# विदेशी नागरिकों के भारत आने और ठहरने के नियमों में बड़ा बदलाव, साइबर फ्रॉड और हवाला पर ब्लैकलिस्टिंग का शिकंजा

> भारत ने विदेशी नागरिकों के प्रवेश और देश में रहने पर पाबंदी लगाने वाले ब्लैकलिस्टिंग नियमों को कड़ा कर दिया है, जिसमें साइबर अपराध, हवाला, क्रिप्टोकरेंसी रैकेट और बाल तस्करी जैसे नए आधार जोड़े गए हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/videshi-nagarikon-ke-bharata-ane-aura-thaharane-ke-niyamon-men-bara-badalava-cyber-fraud-aura-hawala-para-blacklisting-ka-shiknja-43121 · **Language:** Hindi
**Tags:** गृह मंत्रालय, ब्लैकलिस्टिंग नियम, विदेशी नागरिक, आव्रजन कानून, साइबर अपराध, हवाला रैकेट, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन

भारत ने विदेशी नागरिकों के देश में दाखिले और यहां ठहरने पर रोक लगाने से जुड़े नियमों को पहले से कहीं ज्यादा सख्त बना दिया है। संशोधित आव्रजन और ब्लैकलिस्टिंग दिशानिर्देशों के जरिए सुरक्षा तंत्र को आधुनिक अपराधों के अनुसार ढाला गया है। अब पारंपरिक अपराधों से आगे बढ़कर साइबर अपराध, बाल शोषण, बच्चों की अवैध तस्करी, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए संचालित वित्तीय सिंडिकेट, आतंकवादी गतिविधियों को आर्थिक रसद मुहैया कराना, गैरकानूनी धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला जैसे मामलों को विदेशी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने के ठोस आधार के रूप में शामिल किया गया है। इन नए और सख्त दिशानिर्देशों को उस घटनाक्रम के बाद तैयार और प्रभावी किया गया, जब मार्च 2026 में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को सुरक्षा एजेंसियों ने हिरासत में लिया था।

## मैथ्यू वैनडाइक प्रकरण और नए प्रावधानों की जरूरत
राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने 13 मार्च 2026 को मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। यह पूरा मामला म्यांमार में सक्रिय हथियारबंद विद्रोही गुटों को ड्रोन युद्ध की तकनीक और रणनीतिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के गंभीर आरोपों से जुड़ा था। जांच के शुरुआती दौर में केंद्रीय जांच एजेंसी ने पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ कड़े आतंकवाद निरोधक कानून के तहत कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद अदालत में पेश किए गए आरोपपत्र में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 की धारा 21 और धारा 23 के तहत आरोप तय किए गए, जबकि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून यानी यूएपीए के तहत विस्तृत जांच की प्रक्रिया जारी रखी गई। इसी तरह के संवेदनशील मामलों को देखते हुए पुराने ब्लैकलिस्टिंग तंत्र को पूरी तरह से आधुनिक स्वरूप दिया गया है।

पुराने नियमों के तहत भी संगीन अपराधों, आव्रजन दिशा-निर्देशों के उल्लंघन, फर्जी पहचान पत्रों या दस्तावेजों, राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे और चुनिंदा तय गतिविधियों में लिप्त विदेशी नागरिकों को प्रतिबंधित करने की व्यवस्था मौजूद थी। लेकिन बदलते वक्त के साथ डिजिटल और संगठित अपराधों के नए तौर-तरीके सामने आए हैं। इसी वजह से नए नियमों में तकनीकी और वित्तीय अपराधों के उन सभी रूपों को स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया गया है, जिनका दूरगामी प्रभाव राष्ट्रीय अखंडता, आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद या देश विरोधी विध्वंसक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

## पुराने आदेश के मुकाबले कितना बढ़ा दायरा
विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश पर रोक लगाने या उनके रहने की अनुमति रद्द करने के लिए पिछले साल तैयार किए गए एक आदेश में कई मुख्य आधार तय किए गए थे। इनमें भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होना, जासूसी करना, आतंकवाद, आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली विध्वंसक हरकतें, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, जाली यात्रा दस्तावेज तैयार करना और नकली मुद्रा या करेंसी से जुड़े रैकेट शामिल थे। नए संशोधन के बाद इस पूरी सूची का विस्तार किया गया है।

