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  "type": "article",
  "title": "वाइस एडमिरल एएन प्रमोद बने नौसेना के उपप्रमुख, गलवान से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक रहे हैं प्रमुख रणनीतिकार",
  "summary": "वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने शनिवार को भारतीय नौसेना के उपप्रमुख पद का कार्यभार संभाल लिया। 36 वर्षों के अनुभव वाले वाइस एडमिरल प्रमोद ने ऑपरेशन सिंदूर और पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारतीय समुद्री सुरक्षा की कमान संभाली थी।",
  "content": "हिंद महासागर क्षेत्र से लेकर पश्चिम एशिया तक गहराते समुद्री सुरक्षा संकट के बीच भारतीय नौसेना के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव हुआ है। अनुभवी रणनीतिकार वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने शनिवार को भारतीय नौसेना के उपप्रमुख यानी डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ का महत्वपूर्ण पदभार ग्रहण कर लिया है। लगभग 36 वर्षों के लंबे और गौरवशाली सैन्य अनुभव से लैस वाइस एडमिरल प्रमोद को ऐसे समय में यह जिम्मेदारी दी गई है जब भारत अपनी समुद्री सीमाओं की चौकसी और सामरिक तैयारियों को मजबूत करने में जुटा हुआ है। नौसेना मुख्यालय में हुए इस बदलाव से भारतीय समुद्री सुरक्षा रणनीति को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।\n\nशीर्ष नेतृत्व में बदलाव और 36 वर्षों का सैन्य सफर\nवाइस एडमिरल एएन प्रमोद की यह नियुक्ति भारतीय नौसेना में शीर्ष स्तर पर हुए व्यापक फेरबदल का हिस्सा है। उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती का स्थान लिया है, जो 38 साल की लंबी और निष्ठावान राष्ट्र सेवा के उपरांत 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए थे। वाइस एडमिरल प्रमोद का नौसैनिक करियर असाधारण उपलब्धियों से भरा रहा है। जुलाई 1990 में भारतीय नौसेना की एग्जीक्यूटिव शाखा में कमीशन प्राप्त करने वाले प्रमोद गोवा स्थित प्रसिद्ध नौसेना अकादमी के 38वें एकीकृत कैडेट कोर्स के पूर्व छात्र हैं। अपने करियर की शुरुआत से ही उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नौसैनिक संचार प्रणाली में विशेष निपुणता हासिल की है, जिसका लाभ नौसेना को समय-समय पर मिलता रहा है।\n\nनौसेना के विभिन्न अभियानों में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है। उन्होंने कई अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की कमान संभाली और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी कमान क्षमता का लोहा मनवाया। उनके नेतृत्व में आईएनएस राजपूत, आईएनएस अभय, आईएनएस शार्दुल और आईएनएस सतपुड़ा जैसे शक्तिशाली जहाजों ने समुद्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति दर्ज कराई। इन कमान तैनातियों के दौरान उन्होंने न केवल नौसैनिक अभियानों को कुशलता से संचालित किया, बल्कि नौसेना की युद्धक क्षमताओं में सुधार के लिए नए मानक भी तय किए।\n\nऑपरेशन सिंदूर में रणनीतिक दिशा और पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी\nदिसंबर 2023 से जुलाई 2026 तक वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने महानिदेशक नौसेना संचालन यानी डायरेक्टर जनरल नेवल ऑपरेशंस (DGNO) के तौर पर सेवाएं दीं। इस महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उन्होंने देश के सबसे संवेदनशील समुद्री अभियानों की योजना और उनके क्रियान्वयन का सीधा पर्यवेक्षण किया। पिछले वर्ष 7 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए नृशंस आतंकवादी हमले के बाद भारत ने सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचे को नष्ट करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे।\n\nऑपरेशन सिंदूर की सफलता के पीछे तीनों सेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने और समुद्री मोर्चे पर नौसेना की आक्रामक तैयारी बनाए रखने में वाइस एडमिरल प्रमोद का केंद्रीय योगदान रहा। इस अभियान के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया था कि यदि भारतीय नौसेना को पूर्ण सैन्य कार्रवाई की छूट दे दी जाती, तो पाकिस्तान के सामने बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो जाती। यह वक्तव्य उस दौर में नौसेना द्वारा बनाई गई रणनीतिक घेराबंदी और उसकी संहारक क्षमता को दर्शाने वाला था।\n\nऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर 22 अप्रैल को आयोजित एक प्रेस सम्मेलन में वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने विरोधी देश को कड़ा संदेश दिया था। उन्होंने समुद्री मोर्चे पर भारतीय बढ़त को रेखांकित करते हुए स्पष्ट कहा था कि भारत के पास अपने विरोधी को भारी नुकसान पहुंचाने के लिए सैन्य बल और गुणवत्ता दोनों का वर्चस्व उपलब्ध है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि नौसेना की तैयारियां तीनों सेनाओं द्वारा तैयार किए गए संकट प्रबंधन ढांचे का अभिन्न अंग हैं और किसी भी दुस्साहस का माकूल जवाब दिया जाएगा।