उत्तराखंड की दुर्गम चोटियों पर भारतीय और अर्जेंटीना सैनिकों का संयुक्त तिरंगा, सेना प्रमुख ने किया स्वागत भारतीय और अर्जेंटीना सेना के 35 सदस्यीय संयुक्त दल ने माउंट अबी गामिन और माउंट कमेट पर सफल चढ़ाई पूरी कर ली है। नई दिल्ली में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने अभियान दल का औपचारिक अभिनंदन किया। हिमालय के दुर्गम शिखरों पर भारतीय और अर्जेंटीना के सैन्य पर्वतारोहियों ने संयुक्त रूप से एक बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। दोनों देशों के सैनिकों के इस साझा दल ने सितंबर महीने के दौरान उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की दो अत्यंत चुनौतीपूर्ण चोटियों को सफलतापूर्वक फतह किया। अभियान पूरा होने के उपरांत 6 अक्टूबर को राजधानी नई दिल्ली के भीतर आयोजित एक विशेष समारोह में थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सभी सदस्यों की अगवानी की और अभियान का औपचारिक समापन करते हुए उन्हें फ्लैग इन किया। गढ़वाल हिमालय की दो विशाल चोटियों पर विजय इस संयुक्त साहसिक मिशन के अंतर्गत पर्वतारोहियों ने 17 सितंबर को 7,355 मीटर ऊंचे माउंट अबी गामिन के शिखर पर अपने कदम रखे। इसके ठीक चार दिन बाद, यानी 21 सितंबर 2026 को टीम ने 7,756 मीटर की ऊंचाई वाले माउंट कमेट पर भी विजय पताका फहरा दी। उत्तराखंड राज्य के चमोली जनपद में स्थित माउंट कमेट भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि कंचनजंगा और नंदा देवी के उपरांत यह भारत भूमि की तीसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी मानी जाती है। मिशन की संरचना और रास्ते की बाधाएं इस संयुक्त पर्वतारोहण मिशन में दोनों सेनाओं के कुल मिलाकर 35 जांबाज शामिल किए गए थे। इस अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल चिराग चटर्जी के हाथों में सौंपा गया था। पूरे दल में भारतीय सेना के 25 सैन्यकर्मी और अर्जेंटीना की सेना के 10 पर्वतारोही शामिल रहे। इस विशेष दल को 21 अगस्त 2026 के दिन नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। मार्ग में अभियान दल को हिमालयी पर्यावरण की सबसे भीषणतम बाधाओं से जूझना पड़ा। रास्ते में हड्डी कंपा देने वाली ठंड, तीव्र बर्फीले तूफान, हिमखंडों की गहरी दरारें और सीधी खड़ी चट्टानी ढलानों ने कदम-कदम पर इम्तिहान लिया। अत्यंत सीमित ऑक्सीजन वाले इन खतरनाक ऊंचाई वाले इलाकों में दोनों देशों के जांबाजों ने उच्च स्तर के तकनीकी कौशल, मानसिक दृढ़ता और बेहतरीन तालमेल का परिचय देते हुए मिशन को अंजाम तक पहुंचाया। दोनों सेनाओं के बीच सैन्य सहयोग की तीसरी कड़ी द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के लिहाज से दोनों देशों की सेनाओं के मध्य संचालित होने वाला यह तीसरा संयुक्त पर्वतारोहण अभियान रहा। इससे पूर्व जनवरी 2025 में दोनों सेनाओं का पहला संयुक्त मिशन दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना स्थित मेंडोजा में आयोजित हुआ था, जहां सैनिकों ने 6,962 मीटर ऊंचे माउंट एकॉनकागुआ को फतह किया था। इसके पश्चात अगस्त 2025 में लद्दाख की सुरू घाटी में स्थित 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन चोटी पर दूसरा सफल अभियान चलाया गया था। लगातार तीन सफल अभियानों के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं ने अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संयुक्त रूप से अभियान चलाने का बहुमूल्य व्यावहारिक अनुभव अर्जित किया है। ऐसे अभियानों से दोनों सैन्य बलों के बीच रणनीतिक भरोसा, अंतर-संचालनीयता और आपसी पेशेवर तालमेल को एक नई मजबूती हासिल हुई है। इसका आप पर असर यह संयुक्त अभियान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को गहरा करने और