विंटर एक्शन प्लान लागू होते ही दिल्ली में ताबड़तोड़ कार्रवाई, पहले ही दिन वसूला गया 68 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना राजधानी में सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए शुरू हुए एक्शन प्लान के पहले दिन नियमों की अनदेखी करने वालों पर प्रशासन ने 68.4 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई। करीब 15 हजार गाड़ियों की जांच कर 1500 से अधिक अनधिकृत वाहनों को बॉर्डर से लौटाया गया और 32 निर्माण स्थलों पर सख्त एक्शन हुआ। राष्ट्रीय राजधानी में ठंड के मौसम के साथ गहराते स्मॉग को रोकने के लिए तैयार किया गया विंटर एक्शन प्लान जमीन पर उतर चुका है, और इसकी शुरुआत जबरदस्त सख्ती के साथ हुई है। रविवार को अभियान के पहले ही दिन नियमों को ताक पर रखने वाले वाहन चालकों तथा निर्माण एजेंसियों के खिलाफ व्यापक स्तर पर चालान काटे गए। अलग-अलग मोर्चों पर की गई इस संयुक्त नाकेबंदी और जांच के दौरान कुल 68.4 लाख रुपये का जुर्माना तथा पर्यावरणीय हर्जाना थोपा गया। यातायात व्यवस्था को संभालने वाले दस्तों ने सीमाओं पर लगभग 15 हजार गाड़ियों की पड़ताल की, जिसमें से दिल्ली की सीमा में प्रवेश के तय मानकों को पूरा न करने वाले 1,539 वाहनों को बाहर से ही वापस मोड़ दिया गया। इसके साथ ही बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी पीयूसीसी के सड़कों पर फर्राटा भर रहे 566 वाहनों के चालान काटकर तगड़ी चोट दी गई। शाम 5 बजे तक का आंकड़ा और विभिन्न मदों में लगी पेनल्टी प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से साझा किए गए ब्योरे के मुताबिक, रविवार शाम 5 बजे तक चली इस सघन जांच में सबसे बड़ा हिस्सा पीयूसीसी की अनदेखी करने वालों का रहा। केवल प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र के उल्लंघन के मामले में 56.6 लाख रुपये का जुर्माना तय किया गया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय राजधानी में गैर-अनुमति वाले वाहनों के घुसने की कोशिश पर दो लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया। वहीं दूसरी तरफ, खुले में उड़ती धूल और तोड़फोड़ से जुड़े पर्यावरण मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले निर्माण स्थलों पर 9.8 लाख रुपये का हर्जाना लगाया गया। दिल्ली के बाहर पंजीकृत गैर-बीएस-6 मानकों वाली गाड़ियों की अवैध आवाजाही को रोकने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के अमले ने संयुक्त मोर्चा संभालते हुए कुल 14,930 वाहनों की विस्तृत जांच की। चौकियों पर रोकी गई इन गाड़ियों में से लगभग 10.31 फीसदी वाहन ऐसे पाए गए जो राजधानी के भीतर प्रवेश की शर्तों को पूरा नहीं कर रहे थे और उन्हें फौरन दिल्ली की सीमाओं से बैरंग वापस लौटा दिया गया। इस पूरी मशक्कत में 127 गाड़ियों के विधिवत चालान काटे गए, जबकि गंभीर उल्लंघन में शामिल 62 वाहनों को मौके पर ही जब्त कर लिया गया। प्रवेश पाबंदियों को तोड़ने के जुर्म में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के दस्तों ने कुल दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। सरहदों पर पहरा और वापस मोड़े गए वाहनों का वर्गीकरण राजधानी के प्रवेश द्वारों पर तैनात पुलिस और परिवहन दस्तों ने विभिन्न श्रेणियों के वाहनों को रोककर उनकी पड़ताल की। वापस भेजी गई गाड़ियों की सूची पर नजर डालें तो इसमें 140 हल्के मोटर वाहन यानी एलएमवी, 54 हल्के वाणिज्यिक वाहन यानी एलसीवी, माल ढोने वाले 95 मध्यम और भारी कमर्शियल ट्रक तथा 34 यात्री बसें शामिल थीं। पहरेदारी सिर्फ चार पहिया या बड़े ट्रकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि 1,423 दोपहिया, तिपहिया और अन्य श्रेणी के वाहनों की भी सघन चेकिंग की गई। इस जांच के दायरे में आए 789 छोटे वाहनों को प्रवेश न देकर पीछे मोड़ दिया गया और 38 वाहनों को कानून के तहत जब्त किया गया। पर्यावरण विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, उन वाहनों पर भी पैनी नजर रखी गई जिनका कोई काम या गंतव्य दिल्ली के भीतर नहीं था, बल्कि वे केवल राजधानी की सड़कों को बाईपास की तरह इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे 7,279 वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 314 गाड़ियों को राजधानी में घुसने से रोककर दूसरे वैकल्पिक रास्तों की ओर लौटाया गया। हालांकि इस विशेष श्रेणी में किसी भी गाड़ी का चालान नहीं काटा गया। इसके उलट, शहर में जरूरी सामग्री की आपूर्ति बनाए रखने और पर्यावरण