उत्तराखंड में भूस्खलन और असम में बाढ़ का कहर, कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी देश भर में मानसूनी बारिश के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं, जहां असम में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं वहीं उत्तराखंड में भूस्खलन के चलते कई प्रमुख राजमार्ग ठप पड़े हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन को गंभीर रूप से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों ने शुरुआत में अनुमान व्यक्त किया था कि अल नीनो का असर मानसून को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है, और कई विशेषज्ञों ने तो सुपर अल नीनो के सक्रिय होने की संभावना जताई थी। हालांकि वर्तमान में देश के धरातलीय धरातल पर मानसून का जो स्वरूप देखने को मिल रहा है, वह इन पूर्वानुमानों से बिल्कुल विपरीत कहानी बयां कर रहा है। देश के पश्चिमी छोर गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर के असम तक लगातार हो रही मुसलाधार बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं से यातायात थम गया है, वहीं मैदानी राज्यों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। इस बीच मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई राज्यों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पूर्वकल्पित अल नीनो दावों के विपरीत असम में बाढ़ की गंभीर तबाही पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में मूसलाधार वर्षा के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह और गंभीर बनी हुई है। सरकारी और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार असम में बाढ़ की चपेट में आने से जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 78 तक पहुंच गई है। वर्तमान बाढ़ संकट के दौरान हाल ही में 3 और लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से 2 लोगों की मृत्यु शिवसागर जिले में हुई है और 1 व्यक्ति की जान गोलाघाट जिले में गई है। वर्तमान समय में प्रदेश के कम से कम 7 प्रमुख जिले बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हैं। इन प्रभावित जिलों में शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिश्वनाथ और कामरूप (मेट्रो) शामिल हैं, जहां चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। बाढ़ का दायरा लगातार फैलने से राज्य के 21 राजस्व सर्किलों के अंतर्गत आने वाले 551 गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इस आपदा की वजह से करीब 3,00,031 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं और वे राहत शिविरों तथा सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। केवल रिहाइशी इलाके ही नहीं, बल्कि किसानों की 21,523.08 हेक्टेयर कृषि भूमि भी बाढ़ के पानी में डूब चुकी है, जिससे फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कामरूप (मेट्रो) जिला शहरी बाढ़ की चपेट में आ गया है, जहां गुवाहाटी और आसपास के कई इलाकों में भयानक जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियानों को तेज कर दिया है। मंत्री अतुल बोरा ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में प्रशासनिक टीमें काम कर रही हैं और प्रभावित परिवारों को 15,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक राहत वस्तुओं का वितरण लगातार जारी है। उत्तराखंड के चमोली में लैंडस्लाइड से बदरीनाथ और केदारनाथ मार्ग ठप पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के चमोली जिले में भी लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। जिले के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश के कारण नदियां और स्थानीय नाले उफान पर बह रहे हैं, जबकि पहाड़ों से लगातार पत्थर और मलबे का खिसकना जारी है। बारिश और भूस्खलन के कारण प्रसिद्ध बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है। भानेरपानी के समीप पीपलकोटी क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरकर नेशनल हाईवे पर आ जमा हुई हैं, जिससे मुख्य सड़क पूरी तरह बंद हो चुकी है। इस कारण बदरीनाथ धाम की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों और संकट का सामना करना पड़ रहा है। एनएचडीसीएल की बचाव और निर्माण टीमें मार्ग से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने के काम में जुटी हुई हैं, लेकिन पहाड़ों से लगातार हो रहे भूस्खलन के चलते सफाई कार्य में अत्यधिक कठिनाई आ रही है। केवल बदरीनाथ नेशनल हाईवे ही नहीं, बल्कि चमोली जिले के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाली 13 से अधिक सड़कें भी बारिश और मलबे की वजह से पूरी तरह बंद पड़ी हैं। जिले के देवाल, थराली और नंदानगर क्षेत्रों की कई महत्वपूर्ण संपर्क सड़कें मलबे के नीचे दब गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई दूरदराज के गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है। इसके साथ ही प्रसिद्ध केदारनाथ हाईवे पर भी कई स्थानों पर लैंडस्लाइड होने की वजह से भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिससे वहां भी यातायात ठप पड़ गया है। जम्मू और कश्मीर में सुरक्षात्मक कदम और चिनाब घाटी में बारिश उत्तर भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के डोडा और किश्तवाड़ जिलों में भी लगातार खराब होते मौसम और भारी बारिश को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर डोडा और किश्तवाड़ जिले के अधिकांश हिस्सों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को बंद रखने का आधिकारिक आदेश जारी किया था। चिनाब घाटी क्षेत्र में पड़ने वाले डोडा, किश्तवाड़ और रामबन इलाकों में तड़के सुबह करीब 5 बजे से ही मध्यम से भारी बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था, जो कई क्षेत्रों में दिन भर निरंतर जारी रहा। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी पर्वतीय क्षेत्रों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी और सतर्क नजर रखे हुए है। लगातार हो रही वर्षा के कारण पर्वतीय सड़कों पर फिसलन काफी बढ़ गई है, जबकि कुछ संवेदनशील और ढलान वाले क्षेत्रों में ऊपर से पत्थर गिरने का खतरा भी बना हुआ है। इसे देखते हुए प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे बिना किसी अति आवश्यक कार्य के यात्रा करने से बचें और समय-समय पर जारी होने वाली मौसम संबंधी चेतावनियों का सख्ती से पालन करें। दूसरी ओर रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात की आवाजाही जारी रही। लगातार बारिश के बावजूद यह प्रमुख मार्ग खुला रहा और वाहनों की आवाजाही सामान्य तरीके से चलती रही। क्योंकि यह राष्ट्रीय राजमार्ग कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र सड़क मार्ग है, इसलिए प्रशासनिक टीमें इस पूरे मार्ग की स्थिति पर विशेष और निरंतर निगरानी बनाए हुए हैं। छत्तीसगढ़ पर केंद्रित डीप डिप्रेशन और आईएमडी का बहु-राज्यीय अलर्ट देश के मध्य भागों में मौसम प्रणाली में तेजी से बदलाव आया है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से जारी तकनीकी जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के मध्य हिस्सों के ऊपर बना डीप डिप्रेशन पिछले 6 घंटों के दौरान 15 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ा है। यह मौसम प्रणाली 29 जुलाई 2026 की रात 2330 बजे IST पर पश्चिमी छत्तीसगढ़ के हिस्सों और उससे सटे पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर 21.9°N अक्षांश के निकट केंद्रित थी। पश्चिम बंगाल में बने डीप डिप्रेशन के प्रभाव को देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग ने देश के कई पूर्वी और मध्य राज्यों में भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और झारखंड के कई जिलों में कुछ स्थानों पर तेज से अत्यधिक तेज मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर के लिए मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, जहां तेज हवाओं के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। बिहार में सुस्त मानसून के बाद पुनः बारिश की गतिविधियों का पूर्वानुमान पूर्वी राज्य बिहार में पिछले कुछ समय से मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी हुई थी, जिससे किसानों और आम लोगों को उमस का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि अब मौसम विभाग ने राज्य के विभिन्न जिलों में मानसूनी गतिविधियों के फिर से सक्रिय होने की प्रबल संभावना जताई है। पटना स्थित मौसम पूर्वानुमान केंद्र के अनुसार उत्तर बिहार, सीमांचल और दक्षिण बिहार के कई इलाकों में आने वाले समय में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के आसार हैं। मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार उत्तर बिहार और सीमांचल के अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी और सुपौल जिलों में घने बादलों की आवाजाही के साथ बारिश होने का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा दक्षिण बिहार के जिलों जैसे पटना, गया, जहानाबाद, भोजपुर, बक्सर, रोहतास और औरंगाबाद में भी कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और बौछारें पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है। उल्लेखनीय है कि बिहार के कई जिलों में बीते दिनों भी हल्की से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की जा चुकी है, और नया सिस्टम बनने से बारिश का दायरा और बढ़ सकता है। इसका आप पर असर भारत में: कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और नदियों के उफान से खेती की जमीन प्रभावित हुई है तथा मुख्य मार्गों पर भूस्खलन के कारण यातायात व रसद आपूर्ति में देरी का सामना करना पड़ सकता है। असम और उत्तराखंड में: असम में बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए 15,000 रुपये की सरकारी सहायता राशि बांटी जा रही है, वहीं उत्तराखंड में बदरीनाथ और केदारनाथ राजमार्ग बंद होने से तीर्थयात्रियों को यात्रा टालने या संभलकर चलने की सलाह दी गई है। सवाल-जवाब 1. असम में बाढ़ के कारण अब तक कितने लोगों की मौत हो चुकी है? असम में वर्तमान बाढ़ के दौरान मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 78 हो गई है, जिनमें हाल ही में हुई 3 मौतें भी शामिल हैं। 2. असम में बाढ़ से कितने जिले और लोग प्रभावित हुए हैं? असम के 7 जिलों (शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिश्वनाथ और कामरूप मेट्रो) में 551 गांवों के करीब 3,00,031 लोग प्रभावित हुए हैं। 3. उत्तराखंड के चमोली में कौन-कौन से मुख्य रास्ते बंद हुए हैं? चमोली में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग भानेरपानी के पास भारी मलबे से बंद है, इसके अलावा 13 से अधिक ग्रामीण सड़कें और केदारनाथ हाईवे भी बाधित हुए हैं। 4. जम्मू-कश्मीर के किन जिलों में बारिश की वजह से स्कूल बंद किए गए हैं? लगातार तेज बारिश और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए डोडा और किश्तवाड़ जिलों में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए। 5. मौसम विभाग द्वारा डीप डिप्रेशन को लेकर क्या जानकारी दी गई है? छत्तीसगढ़ के ऊपर केंद्रित डीप डिप्रेशन 15 किमी प्रति घंटे की गति से पश्चिम बढ़कर 29 जुलाई की रात पश्चिमी छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के पास स्थित था। 6. बिहार के किन जिलों में भारी बारिश और बादलों की आवाजाही का अनुमान है? बिहार के अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, पटना, गया और औरंगाबाद में बारिश का अलर्ट है। https://trendkia.com/national/uttarakhand-men-bhuskhalana-aura-assam-men-barha-ka-kahara-kai-rajyon-men-bhari-barisha-ki-chetavani-12048 TrendKia — Har trend, sabse pehle.