अब इस निषेध सूची में इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किए जाने वाले साइबर अपराधों के साथ-साथ बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को भी स्पष्ट तौर पर जोड़ा गया है। इसके अलावा मानव तस्करी के व्यापक दायरे में विशेष रूप से बाल तस्करी को रेखांकित करते हुए सख्त कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया है। आर्थिक मोर्चे पर भी नियम काफी कड़े कर दिए गए हैं। आतंकवादी और विध्वंसक गतिविधियों को वित्तीय संसाधन मुहैया कराने वाले किसी भी कृत्य को बेहद गंभीर माना गया है। ऐसे मामलों में हवाला चैनलों का उपयोग करके पूंजी का प्रवाह करना या मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए संदिग्ध संपत्तियों का लेन-देन करना ब्लैकलिस्टिंग का सीधा आधार बनेगा। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले संदिग्ध और अवैध लेन-देन को करेंसी रैकेटियरिंग के दायरे में ला दिया गया है, ताकि डिजिटल वॉलेट्स के जरिए अपराध की फंडिंग करने वाले विदेशी नागरिक आसानी से भारतीय सीमा में प्रवेश न कर सकें।

## चार श्रेणियों में बंटी है पूरी व्यवस्था
संशोधित नियमों में प्रशासनिक स्पष्टता के लिए पुरानी चार श्रेणियों यानी ग्रेड ए, बी, सी और डी की व्यवस्था को बरकरार रखा गया है। प्रत्येक श्रेणी में अपराध की गंभीरता के हिसाब से कार्रवाई का पैमाना तय किया गया है।

### ग्रेड ए: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर मामले
ग्रेड ए को सबसे सख्त और शीर्ष श्रेणी का दर्जा दिया गया है। इसमें उन विदेशी नागरिकों को रखा गया है जो गंभीर आपराधिक मामलों या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्यों में दोषी पाए गए हों अथवा जिनकी संलिप्तता पूरी तरह साबित हो चुकी हो। इस वर्ग में उन व्यक्तियों को शामिल किया जाता है जिन्हें सुरक्षा एजेंसियों द्वारा देश के लिए बेहद खतरनाक माना गया है। इसके अतिरिक्त यूएपीए के तहत प्रतिबंधित घोषित किए गए आतंकी या गैरकानूनी संगठनों से संबंध रखने वाले लोग और संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय ब्लैकलिस्टिंग सूची में शामिल विदेशी नागरिक सीधे इस श्रेणी में आते हैं। धोखाधड़ी से हासिल किए गए फर्जी पासपोर्ट, जाली वीजा और यात्रा दस्तावेजों से जुड़े गंभीर अपराध भी इसी श्रेणी में दर्ज होते हैं। सरकारी और न्यायिक रिकॉर्ड में ग्रेड ए को उच्चतम प्रशासनिक प्रतिबंध माना जाता है।

### ग्रेड बी: तीन साल से कम सजा और वित्तीय अनियमितताएं
ग्रेड बी श्रेणी के अंतर्गत ऐसे विदेशी नागरिकों के मामले आते हैं जो भारतीय कानूनों के अनुसार ऐसे अपराधों में संलिप्त पाए गए हों जिनमें तीन साल से कम अवधि की सजा का प्रावधान है। हालांकि, इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत आने वाले सीधे अपराधों को इस श्रेणी के इस हिस्से से अलग रखा गया है। इसके अलावा आव्रजन नियमों, सरकारी आदेशों या औपचारिक निर्देशों का बार-बार उल्लंघन करने वाले विदेशी नागरिकों को भी इसी श्रेणी के तहत प्रतिबंधित किया जा सकता है। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले नागरिकों द्वारा किए गए वीजा उल्लंघन भी इसी श्रेणी में सूचीबद्ध हैं, लेकिन इसमें छह तय अल्पसंख्यक समुदायों के नागरिकों को कानूनी अपवाद और राहत दी गई है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून यानी फेमा के उल्लंघन, अन्य गंभीर वित्तीय हेराफेरी, अवैध विदेशी फंडिंग और कर चोरी के मामलों को भी ग्रेड बी की कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया है।