अनुकूल आवागमन को बढ़ावा देने के लिए सीएनजी, इलेक्ट्रिक गाड़ियों तथा अनिवार्य सेवाओं में लगी गाड़ियों को पूरी राहत दी गई थी। अधिकारियों ने नियमों पर खरे उतरने वाले कुल 740 ऐसे वाहनों के दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद उन्हें बेरोकटोक दिल्ली में प्रवेश करने की मंजूरी दी। पीयूसीसी की अनदेखी पर 56.6 लाख का सबसे बड़ा प्रहार प्रदूषण के स्तर को काबू करने के लिए वाहनों से निकलने वाले धुएं की जांच को सबसे अहम माना गया है, और इसी कारण बिना वैध पीयूसीसी के चल रही गाड़ियों को पकड़ने के लिए अलग से विशेष अभियान छेड़ा गया। इस पूरे दिन के दौरान कुल 566 चालान बनाए गए, जिनसे 56.6 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि बतौर जुर्माना वसूली के दायरे में आई। इसमें दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का योगदान सबसे ज्यादा रहा, जिसने अकेले 493 चालान काटकर 49.3 लाख रुपये का दंड लगाया। वहीं परिवहन विभाग के सचल दस्तों ने 73 वाहनों पर शिकंजा कसते हुए 7.3 लाख रुपये की पेनल्टी वसूल की। 300 कंस्ट्रक्शन साइट्स का मुआयना और 32 पर दंडात्मक कार्रवाई सर्दियों के दिनों में हवा में तैरने वाले धूल कणों को रोकने के लिए निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। रविवार को उड़नदस्तों ने शहर के 300 अलग-अलग निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण किया। इस व्यापक जांच में 32 कार्यस्थलों पर धूल नियंत्रण के तय दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन होता पाया गया। पड़ताल के दायरे में 500 वर्ग मीटर से बड़े कुल 91 बड़े प्रोजेक्ट्स शामिल थे, जिनमें से 16 साइट्स पर नियम टूटे हुए मिले। इन बड़े डिफॉल्टरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने दो साइट्स पर काम पूरी तरह बंद करने का आदेश जारी किया, चार को कारण बताओ नोटिस थमाया और कुल चार लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा ठोका। दूसरी ओर, 500 वर्ग मीटर से छोटे 209 निर्माण स्थलों की जांच करने पर 17 जगह खामियां और लापरवाही उजागर हुईं। छोटे प्रोजेक्ट्स पर नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्रशासन ने और भी कड़ा रुख अपनाया, जहां 15 साइट्स पर काम रोकने के निर्देश दिए गए, 15 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए तथा 5.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस तरह पूरे दिन में कुल 300 निर्माण स्थलों की पड़ताल के बाद 17 प्रोजेक्ट्स को काम रोकने के आदेश, 19 साइट्स को नोटिस और सामूहिक रूप से 9.8 लाख रुपये का हर्जाना लगाया गया। प्रशासन का कड़ा रुख और आगामी दिनों के लिए तय बंदिशें प्रदूषण नियंत्रण अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जांच दस्तों की मुस्तैदी का ब्योरा साझा किया। उन्होंने लिखा, स्वच्छ हवा की दिशा में प्रयासों के लिए सामूहिक भागीदारी जरूरी है। उन्होंने वाहन मालिकों को अपने पीयूसी को हमेशा अपडेट रखने, प्रवेश की शर्तों को मानने तथा निर्माण एजेंसियों को धूल नियंत्रण मानकों का हर हाल में पालन करने की सख्त ताकीद की। राजधानी में विंटर एक्शन प्लान के तहत लागू की गई विभिन्न पाबंदियां एक नवंबर से शुरू होकर 28 फरवरी तक अलग-अलग समय-सीमाओं के लिए प्रभावी रहेंगी। दिल्ली के बाहर पंजीकृत और बीएस-6 उत्सर्जन मानकों से नीचे वाली सभी गाड़ियों के शहर में दाखिल होने पर 31 जनवरी तक पूरी तरह रोक लगा दी गई है। धूल उड़ाने वाली किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ और खुले में होने वाले निर्माण कार्यों पर भी सख्त पाबंदी रहेगी, हालांकि आवश्यक सार्वजनिक बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं को इससे छूट दी गई है। इसके अतिरिक्त, कुछ अनिवार्य छूटों को अलग रखते हुए 10 दिसंबर से 20 जनवरी की अवधि में निर्माण व विध्वंस के तमाम कार्यों पर मुकम्मल पाबंदी रहेगी। निजी वाहनों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग की दरें 28 फरवरी तक दोगुनी कर दी गई हैं। प्रदूषण के असर और सड़कों पर भीड़ कम करने के उद्देश्य से सभी सरकारी तथा निजी दफ्तरों को 1 नवंबर से 31 जनवरी तक अपने 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम कराने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। इसका आप पर असर दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों, वाहन मालिकों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के लिए नियमों में भारी सख्ती