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  "title": "वडनगर और काशी के जुड़ाव पर बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, युवाओं के सेवा संकल्प को सराहा",
  "summary": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा के प्रतिभागियों से संवाद करते हुए सेवा को सबसे बड़ा प्रेरक तत्व बताया और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया।",
  "content": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा में हिस्सा ले रहे युवाओं से सीधा संवाद साधा और उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि वडनगर और वाराणसी दोनों ही ऐसे प्राचीन एवं ऐतिहासिक शहर हैं, जिनकी जीवंत परंपरा हजारों सालों से निरंतर चली आ रही है। प्रधानमंत्री ने अपने जीवन के संदर्भ को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि वडनगर उनकी जन्मभूमि है और वाराणसी उनकी कर्मभूमि है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े इन सेवा यात्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यात्राओं के माध्यम से धरातल को समझना राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।\n\nवडनगर से काशी तक का आध्यात्मिक और सामाजिक सेतु\nप्रधानमंत्री ने दोनों शहरों के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि काशी पर जहां देवाधिदेव बाबा विश्वनाथ की असीम कृपा बरसती है, वहीं वडनगर हाटकेश्वर महादेव के पावन आशीर्वाद की धरती है। युवा प्रतिभागी इन दोनों ऐतिहासिक नगरों के मध्य सेवा की एक सशक्त श्रृंखला स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने बातचीत के दौरान यह भी साझा किया कि वडनगर से वाराणसी की दिशा में आगे बढ़ रहे इन युवाओं के अनुभवों को सुनकर उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वे स्वयं भी उस पदयात्रा में उनके कदम से कदम मिलाकर चल रहे हों।\n\nकठिनाइयों से सीख और संगठन का पुराना अनुभव\nअपने पुराने दिनों को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब वे संगठन के स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, तब उन्हें कई यात्राओं में शामिल होने और उनकी व्यवस्था देखने का प्रत्यक्ष अवसर मिला था। हालांकि, जब व्यक्ति स्वयं लंबी यात्रा पर पैदल निकलता है, तब उसे असल रूप में यह आभास होता है कि रास्ते में कितने संघर्षों, चुनौतियों और शारीरिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इन तमाम अवरोधों के बाद भी युवा साथियों ने पूरे समर्पण, अनुशासन और लगन के साथ इस सेवा अभियान को आगे बढ़ाने का काम किया है।\n\nकल्याणकारी पहलों की बुनियाद है सेवा भाव\nजनहित के कार्यों पर बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब शासन या समाज में सेवा भाव को प्राथमिकता दी जाती है, तभी बड़े परिवर्तन संभव होते हैं। इसी भावना की बदौलत देश के करोड़ों जरूरतमंद नागरिकों तक मुफ्त अनाज पहुंचाने की व्यवस्था बनी और आयुष्मान योजना जैसी युगांतरकारी स्वास्थ्य पहलों ने जन्म लिया। उन्होंने कहा कि यात्रा के मार्ग में युवाओं ने खुद जमीनी स्तर पर सेवा कार्यों के विस्तार को देखा होगा। प्रधानमंत्री ने इस दौरान पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम सूर्य घर योजना का विशेष जिक्र किया और कहा कि ये कार्यक्रम कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सीधी पहुंच बनाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने दोहराया कि सेवा ही मनुष्य और समाज की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति होती है।\n\nवर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में युवाओं का दायित्व\nप्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति, चुनावी गतिविधियां और औपचारिक प्रशासनिक व्यवस्थाएं अपनी जगह निरंतर चलती रहती हैं, लेकिन सर्वोपरि संकल्प राष्ट्र निर्माण और एक सशक्त भारत का है। उन्होंने बल देकर कहा कि वर्ष 2047 तक एक पूर्णतः विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की युवा शक्ति की क्षमता और ऊर्जा को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाना अनिवार्य है। आज की युवा पीढ़ी इस विकसित भारत की मुख्य निर्माता है और भविष्य में इस व्यवस्था की सबसे बड़ी लाभार्थी भी वही बनेगी।