उत्तराखंड के ऋषिकेश में छिपा 2009 बैच का IRS अफसर गिरफ्तार, रिश्वत मामले में CBI ने पकड़ा बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा हिरासत मंजूर किए जाने के बाद फरार हुए सीजीएसटी के अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती को सीबीआई ने ऋषिकेश से दबोच लिया है। यह मामला एक व्यावसायिक फर्म से जुड़े विवाद को निपटाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की घूस मांगने और 40 लाख रुपये में सौदा तय करने से जुड़ा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो की मुंबई स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कर वसूली के नाम पर घूसखोरी में लिप्त एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने उत्तराखंड के ऋषिकेश में ठिकाना बनाकर छिपे बैठे केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर के अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती को धर दबोचा। वर्ष 2009 बैच का यह भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी अदालत द्वारा हिरासत मंजूर किए जाने के बाद से लगातार फरार चल रहा था। इस पूरे प्रकरण में एक व्यावसायिक फर्म से जुड़े मामले को दबाने के एवज में डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी, जिसे बाद में 40 लाख रुपये पर तय किया गया। मुख्य आरोपी अधिकारी की इस गिरफ्तारी के बाद संबंधित महकमे में व्यापक हड़कंप मच गया है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था मुकदमा इस कानूनी कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब रायगढ़ स्थित सीजीएसटी खांडेश्वर के अधीक्षक और अतिरिक्त आयुक्त के आचरण के खिलाफ सीबीआई को एक औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई। प्रारंभिक तथ्यों की पुष्टि होने पर जांच एजेंसी ने 26 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार का नियमित मामला दर्ज किया। एक फर्म से जुड़े लंबित मामले को रफा-दफा करने के उद्देश्य से अधिकारियों की ओर से भारी-भरकम राशि की अनुचित मांग रखी गई थी। एजेंसी ने शिकायतकर्ता के सहयोग से योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर बिचौलिए को रंगे हाथों पकड़ने की रणनीति तैयार की। रंगे हाथों 40 लाख रुपये बरामदगी के साथ जालसाजी का भंडाफोड़ सीबीआई के दल ने पुख्ता खुफिया इनपुट के आधार पर 27 अगस्त 2026 को एक ट्रैप का आयोजन किया। इस योजनाबद्ध कार्रवाई के दौरान कस्टम्स हाउस एजेंट नरिंदर राजपूत को 40 लाख रुपये की नकद रकम प्राप्त करते समय रंगे हाथों दबोच लिया गया। पूछताछ और मौके पर मिले साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि उक्त घूस की रकम सीजीएसटी अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा तथा अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती के लिए ही वसूली जा रही थी। इसके तुरंत बाद जांच एजेंसी ने त्वरित कदम उठाते हुए अधीक्षक और प्राइवेट एजेंट सहित तीनों आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था। ठाणे की विशेष अदालत से लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट तक की कानूनी जंग गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात सीबीआई ने सभी आरोपियों को ठाणे स्थित विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। जांच एजेंसी ने पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए पांच दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की थी। हालांकि विशेष अदालत ने 28 अगस्त 2026 को पुलिस रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का फैसला सुना दिया। निचली अदालत के इस निर्णय के खिलाफ सीबीआई ने बिना विलंब किए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एक रिवीजन पिटीशन दाखिल की। उच्च न्यायालय ने मामले के तथ्यों और एजेंसी की दलीलों पर विचार करते हुए 16 सितंबर 2026 को निचली अदालत का आदेश पलट दिया। हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों को दो दिन की सीबीआई कस्टडी में भेजने का स्पष्ट निर्देश जारी किया। अदालत के आदेश की अवहेलना और ऋषिकेश से गिरफ्तारी बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए जांच एजेंसी ने अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और बिचौलिए नरिंदर राजपूत को तत्काल हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की। हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत ने इन दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। दूसरी तरफ अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती