उत्तर से दक्षिण तक बिगड़ेगा मौसम, आंधी और ओलावृष्टि के बीच भारी बारिश की चेतावनी जारी सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और कई चक्रवाती परिसंचरण के कारण दिल्ली, यूपी, राजस्थान समेत दक्षिण के प्रायद्वीपीय राज्यों में तेज हवाओं संग भारी बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया गया है। देशभर में वायुमंडलीय परिस्थितियों में अचानक आए बदलाव के चलते कई क्षेत्रों में मौसम का स्वरूप पूरी तरह पलटने जा रहा है। मौसम विज्ञान से जुड़ी प्रणाली में एक साथ कई चक्रवाती परिसंचरण और पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर के मैदानी इलाकों से लेकर सुदूर दक्षिणी प्रायद्वीप तक बादलों का डेरा रहेगा। 22 अक्टूबर तक दक्षिणी हिस्से के अनेक राज्यों में लगातार वर्षा की स्थिति बनी रहने के संकेत हैं। केरल, तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु एवं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक के विस्तृत इलाकों में व्यापक बौछारें दर्ज की जा सकती हैं। कुछ संवेदनशील भूभागों में अत्यंत तीव्र वर्षा होने की आशंका को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। साथ ही आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और लक्षद्वीप समूह के तमाम क्षेत्रों में भी अलग-अलग समय पर पानी बरसने की संभावना व्यक्त की गई है। उत्तरी भाग में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न अंचलों में बादलों की तेज गर्जना, आकाशीय बिजली चमकने, आंधी चलने तथा कुछ सीमित स्थानों पर ओले गिरने की परिस्थिति बन रही है। वायुमंडलीय विश्लेषण के अनुसार उत्तरी पंजाब और इसके करीबी इलाके पर एक पश्चिमी विक्षोभ अपनी सक्रियता बनाए हुए है। इसके अतिरिक्त दक्षिणी हरियाणा और उत्तर राजस्थान के सीमावर्ती इलाके, दक्षिणी राजस्थान व उत्तरी गुजरात की सीमा तथा उत्तरी हरियाणा के आसपास अलग-अलग चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय बने हुए हैं। प्रायद्वीपीय छोर पर तमिलनाडु और दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर भी ऐसा ही एक वायुमंडलीय चक्र बना हुआ है। वहीं दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश से बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी छोर तक फैली एक निम्न दबाव की द्रोणिका स्थिति को और अनुकूल बना रही है। इन सम्मिलित मौसमी दबावों की वजह से दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में आगामी कई दिनों तक मौसमी गतिविधियां बनी रहेंगी। उत्तर-पश्चिम के मैदानी राज्यों में ओलावृष्टि और तेज हवाएं सप्ताहांत के दौरान उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों में वातावरण तेजी से परिवर्तित होने के आसार हैं। वायुमंडलीय दबाव में उतार-चढ़ाव के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिमी राजस्थान के चुनिंदा हिस्सों में रुक-रुक कर बौछारें पड़ने की उम्मीद है। पूर्वी राजस्थान में 17 अक्टूबर को छिटपुट तौर पर जलवृष्टि देखने को मिल सकती है। पहाड़ी ढलानों वाले उत्तराखंड में मेघगर्जन के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और इसके तीव्र झोंकों के 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाने का अनुमान लगाया गया है। मैदानी पट्टी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में गरज के साथ तूफानी हवाओं और ओलावृष्टि की गंभीर आशंका बनी हुई है। इसी अवधि में पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में धूल भरी हवाओं का प्रवाह 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे रह सकता है, जिसके झोंके 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति छू सकते हैं। खुले स्थानों, कच्चे निर्माणों और खेतों में खड़ी फसलों को इस तेज वायु वेग से नुकसान पहुंचने की संभावना बनी रहती है। प्रायद्वीपीय भारत में भारी से अत्यंत भारी बारिश का दौर प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में 17 से 22 अक्टूबर के मध्य तटीय कर्नाटक, केरल, माहे, लक्षद्वीप, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में बहुतायत स्थानों पर मेघ बरसने के प्रबल संकेत हैं। उत्तरी आंतरिक कर्नाटक के भूभाग में 19 अक्टूबर को भी वर्षा की गतिविधियां दर्ज होने की संभावना है। तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, रायलसीमा और तेलंगाना के जिलों में 22 अक्टूबर तक कहीं हल्की तो कहीं मध्यम दर्जे की बौछारें निरंतर देखने को मिल सकती हैं। केरल और माहे के अलग-अलग क्षेत्रों में 22 अक्टूबर तक मूसलाधार बारिश का क्रम जारी रह सकता है। तटीय कर्नाटक के हिस्सों में 17 से 19 अक्टूबर, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 18 से 22 अक्टूबर तथा लक्षद्वीप के द्वीपीय इलाकों में 20 से 22 अक्टूबर के दौरान अत्यधिक वर्षा की चेतावनी दी गई है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 21 और 22 अक्टूबर को भारी जलभराव वाली बारिश हो सकती है। इससे पूर्व इन्हीं इलाकों में 17 से 20 अक्टूबर के बीच अत्यंत तीव्र बौछारों का दौर चलने का अनुमान है। तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 17 अक्टूबर को अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट है, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा में 18 अक्टूबर तक जोरदार बारिश होने की प्रबल संभावना है। बिजली गिरने की चेतावनी और पहाड़ी क्षेत्रों का हाल दक्षिणी राज्यों में आकाशीय गर्जना के साथ आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की गंभीर चेतावनी साझा की गई है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के अंचलों में 22 अक्टूबर तक बिजली गिरने की घटनाओं के प्रति सचेत रहने को कहा गया है। यहां हवा की सामान्य गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की बात कही गई है। तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 17 और 18 अक्टूबर को तूफानी हवाएं चलने और सतही वायु प्रवाह तेज रहने का अनुमान है। तेलंगाना में 20 अक्टूबर को तथा कर्नाटक के उत्तरी व दक्षिणी भीतरी इलाकों में 18 अक्टूबर को तेज हवाएं असर दिखाएंगी। सुदूर उत्तर में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान और मुजफ्फराबाद के पर्वतीय भूभागों में 18 अक्टूबर के साथ-साथ 21 और 22 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर वर्षा होने के आसार हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में 17 से 18 अक्टूबर के दौरान छिटपुट वर्षा दर्ज की जा सकती है। खराब मौसम के इस पूरे चक्र के दौरान आम नागरिकों को सतर्कता बरतने तथा समय-समय पर जारी होने वाले दिशा-निर्देशों का अनुपालन करने की सलाह दी गई है। इसका आप पर असर इस मौसमी बदलाव से उत्तर और दक्षिण भारत के दैनिक जनजीवन, फसलों और यातायात पर सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना है। • किसानों के लिए चेतावनी: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में ओलावृष्टि व तेज आंधी से पककर तैयार खरीफ फसलों को नुकसान हो सकता है। किसान कटी हुई फसलों को खुले खलिहानों के बजाय सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें। • शहरी इलाकों में जलभराव: दक्षिण भारत के तटीय शहरों और तमिलनाडु, पुडुचेरी में भारी बारिश से निचले क्षेत्रों में पानी भर सकता है। दैनिक यात्रियों को सुबह व शाम के व्यस्त घंटों में यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय लेकर निकलना होगा। • सड़क व हवाई यातायात: 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की आंधी और दृश्यता घटने से उड़ानों में देरी हो सकती है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहन चालकों को तेज हवाओं और फिसलन भरे मोड़ों पर गति नियंत्रित रखनी चाहिए। • आकाशीय बिजली से सुरक्षा: दक्षिण भारत में 22 अक्टूबर तक बिजली गिरने का गंभीर अलर्ट जारी किया गया है। गरज-चमक के समय ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले मैदानों से दूर रहकर पक्के ढांचों में शरण लें। ऐसा क्यों हुआ यह मौसम बदलाव उत्तर में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण में मौजूद कई चक्रवाती परिसंचरणों के आपसी तालमेल की वजह से हुआ है। वायुमंडल की इन दो विपरीत प्रणालियों ने एक साथ बड़े इलाके में नमी और अस्थिरता को बढ़ा दिया है। • पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव: उत्तरी पंजाब और उसके आसपास एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मौजूद है। यह पर्वतीय और मैदानी राज्यों में बादलों का निर्माण कर गरज और ओलावृष्टि को जन्म दे रहा है। • कई चक्रवाती परिसंचरण: दक्षिणी हरियाणा, राजस्थान, उत्तरी गुजरात और प्रायद्वीपीय छोर पर तमिलनाडु के पास चक्रवाती घेरे बने हुए हैं। ये घेरे अलग-अलग दिशाओं से नम हवाओं को ऊपर खींच रहे हैं। • बंगाल की खाड़ी से जुड़ा ट्रफ: दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक एक निम्न दबाव की द्रोणिका बनी हुई है। यह रेखा समुद्र से भारी मात्रा में नमी खींचकर प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश करा रही है। सवाल-जवाब 1. दक्षिण भारत में भारी बारिश कब तक जारी रहने की संभावना है? मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण प्रायद्वीपीय राज्यों में 22 अक्टूबर तक लगातार और भारी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। 2. किन उत्तरी राज्यों में ओलावृष्टि और तेज आंधी की चेतावनी दी गई है? पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ओलावृष्टि की आशंका है, जबकि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में तेज हवाओं व गरज के साथ बारिश का अलर्ट है। 3. उत्तराखंड में हवा की अधिकतम गति कितनी रह सकती है? उत्तराखंड में हवा की सामान्य रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे और झोंकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 4. इस मौसमी उथल-पुथल का मुख्य कारण क्या है? उत्तर पंजाब में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और राजस्थान, हरियाणा व तमिलनाडु के ऊपर बने चक्रवाती परिसंचरण इसके मुख्य कारण हैं। 5. किन क्षेत्रों में आकाशीय बिजली गिरने का जोखिम सबसे अधिक है? तमिलनाडु, पुडुचेरी, कराईकल, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 22 अक्टूबर तक तेज गर्जना के साथ बिजली गिरने की चेतावनी है। https://trendkia.com/national/uttara-se-dakshina-taka-bigarega-mausama-andhi-aura-olavrishti-ke-bicha-bhari-barisha-ki-chetavani-jari-48480 TrendKia — Har trend, sabse pehle.