\n\nजमीनी हकीकत और विविधता को समझने की सीख\nअपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस ऐतिहासिक जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए देश की जमीनी हकीकत को प्रत्यक्ष रूप से देखना और समझना बेहद आवश्यक है। युवाओं को चाहिए कि वे देश के अलग-अलग क्षेत्रों, भौगोलिक संरचनाओं और विविध सामाजिक वर्गों के लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। आम नागरिकों के सपनों, उनकी वास्तविक समस्याओं और उनकी रोजमर्रा की आकांक्षाओं को गहराई से जानना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि यह सेवा संकल्प यात्रा इन युवाओं के व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक दृष्टिकोण को समृद्ध करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nयह संबोधन देश भर के युवाओं को जमीनी सेवा कार्यों और सरकारी कल्याणकारी पहलों की पहुंच समझने के लिए प्रेरित करता है।\n\n• भारत में: केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान और आयुष्मान योजना की अंतिम छोर तक डिलीवरी पर जोर दिया गया है। आम नागरिक इन योजनाओं की जमीनी स्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही को बेहतर समझ सकते हैं।\n• युवाओं के लिए: वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवाओं को प्रमुख निर्माता और लाभार्थी बताया गया है। युवाओं को सामाजिक जीवन और स्थानीय समस्याओं को सीधे धरातल पर जाकर समझने की प्रेरणा मिलती है।\n• नागरिक समाज के लिए: सेवा भाव को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित न रखकर जनभागीदारी का माध्यम बनाने का संदेश दिया गया है। इससे सामाजिक संगठनों और स्थानीय अभियानों को अधिक मजबूती मिल सकती है।\n• सांस्कृतिक जागरूकता: प्राचीन ऐतिहासिक शहरों और उनकी विरासत को सामाजिक अभियानों से जोड़ने की दिशा स्पष्ट होती है। इससे स्थानीय संस्कृति, परंपरा और जनसंवाद को बढ़ावा मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह संवाद सेवा संकल्प यात्रा के प्रतिभागियों के अनुभवों को सुनने और सामाजिक सेवा के माध्यम से युवाओं को राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ने के लिए आयोजित किया गया था।\n\n• अभियान की प्रगति: वडनगर से वाराणसी के बीच चल रहे इस युवा अभियान के अनुभवों की समीक्षा और प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाना इसका मुख्य उद्देश्य था। प्रधानमंत्री ने स्वयं बातचीत करके पदयात्रा के दौरान आने वाली जमीनी चुनौतियों पर चर्चा की।\n• राष्ट्रीय दृष्टिकोण का प्रसार: वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने के लिए युवा पीढ़ी को सीधी जिम्मेदारी सौंपने की रूपरेखा रखी गई। सरकार चुनावी और राजनीतिक चक्रों से इतर दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण पर संवाद स्थापित करना चाहती थी।\n• कल्याणकारी योजनाओं का अवलोकन: पदयात्रा के मार्ग में पड़ने वाले क्षेत्रों में केंद्रीय योजनाओं के वास्तविक प्रभाव को युवाओं द्वारा देखने का संदर्भ सामने आया। इस अनुभव के जरिए प्रशासन की लास्ट-माइल डिलीवरी व्यवस्था को रेखांकित किया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किन दो शहरों को अपनी जन्मभूमि और कर्मभूमि बताया?\nप्रधानमंत्री ने वडनगर को अपनी जन्मभूमि और वाराणसी को अपनी कर्मभूमि बताया।\n\n2. सेवा संकल्प यात्रा किन दो स्थानों के बीच आयोजित की जा रही है?\nयह यात्रा वडनगर से वाराणसी के बीच निकाली जा रही है।\n\n3. प्रधानमंत्री ने संबोधन में किन प्रमुख योजनाओं का उल्लेख किया?\nउन्होंने आयुष्मान योजना, पीएम किसान सम्मान निधि और पीएम सूर्य घर योजना का विशेष रूप से उल्लेख किया।\n\n4. विकसित भारत का निर्माण किस वर्ष तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है?\nवर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।\n\n5. प्रधानमंत्री ने युवाओं को किस प्रकार का अनुभव हासिल करने की सलाह दी?\nउन्होंने देश की जमीनी हकीकत समझने, विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करने और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से मिलकर उनके सपने जानने की सलाह दी।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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