सामरिक प्रशिक्षण को नई ऊंचाई देने वाला कदम है। • भारत में: यह अभियान भारतीय सेना की पर्वतीय युद्धक और दुर्गम अभियानों की क्षमताओं को प्रदर्शित करता है। देश के नागरिकों के लिए यह सीमाओं की सुरक्षा में तैनात सैनिकों की असाधारण शारीरिक और तकनीकी दक्षता पर विश्वास मजबूत करता है। • उत्तराखंड में: चमोली जिले की चोटियों पर ऐसे सफल अभियानों से राज्य में साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण के लिए सुरक्षा मानकों को बल मिलता है। स्थानीय पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रैकिंग और साहसिक गतिविधियों से जुड़े लोगों को प्रेरणा मिलती है। • द्विपक्षीय रक्षा संबंधों पर: लैटिन अमेरिकी देशों के साथ भारत की सेना के तालमेल में लगातार सुधार हो रहा है। भविष्य में इस प्रकार के साझा अभियानों से अन्य संयुक्त रक्षा अभ्यासों के रास्ते खुलते हैं। • सैनिकों की तैयारी पर: अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास से जवानों की तकनीकी क्षमता और कठिन परिस्थितियों में बचने की क्षमता सुदृढ़ होती है। यह अनुभव सैनिकों को उच्च हिमालयी सीमाओं पर किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रखता है। ऐसा क्यों हुआ यह पर्वतारोहण अभियान दोनों देशों की सेनाओं के बीच पूर्व निर्धारित संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम और हिमालयी दुर्गम इलाकों में अंतर-संचालनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। • सामरिक सहयोग का विस्तार: दोनों देश पिछले दो वर्षों से एक-दूसरे के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। इसी योजना के तहत यह तीसरा संयुक्त अभ्यास निर्धारित समय पर आयोजित किया गया। • पूर्व सफलताओं की निरंतरता: जनवरी 2025 में माउंट एकॉनकागुआ और अगस्त 2025 में माउंट कुन पर मिली सफलताओं के बाद दोनों सेनाओं ने साझेदारी जारी रखने का निर्णय लिया था। पहले के दो मिशनों के सकारात्मक परिणामों ने इस तीसरे अभियान की नींव तैयार की। • कठिन परिस्थितियों में संयुक्त कार्यकुशलता: अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और खड़ी चट्टानों जैसे जटिल भूगोल में विभिन्न देशों के सैनिकों के बीच समन्वय का परीक्षण करना मुख्य उद्देश्य था। ऐसे मिशन जटिल अभियानों में दोनों सेनाओं की साझेदारी की क्षमता को परखने में मदद करते हैं। सवाल-जवाब 1. इस संयुक्त अभियान में कौन सी दो चोटियां फतह की गईं? इस अभियान में 17 सितंबर को 7,355 मीटर ऊंची माउंट अबी गामिन और 21 सितंबर 2026 को 7,756 मीटर ऊंची माउंट कमेट चोटी फतह की गई। 2. माउंट कमेट भारत में किस स्थान पर स्थित है? माउंट कमेट उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है और यह भारत की तीसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। 3. इस संयुक्त पर्वतारोहण दल में कितने सैनिक शामिल थे? इस पूरे दल में 35 सदस्य थे, जिनमें भारतीय सेना के 25 और अर्जेंटीना की सेना के 10 जवान शामिल थे। 4. इस अभियान का नेतृत्व किसने किया? इस संयुक्त सैन्य पर्वतारोहण अभियान का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल चिराग चटर्जी ने किया। 5. यह अभियान कब और कहां से शुरू हुआ था? इस दल को 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर से रवाना किया गया था। 6. दोनों सेनाओं ने इससे पहले कौन से संयुक्त अभियान किए थे? जनवरी 2025 में अर्जेंटीना के माउंट एकॉनकागुआ और अगस्त 2025 में लद्दाख की सुरू घाटी में माउंट कुन पर संयुक्त अभियान संचालित किए गए थे। https://trendkia.com/national/uttarakhand-ki-durgama-chotiyon-para-indian-aura-argentina-sainikon-ka-snyukta-tirnga-sena-pramukha-ne-kiya-svagata-43993 TrendKia — Har trend, sabse pehle.