उत्तर भारत से लेकर तटीय इलाकों तक बिगड़ेगा मौसम, भारी बारिश और तेज आंधी की चेतावनी मौसम विभाग ने 24 सितंबर को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पहाड़ी राज्यों समेत कई इलाकों में मूसलाधार बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। देश के कई राज्यों में 24 सितंबर को मौसम का मिजाज तेजी से बदलने जा रहा है। मौसम विभाग ने उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर पूर्व और तटीय क्षेत्रों तक भारी वर्षा, तेज अंधड़ और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। दिल्ली और एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में मौसमी गतिविधियों में तीव्रता देखी जा सकती है। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में हवा का बहाव 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर तक पहुंच सकता है। इस प्रतिकूल मौसमी चक्र को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक एहतियात बरतने का सुझाव दिया गया है। पूर्वी भारत के विशाल भूभाग में बादलों की तेज गर्जना और वज्रपात की गंभीर आशंका बनी हुई है। राजधानी और उत्तर प्रदेश में तूफानी हवाओं का पहरा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 सितंबर से 26 सितंबर तक वर्षा और झोंकेदार हवाओं का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। आज के दिन दिल्ली में हवा की गति लगभग 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास दर्ज की जा सकती है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी बादलों के बरसने के साथ तेज आंधी चलने की संभावना है। राज्य के लखनऊ, प्रयागराज, आजमगढ़, सुल्तानपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, बलिया, रायबरेली और सोनभद्र जिलों में मौसमी परिस्थितियां काफी खराब रह सकती हैं। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर तेज हवाओं की गति 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है। बिहार और झारखंड में वर्षा की तीव्रता बिहार के कई प्रमुख जिलों में व्यापक स्तर पर वर्षा दर्ज होने का अनुमान है। राजधानी पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, सुपौल और अररिया में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पड़ोसी राज्य झारखंड में भी मौसमी उथल-पुथल की आशंका जताई गई है। रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग और गिरिडीह जैसे औद्योगिक व आवासीय इलाकों में बारिश के साथ तेज गति से चलने वाली हवाओं के चलते लोगों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और तटीय क्षेत्रों में अलर्ट पहाड़ी राज्यों में मौसम की मार सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश के कारण संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का जोखिम बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और सोलन में तेज वर्षा और तूफानी हवाओं को लेकर विशेष चेतावनी जारी की गई है। इसके अतिरिक्त जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में गर्जना के साथ बारिश होने का पूर्वानुमान है। दक्षिण और मध्य भारत की बात करें तो आंध्र प्रदेश, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ विकराल हवाएं चल सकती हैं। आंध्र प्रदेश और ओडिशा के समुद्र तटीय भागों में हवाओं की रफ्तार 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरों और खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को गहरे पानी में न जाने तथा सतर्क रहने की सलाह दी गई है। इसका आप पर असर इस मौसमी चेतावनी के चलते दैनिक आवागमन, सुरक्षा और तटीय गतिविधियों पर सीधा असर पड़ सकता है। • दैनिक यात्रियों पर असर: तेज आंधी और भारी वर्षा के चलते सड़क व हवाई यातायात में रुकावटें आ सकती हैं। यात्रा शुरू करने से पहले स्थानीय मौसम अपडेट और ट्रैफिक परामर्श अवश्य जांच लें। • पहाड़ी मार्गों पर जोखिम: उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे के कारण सड़कें बाधित हो सकती हैं। पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को जोखिम भरे ढलानों से दूर रहने की आवश्यकता है। • तटीय और समुद्री सुरक्षा: 70 से 75 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के चलते समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं। मछुआरों को समुद्र में न जाने और तटीय आबादी को सुरक्षित ठिकानों पर रहने की सलाह दी गई है। • आकाशीय बिजली से बचाव: पूर्वी भारत और मैदानी भागों में वज्रपात की संभावना अधिक है। खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों या लोहे के खंभों के नीचे शरण लेने से बचें। ऐसा क्यों हुआ देश के कई हिस्सों में एक साथ मौसम बिगड़ने के पीछे व्यापक मानसूनी व वायुमंडलीय दबाव प्रणाली का सक्रिय होना है। • वायुमंडलीय दबाव और हवाएं: मैदानी और तटीय इलाकों में नम हवाओं और निम्न दबाव की वजह से 70 से 75 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। यह स्थिति बादलों के तेजी से संघनन और भारी वर्षा को बढ़ावा दे रही है। • पहाड़ी भूभाग में वर्षा का प्रभाव: लगातार हो रही बारिश से मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है, जिससे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ढलानों पर भूस्खलन की परिस्थितियां बन रही हैं। इस कारण पर्वतीय क्षेत्रों में चेतावनी स्तर बढ़ाया गया है। • तटीय प्रणालियों का असर: बंगाल की खाड़ी के निकटवर्ती राज्यों आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तेज हवाओं और भारी वर्षा का मुख्य कारण समुद्र तटीय मौसमी हलचल है। इससे समुद्र में प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा हो रही हैं। सवाल-जवाब 1. दिल्ली में मौसम कब से कब तक खराब रहने का अनुमान है? दिल्ली में 24 सितंबर से 26 सितंबर के दौरान बारिश और 25 से 30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। 2. उत्तर प्रदेश के किन जिलों में आंधी-पानी का अलर्ट जारी किया गया है? लखनऊ, प्रयागराज, आजमगढ़, सुल्तानपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, बलिया, रायबरेली और सोनभद्र में मौसम खराब रहने और 60 से 65 किमी प्रति घंटे की हवाएं चलने की संभावना है। 3. बिहार और झारखंड के कौन से इलाके बारिश से प्रभावित होंगे? बिहार में पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, सुपौल और अररिया तथा झारखंड में रांची, जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग और गिरिडीह में बारिश का अलर्ट है। 4. तटीय क्षेत्रों में हवा की गति कितनी रहने की संभावना है? आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में तेज हवाओं की रफ्तार 70 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 5. पहाड़ी राज्यों में मौसम विभाग ने क्या चेतावनी दी है? उत्तराखंड में भारी बारिश के चलते भूस्खलन का खतरा जताया गया है, जबकि हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और सोलन में तेज वर्षा और आंधी का अलर्ट है। https://trendkia.com/national/uttara-bharata-se-lekara-tatiya-ilakon-taka-bigarega-mausama-bhari-barisha-aura-teja-andhi-ki-chetavani-37530 TrendKia — Har trend, sabse pehle.