya-mausami-chakra-sakriya-delhi-aura-bihar-sameta-kai-rajyon-men-andhi-ke-satha-bauchharon-ke-asara-44575 TrendKia — Har trend, sabse pehle.