लागू हो चुकी है। • भारत में: दिल्ली से होकर गुजरने वाले गैर-बीएस-6 वाहनों और बाहरी राज्यों के कमर्शियल ट्रकों को राजधानी के बाईपास मार्गों का उपयोग करना होगा। यदि आपके पास वैध पीयूसीसी नहीं है, तो दिल्ली प्रवेश करते ही 10,000 रुपये तक के भारी चालान का सामना करना पड़ सकता है। • दिल्ली में: राजधानी के भीतर निजी गाड़ियों से चलने वालों को 28 फरवरी तक अधिकृत पार्किंग स्थलों पर दोगुना पार्किंग शुल्क देना होगा। इसके अलावा सरकारी व निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को 31 जनवरी तक वर्क फ्रॉम होम पर भेजा जा रहा है। • मकान व फ्लैट निर्माण: दिल्ली में निजी निर्माण या तोड़फोड़ पर कड़े प्रतिबंध रहेंगे और 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक काम पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। नियमों की अनदेखी पर काम बंद कराने के साथ लाखों रुपये का पर्यावरणीय हर्जाना भरना पड़ेगा। • वाहन स्वामियों के लिए: अपनी गाड़ी का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र तुरंत रिन्यू करा लें, क्योंकि शहर भर में जांच टीमें सक्रिय हैं। सीएनजी, इलेक्ट्रिक और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही छूट दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के महीनों में दिल्ली-एनसीआर की हवा में भारी गिरावट को रोकने और धुंध के संकट से निपटने के लिए यह कड़ा अभियान शुरू किया गया है। गिरते तापमान और हवा की मंद गति के कारण गाड़ियों का धुआं और निर्माण स्थलों की धूल वातावरण में जम जाती है। • सीधे कारण: दिल्ली की हवा में हानिकारक सूक्ष्म कणों की मात्रा को तुरंत कम करने के लिए विंटर एक्शन प्लान लागू किया गया है। वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएं और अनियंत्रित निर्माण कार्यों की धूल को वायु प्रदूषण का मुख्य तात्कालिक कारक माना गया है। • सहायक परिस्थितियां: जाड़े के मौसम में हवा का बहाव धीमा होने से प्रदूषणकारी तत्व ऊपरी वायुमंडल में नहीं जा पाते और जमीन के करीब घनी चादर बना लेते हैं। इसी वजह से गैर-बीएस-6 मानकों वाली पुरानी गाड़ियों और वैध पीयूसीसी के बिना चलने वाले वाहनों पर नकेल कसी गई है। • प्रशासनिक तैयारी: हर वर्ष सर्दियों में दमघोंटू हवा के संकट को देखते हुए इस बार 1 नवंबर से 28 फरवरी तक की विस्तृत रूपरेखा तय की गई है। आने वाले हफ्तों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ने पर निर्माण कार्यों पर पूर्ण पाबंदी और दफ्तरों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम जैसे कड़े कदम पहले से लागू किए गए हैं। सवाल-जवाब 1. विंटर एक्शन प्लान के पहले दिन कुल कितना जुर्माना लगाया गया? प्रशासन ने पहले दिन शाम 5 बजे तक पीयूसीसी उल्लंघन, प्रवेश पाबंदी और निर्माण मानकों की अनदेखी पर कुल 68.4 लाख रुपये का जुर्माना और हर्जाना लगाया। 2. बिना वैध पीयूसीसी के पकड़े जाने पर कितनी राशि का जुर्माना हुआ? सड़कों पर बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के दौड़ रहे 566 वाहनों पर कुल 56.6 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। 3. दिल्ली की सीमाओं से कितने वाहनों को वापस भेजा गया? जांचे गए 14,930 वाहनों में से 1,539 वाहनों को प्रवेश नियमों का उल्लंघन करने के कारण दिल्ली की सीमाओं से वापस लौटा दिया गया। 4. किन वाहनों को दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध से छूट मिली है? सीएनजी चालित गाड़ियों, इलेक्ट्रिक वाहनों और आपातकालीन तथा आवश्यक सेवाओं में लगे वाहनों को इन पाबंदियों से छूट दी गई है। 5. निर्माण स्थलों पर क्या कार्रवाई की गई? कुल 300 निर्माण स्थलों के निरीक्षण में 32 पर नियम टूटे पाए गए, जिसके बाद 17 साइट्स पर काम रोकने के आदेश, 19 को नोटिस और 9.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। 6. दिल्ली में पार्किंग शुल्क कब तक दोगुना रहेगा? निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर 28 फरवरी तक पार्किंग दरें दोगुनी रहेंगी। 7. कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम का क्या नियम लागू किया गया है? सरकारी और निजी दोनों कार्यालयों को 1 नवंबर से 31 जनवरी तक अपने 50 प्रतिशत स्टाफ को घर से काम कराने का निर्देश दिया गया है। https://trendkia.com/national/vintara-ekshana-plana-lagu-hote-hi-delhi-men-tabaratora-karravai-pahale-hi-dina-vasula-gaya-68-lakha-rupaye-se-jyada-ka-jurmana-54702 TrendKia — Har trend, sabse pehle.