\n\nपश्चिम एशिया संकट में ऊर्जा सुरक्षा और 9,000 करोड़ रुपये के व्यापार की रक्षा\nसमुद्री अभियानों के अलावा वाइस एडमिरल प्रमोद ने पश्चिम एशिया में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के दौरान भी भारत के आर्थिक और व्यापारिक हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लाल सागर और उसके आसपास के अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जब जहाजरानी सुरक्षा पर गंभीर संकट मंडरा रहा था, तब उनके नेतृत्व में नौसेना ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा का संचालन किया। इस विशेष अभियान के तहत भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने जोखिम भरे समुद्री रास्तों से गुजरने वाले 18 मर्चेंट जहाजों को कड़ा सुरक्षा घेरा प्रदान किया।\n\nइन व्यापारिक जहाजों में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का महत्वपूर्ण सामान और ईंधन लदा हुआ था। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधान के बीच भारतीय नौसेना द्वारा चलाए गए इस अभियान ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत की एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति की छवि को मजबूत किया। इस सफल कार्रवाई से न केवल भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हुई, बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति में भी कोई बाधा नहीं आने दी गई।\n\nकारगिल, पराक्रम और गलवान से लेकर मुख्यालय तक का व्यापक अनुभव\nवाइस एडमिरल एएन प्रमोद का करियर केवल हालिया अभियानों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि वे पिछले तीन दशकों में देश के हर बड़े सैन्य संकट का हिस्सा रहे हैं। वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध यानी ऑपरेशन विजय के दौरान उन्होंने समुद्र में नौसैनिक नाकेबंदी की रणनीति में सक्रिय भाग लिया था। इसके बाद 2001 में संसद पर हमले के बाद शुरू हुए ऑपरेशन पराक्रम में भी वे तैनात रहे। वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीन के साथ हुए हिंसक टकराव के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन स्नो लेपर्ड में भी उनकी रणनीतिक सूझबूझ की अहम भूमिका रही।\n\nसमुद्र में युद्धपोतों की कमान संभालने के अतिरिक्त उन्होंने नौसेना मुख्यालय में भी कई उच्च स्तरीय नीतिगत पदों को सुशोभित किया है। वे नौसेना के विमान अधिग्रहण कार्यक्रम, नौसैनिक विमानन शाखा और रणनीतिक योजना से जुड़ी प्रमुख शाखाओं में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, नौसेना स्टाफ के सहायक प्रमुख (वायु) और महाराष्ट्र नेवल एरिया के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी प्रशासनिक और परिचालन जिम्मेदारियां संभाली हैं।\n\nसैन्य क्षेत्र में उत्कृष्ट नेतृत्व, अदम्य साहस और अनुकरणीय कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा गया है। वर्ष 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा मेडल (YSM) से सम्मानित किया गया था। अब उपप्रमुख के पद पर उनकी पदोन्नति को भारतीय नौसेना की भावी चुनौतियों से निपटने और आधुनिक तकनीकों से लैस करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: नौसेना के शीर्ष नेतृत्व में अनुभवी रणनीतिकार के आने से हिंद महासागर और लाल सागर के व्यापारिक समुद्री रास्तों की सुरक्षा मजबूत होगी, जिससे देश में ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारतीय नौसेना के नए उपप्रमुख कौन बने हैं?\nवाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने शनिवार को भारतीय नौसेना के डिप्टी चीफ ऑफ नेवल स्टाफ (उपप्रमुख) का पदभार ग्रहण किया है।\n\n2. वाइस एडमिरल एएन प्रमोद ने किसका स्थान लिया है?\nउन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती का स्थान लिया है, जो 38 साल की सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।\n\n3. ऑपरेशन सिंदूर में वाइस एडमिरल एएन प्रमोद की क्या भूमिका थी?\nडीजीएनओ (DGNO) रहते हुए उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना की युद्ध तैयारियों और तीनों सेनाओं के समन्वय की कमान संभाली थी।\n\n4. ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा क्या था?\nपश्चिम एशिया तनाव के दौरान लाल सागर में चलाए गए इस अभियान के तहत भारतीय नौसेना ने ₹9,000 करोड़ से अधिक के सामान से लदे 18 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया था।\n\n5. वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को कौन-कौन से सैन्य सम्मान मिले हैं?\nउन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और 2025 में युद्ध सेवा मेडल (YSM) से सम्मानित किया जा चुका है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-01",
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    "भारतीय नौसेना",
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