### ग्रेड सी: आव्रजन प्रक्रिया में बाधा और अधिकारियों से दुर्व्यवहार
ग्रेड सी के तहत हवाई अड्डों या सीमा जांच चौकियों पर तैनात इमिग्रेशन अधिकारियों के साथ अनुचित व्यवहार करने वालों पर शिकंजा कसा जाता है। यदि कोई विदेशी नागरिक आव्रजन अधिकारियों को धमकी देता है, उनके साथ गाली-गलौज या अभद्रता करता है, अथवा कानूनी जांच प्रक्रिया में जानबूझकर बाधा उत्पन्न करता है, तो असाधारण परिस्थितियों में उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। हालांकि, इस श्रेणी में किसी पर प्रतिबंध लगाने के नियम बेहद सख्त हैं। ऐसी कार्रवाई केवल अत्यंत दुर्लभ मामलों में, पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों की मौजूदगी में और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त की पूर्व अनुमति मिलने के बाद ही की जा सकती है।

### ग्रेड डी: मामूली उल्लंघन और नियमों में छूट
ग्रेड डी को अपेक्षाकृत सबसे कम गंभीर श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसके तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के नागरिकों द्वारा अधिकतम 90 दिनों तक का ओवरस्टे यानी वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी ठहरना या समय पर अनिवार्य पंजीकरण न कराने जैसे मामले आते हैं। इस श्रेणी में भी पूर्व निर्धारित छह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए विशेष छूट और अपवाद का नियम लागू रहता है। भारतीय कानून के तहत आने वाले कुछ अन्य छोटे और मामूली अपराध भी इसी श्रेणी में निपटाए जाते हैं। इस श्रेणी के दिशा-निर्देशों में मानवीय आधार पर यह भी पूरी तरह साफ किया गया है कि सात वर्ष तक की उम्र के विदेशी नाबालिग बच्चों को किसी भी सूरत में ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाएगा।

## कार्रवाई की मंजूरी और प्रशासनिक अधिकार
विभिन्न श्रेणियों के तहत ब्लैकलिस्टिंग की औपचारिक मंजूरी देने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर भी स्पष्ट रूप से विभाजित किए गए हैं। सबसे गंभीर यानी ग्रेड ए से जुड़े मामलों में प्रतिबंध लगाने का अंतिम फैसला गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव या उससे उच्च पद पर तैनात वरिष्ठ अधिकारी द्वारा अथवा ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त द्वारा ही लिया जा सकता है। वर्ष 2025 के नए आव्रजन कानून के प्रावधानों के अनुसार ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वह भारत में प्रवेश से प्रतिबंधित किए गए सभी विदेशी नागरिकों की एक अद्यतन यानी हमेशा अपडेट रहने वाली सूची तैयार रखे। इसके अलावा अनुचित पाबंदियों से बचने के लिए ऐसे ब्लैकलिस्टिंग मामलों की समय-समय पर उच्च स्तरीय समीक्षा करने की कानूनी व्यवस्था भी तय की गई है। मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिकों से जुड़े घटनाक्रम ने विदेशी नागरिकों की देश के भीतर गतिविधियों और उनकी वीजा शर्तों की निगरानी को लेकर भारत के सुरक्षा ढांचे को बेहद सतर्क कर दिया है।

## इसका आप पर असर
संशोधित नियमों से भारत आने वाले विदेशी आगंतुकों, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक साझेदारों और शैक्षणिक व सामाजिक आदान-प्रदान से जुड़े लोगों के लिए नियमों का अनुपालन बेहद जरूरी हो गया है।

- **पर्यटन और यात्रा पर:** भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों को अपनी वीजा शर्तों और तय ठहरने की समयसीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। अनजाने में भी 90 दिन से अधिक का ओवरस्टे या स्थानीय पंजीकरण न कराना विदेशी मेहमानों के भविष्य में भारत आने पर हमेशा के लिए रोक लगा सकता है।
- **व्यापार और वित्तीय लेन-देन पर:** विदेशी कंपनियों, सलाहकारों और निवेशकों को भारतीय वित्तीय कानूनों जैसे फेमा और कर नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करना होगा। अवैध धन ट्रांसफर, बेहिसाब फंडिंग या क्रिप्टोकरेंसी के जरिए संदिग्ध लेनदेन पाए जाने पर व्यापारिक प्रतिनिधियों को तुरंत ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
- **हवाई अड्डों और बॉर्डर चेकपोस्ट पर:** अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटरों पर अधिकारियों के साथ औपचारिक और सहयोगपूर्ण व्यवहार बनाए रखना अनिवार्य है। आव्रजन जांच में बाधा डालने या अधिकारियों से दुर्व्यवहार करने पर संबंधित यात्री के खिलाफ तुरंत कानूनी रिपोर्ट दर्ज कर भारत प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
- **अंतरराष्ट्रीय एनजीओ और संस्थानों पर:** विदेशी नागरिकों को किसी भी ऐसी गैर-अनुमति प्राप्त गतिविधि या सीमावर्ती क्षेत्रों के प्रशिक्षण से पूरी तरह दूर रहना होगा जो वीजा श्रेणी से बाहर हो। बिना वैध अनुमति के रणनीतिक या गैरकानूनी परियोजनाओं से जुड़ने पर सीधे यूएपीए और इमिग्रेशन कानून के तहत आजीवन प्रवेश प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
वैश्विक स्तर पर डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराधों, आतंकी फंडिंग और वीजा की आड़ में चलने वाली संदिग्ध गतिविधियों के बढ़ने के कारण भारत सरकार ने अपने सुरक्षा और आव्रजन नियमों को कड़ा किया है।

