# वैवाहिक विवाद में बच्चे का DNA टेस्ट सही, सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की अर्जी खारिज कर हाईकोर्ट का फैसला रखा बरकरार

> पति द्वारा पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाने और तलाक मांगने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे के डीएनए टेस्ट को मंजूरी दी है। अदालत ने कहा कि वफादार होने पर जांच से एतराज नहीं होना चाहिए।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-08-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/vaivahika-vivada-men-bachche-ka-dna-testa-sahi-supreme-court-ne-patni-ki-arji-kharija-kara-high-court-ka-phaisala-rakha-barakarara-18617 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुप्रीम कोर्ट, डीएनए टेस्ट, पैटरनिटी टेस्ट, बॉम्बे हाईकोर्ट, वैवाहिक विवाद, तलाक कानून, पुणे फैमिली कोर्ट

वैवाहिक विवादों में बच्चे की पितृत्व पहचान से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पति ने पत्नी के कथित अनैतिक आचरण और चरित्र पर सवाल उठाते हुए तलाक की याचिका दाखिल की है, और वह दावा करता है कि वह बच्चे का जैविक पिता नहीं है, तो ऐसी स्थिति में आवश्यकता पड़ने पर बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया जा सकता है। इस आदेश के साथ ही अदालत ने बच्चे का पितृत्व परीक्षण कराए जाने का मार्ग पूरी तरह साफ कर दिया है।

## महिला की याचिका खारिज और शीर्ष अदालत की टिप्पणी
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की दो सदस्यीय पीठ ने उस महिला की याचिका को खारिज कर दिया, जिसने अपने बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने के आदेश का विरोध किया था। महिला का तर्क था कि कानून के प्रावधानों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को उसकी सहमति के बिना जबरन डीएनए जांच कराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उसने अदालत से मांग की थी कि उसके पति की तलाक की अर्जी पर डीएनए जांच कराए बिना ही फैसला लिया जाना चाहिए। हालांकि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिला के रुख पर सवाल उठाते हुए मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यदि वह अपने रिश्ते में पूरी तरह वफादार रही हैं, तो फिर उन्हें इस टेस्ट पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए।

## पुणे फैमिली कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसलों पर मुहर
सुप्रीम कोर्ट ने पुणे की फैमिली कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जारी किए गए पूर्व आदेशों को पूरी तरह बरकरार रखा है। इन निचली अदालतों ने तलाक की कार्यवाही के दौरान बच्चे का आधिकारिक डीएनए टेस्ट कराने का निर्देश दिया था। पति ने अदालत के समक्ष यह दलील पेश की थी कि अपनी पत्नी पर लगाए गए चरित्रहीनता के आरोपों को साबित करने के लिए यह वैज्ञानिक परीक्षण अत्यंत आवश्यक है। इससे पहले पति ने निजी स्तर पर हैदराबाद की एक लैब से बच्चे का डीएनए टेस्ट करवाया था, जिसकी रिपोर्ट उसके पक्ष में आई थी। उस निजी रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया था कि पति के उस बच्चे का जैविक पिता होने की संभावना शून्य है। इसके बाद ही पति ने इस रिपोर्ट को आधार बनाकर अदालत में तलाक याचिका दायर की और आधिकारिक डीएनए टेस्ट की मांग की।

## साक्ष्य की वैज्ञानिक प्रासंगिकता और कानूनी आधार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले का विश्लेषण करते हुए माना था कि हैदराबाद की लैब से प्राप्त निजी रिपोर्ट पहली नजर में पति के दावों को मजबूत आधार प्रदान करती है। हाईकोर्ट ने कहा था कि चूंकि पति की तलाक याचिका का मुख्य आधार पत्नी के आचरण पर सवाल उठाना है, इसलिए ऐसे गंभीर आरोपों की सच्चाई जांचने के लिए डीएनए टेस्ट एक निर्णायक और महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकता है। अदालत के अनुसार, डीएनए रिपोर्ट के अतिरिक्त ऐसा कोई दूसरा प्रत्यक्ष साक्ष्य मिलना बेहद कठिन है जो यह साबित कर सके कि पति बच्चे का जैविक पिता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट की इस दलील से पूरी सहमति व्यक्त की और माना कि पति ने टेस्ट कराने के लिए आवश्यक कानूनी आधार प्रस्तुत किया है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह फैसला उन वैवाहिक मामलों में कानूनी स्थिति स्पष्ट करता है जहां पति बेवफाई का आरोप लगाकर बच्चे का जैविक पिता न होने का दावा करता है।

**महाराष्ट्र में:** यह निर्णय पुणे की फैमिली कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा डीएनए टेस्ट दिए जाने के कानूनी आदेशों पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर लगाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने डीएनए टेस्ट को लेकर क्या आदेश दिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पत्नी पर अनैतिक चरित्र का आरोप लगाकर तलाक मांगने वाले वैवाहिक विवाद में बच्चे का डीएनए टेस्ट कराया जा सकता है।

### 2. इस मामले की सुनवाई किस बेंच ने की?
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने की।

### 3. पत्नी ने डीएनए टेस्ट का विरोध क्यों किया था?
पत्नी की दलील थी कि कानून किसी व्यक्ति को जबरन डीएनए टेस्ट कराने के लिए मजबूर करने की इजाजत नहीं देता और तलाक का फैसला टेस्ट के बिना होना चाहिए।

### 4. पति के पास डीएनए टेस्ट मांगने का प्राथमिक साक्ष्य क्या था?
पति ने पहले हैदराबाद की एक लैब से निजी तौर पर टेस्ट कराया था, जिसकी रिपोर्ट में उसके बच्चे का जैविक पिता होने की संभावना शून्य बताई गई थी।

### 5. सुप्रीम कोर्ट ने किन अदालतों के आदेश को बरकरार रखा?
सुप्रीम कोर्ट ने पुणे की फैमिली कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों को बरकरार रखा।

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