अदालत के आदेश की सीधी अवहेलना करते हुए अचानक भूमिगत हो गया। मुंबई सीबीआई की टीम ने फरार अधिकारी का सुराग लगाने के लिए तकनीकी निगरानी का सहारा लिया और गुप्त सूचनाएं एकत्रित कीं। इन प्रयासों के जरिए एजेंसी को पता चला कि आरोपी अधिकारी उत्तराखंड के ऋषिकेश में छिपा हुआ है। इसके बाद जांच दल ने वहां छापेमारी कर उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। इसका आप पर असर इस कार्रवाई से टैक्स अधिकारियों द्वारा की जाने वाली अनैतिक वसूली और घूसखोरी की शिकायतों पर कड़े प्रशासनिक व न्यायिक कदमों का स्पष्ट संदेश मिलता है। • व्यापारियों और करदाताओं के लिए: यदि कोई कर अधिकारी किसी मामले को निपटाने के बदले अनुचित धन की मांग करता है, तो सीधे जांच एजेंसी को शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इससे मनमानी वसूली पर रोक लगेगी और वैध कारोबारी प्रक्रियाओं में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। • महाराष्ट्र में: ठाणे और रायगढ़ क्षेत्र के सीजीएसटी कार्यालयों में टैक्स मामलों की जांच प्रक्रियाओं की प्रशासनिक निगरानी सख्त हो सकती है। स्थानीय कारोबारी अब लंबित मामलों में दबाव या बिचौलियों के दखल की शिकायत सतर्कता विभागों से खुलकर कर सकेंगे। • उत्तराखंड में: ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में अन्य राज्यों से फरार आरोपियों की गतिविधियों पर स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की चौकसी बढ़ेगी। होटल, लॉज और ठहराव स्थलों पर पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को और सतर्कता से लागू किया जाएगा। • सरकारी अधिकारियों के लिए: न्यायिक आदेशों की अवहेलना करने या भागने की स्थिति में सेवा नियमों के तहत सख्त निलंबन व कानूनी परिणामों का सामना करना तय है। वरिष्ठ पदों पर बैठे अधिकारियों की वित्तीय जवाबदेही और भ्रष्टाचार निरोधी जांच का दायरा अब और विस्तृत हो गया है। ऐसा क्यों हुआ यह मामला सीजीएसटी अधिकारियों द्वारा एक व्यापारिक फर्म के खिलाफ चल रही कार्रवाई को दबाने के बदले अवैध धन की मांग करने और बाद में न्यायिक आदेशों से बचने की कोशिश से जुड़ा है। • सीधा कारण: एक फर्म से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए अधिकारियों द्वारा डेढ़ करोड़ रुपये की घूस मांगी गई थी, जिसे बिचौलिए के माध्यम से 40 लाख रुपये में तय किया गया। इस अवैध मांग की सूचना मिलने पर केंद्रीय जांच एजेंसी ने जाल बिछाकर बिचौलिए को नकद राशि लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। • गिरफ्तारी का आधार: ठाणे की विशेष अदालत द्वारा दी गई जमानत को बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को खारिज करते हुए दो दिन की हिरासत का आदेश दिया था। इस न्यायिक निर्देश के बावजूद अतिरिक्त आयुक्त जांच में शामिल होने के बजाय फरार हो गए थे। • छिपाव और तकनीकी ट्रैकिंग: कानूनी हिरासत से बचने के लिए आरोपी अधिकारी उत्तराखंड के ऋषिकेश चला गया था। मुंबई जांच दल ने तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर उसकी भौगोलिक स्थिति का पता लगाकर उसे गिरफ्तार किया। सवाल-जवाब 1. सीबीआई ने ऋषिकेश से किस अधिकारी को गिरफ्तार किया है? सीबीआई ने सीजीएसटी के अतिरिक्त आयुक्त और 2009 बैच के आईआरएस अधिकारी विनय कुमार कांठेती को ऋषिकेश से गिरफ्तार किया है। 2. यह मामला कितनी रिश्वत की मांग से जुड़ा हुआ है? इस मामले में एक व्यावसायिक फर्म से जुड़े विवाद को रफा-दफा करने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में 40 लाख रुपये में तय किया गया। 3. इस केस में बिचौलिए को कब और कैसे पकड़ा गया? जांच एजेंसी ने 27 अगस्त 2026 को जाल बिछाकर कस्टम्स हाउस एजेंट नरिंदर राजपूत को 40 लाख रुपये का नकद भुगतान लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। 4. बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया था? बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को निचली अदालत का जमानत आदेश पलटते हुए आरोपियों को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेजने का निर्देश दिया था। 5. मामले में नामजद अन्य आरोपियों की वर्तमान स्थिति क्या है? पूछताछ के बाद अदालत ने सीजीएसटी अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और बिचौलिए नरिंदर राजपूत को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। https://trendkia.com/national/uttarakhand-ke-rishikesh-men-chhipa-2009-baicha-ka-irs-aphasara-giraphtara-rishvata-mamale-men-cbi-ne-pakara-35853 TrendKia — Har trend, sabse pehle.