- **मैथ्यू वैनडाइक प्रकरण से मिली सीख:** मार्च 2026 में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों द्वारा म्यांमार के विद्रोही गुटों को ड्रोन ट्रेनिंग देने का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों को आव्रजन नियमों में बड़ी खामियां नजर आईं। इसके बाद ऐसे रणनीतिक और गैरकानूनी कृत्यों को सीधे ब्लैकलिस्टिंग दायरे में लाना जरूरी हो गया।
- **डिजिटल और वित्तीय अपराधों का प्रसार:** पुराने नियमों में पारंपरिक अपराध शामिल थे, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी सिंडिकेट, साइबर फ्रॉड, बाल शोषण और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे नए खतरे उभर रहे थे। इसलिए विदेशी अपराधियों को देश में प्रवेश से रोकने के लिए नियमों को आधुनिक वित्तीय व डिजिटल अपराधों से जोड़ा गया।
- **नया वैधानिक ढांचा:** इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025 के लागू होने के बाद आव्रजन तंत्र को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट प्रशासनिक ग्रेडिंग तय करना जरूरी था। इससे ग्रेड ए से डी तक के मामलों में जिम्मेदारी और मंजूरी के स्तर पूरी तरह तय कर दिए गए हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. गृह मंत्रालय के संशोधित नियमों में ब्लैकलिस्टिंग के कौन से नए आधार जोड़े गए हैं?
नए नियमों में साइबर अपराध, बाल दुर्व्यवहार, बाल तस्करी, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े वित्तीय रैकेट, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग को ब्लैकलिस्टिंग का सीधा आधार बनाया गया है।

### 2. मैथ्यू वैनडाइक और यूक्रेनी नागरिकों को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया था?
उन्हें एनआईए ने 13 मार्च 2026 को म्यांमार के हथियारबंद विद्रोही समूहों को कथित तौर पर ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण देने के मामले में गिरफ्तार किया था।

### 3. ब्लैकलिस्टिंग की ग्रेड ए श्रेणी में किन विदेशी नागरिकों को रखा जाता है?
इसमें गंभीर सुरक्षा व आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए लोग, सुरक्षा के लिए खतरनाक माने गए व्यक्ति, यूएपीए के तहत गैरकानूनी संगठनों के सदस्य और फर्जी पासपोर्ट धारक शामिल हैं।

### 4. क्या इमिग्रेशन अधिकारियों से दुर्व्यवहार करने पर भी ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है?
हां, ग्रेड सी के तहत इमिग्रेशन अधिकारियों को धमकी देने, दुर्व्यवहार करने या जांच में बाधा डालने वाले विदेशी नागरिकों को ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन कमिश्नर की मंजूरी के बाद ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

### 5. क्या छोटे बच्चों को भी ब्लैकलिस्टिंग नियमों के तहत प्रतिबंधित किया जा सकता है?
नहीं, नए दिशानिर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि सात साल तक की उम्र के विदेशी नाबालिग बच्चों को किसी भी हाल में ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाएगा।

### 6. ग्रेड ए के तहत ब्लैकलिस्टिंग की मंजूरी कौन सा अधिकारी दे सकता है?
ग्रेड ए में कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव या उससे उच्च स्तर के अधिकारी अथवा ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त की आधिकारिक मंजूरी अनिवार्य है।

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