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  "title": "विपक्ष की नकली संसद पर सुधांशु त्रिवेदी का प्रहार, बोले विश्व बैंक के आंकड़े दिखा रहे गरीबी उन्मूलन की हकीकत",
  "summary": "भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्षी गठबंधन के सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम को दिखावा बताते हुए विश्व बैंक के गरीबी में भारी गिरावट और आर्थिक समानता के आंकड़ों का हवाला दिया।",
  "content": "नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों द्वारा आयोजित प्रतीकात्मक संसदीय सत्र की तीखी आलोचना की है। पार्टी प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विश्व बैंक की ओर से जारी हालिया अध्ययन के निष्कर्षों को सामने रखते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्था के ताजा आंकड़े विपक्ष की राजनीतिक नौटंकी की कलई खोलने के लिए काफी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश में वंचित वर्ग के कल्याण के ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं, तब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सड़क पर बनावटी कार्यवाही चलाना केवल ध्यान भटकाने का प्रयास है।\n\nविपक्षी आयोजन और चुनाव आयोग पर आरोप\nविपक्षी दलों के गठबंधन ने मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर सवाल खड़े किए थे। इस सिलसिले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रतीकात्मक जन अदालत या सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का किरदार निभा रहे एक कलाकार की टिप्पणी पर भी राजनीतिक गलियारों में काफी विवाद पैदा हुआ। भाजपा की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि खराब करने की सोची-समझी रणनीति करार दिया गया।\n\nविश्व बैंक की रिपोर्ट में गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट\nसुधांशु त्रिवेदी ने विश्व बैंक की इंडिया पावर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ के आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौर में वंचित तबकों के जीवन में क्रांतिकारी सुधार हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्था के वर्ष 2025 के अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि 2011 से 2023 के बीच भारत ने बहुआयामी गरीबी के स्तर में तेज कमी दर्ज की है। एक दशक पहले देश की 27 प्रतिशत से अधिक आबादी अत्यंत कठिन अभावों में जीवन यापन कर रही थी, जो अब गिरकर महज 2.6 प्रतिशत पर आ गई है।\n\nइसके अलावा अक्टूबर 2026 की गरीबी और समानता रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए भाजपा सांसद ने जानकारी दी कि 4.20 डॉलर प्रतिदिन की निचली मध्यम आय वाली गरीबी रेखा के पैमाने पर भी बड़ा सुधार दर्ज हुआ है। 2011 में इस दायरे में आने वाली जनसंख्या का अनुपात 57.7 प्रतिशत दर्ज था, जो वर्ष 2023 के आकलन में सिमटकर मात्र 16.1 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट बदलाव जमीनी स्तर पर नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को साबित करता है।\n\nगिनी इंडेक्स में भारत की बेहतर रैंकिंग\nआर्थिक विषमता के मोर्चे पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए भाजपा नेता ने अगस्त 2025 में विश्व बैंक द्वारा जारी किए गए गिनी इंडेक्स का ब्योरा रखा। इस सूचकांक में भारत का स्कोर 22.5 दर्ज किया गया, जिसके आधार पर भारत विश्व भर में सबसे ज्यादा आर्थिक समानता वाले मुल्कों की सूची में चौथे पायदान पर पहुंच गया। इस पैमाने के अनुसार, जी7 और जी20 के सदस्य देशों की तुलना में भारत के भीतर आर्थिक असमानता का स्तर सबसे कम पाया गया था।\n\nराजनीतिक सोच और दृष्टिकोण का टकराव\nप्रेस वार्ता के दौरान सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के पुराने बयानों को याद दिलाते हुए विपक्षी रणनीति पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगस्त 2013 में राहुल गांधी ने गरीबी को केवल एक मानसिक अवस्था बताया था, जबकि पूर्ववर्ती शासन के समय डॉ. मनमोहन सिंह ने टिप्पणी की थी कि पैसे पेड़ों पर नहीं उगते। भाजपा सांसद ने रेखांकित किया कि तत्कालीन यूपीए सरकार के ढुलमुल नजरिए की वजह से देश के 27.6 प्रतिशत लोग अभावों में फंसे रहे, जबकि मौजूदा एनडीए सरकार ने वास्तविक नीतियां लागू कर उन्हें इस चक्रव्यूह से बाहर निकाला है। उन्होंने निष्कर्ष दिया कि एक तरफ सरकार वंचितों के उत्थान में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमा सत्ता से बेदखल होने के बाद अव्यवस्था फैलाने का रास्ता चुन रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nविश्व बैंक के ये आंकड़े देश की सामाजिक सुरक्षा नीतियों के जमीनी असर और राजनीतिक विमर्श की दिशा को स्पष्ट करते हैं।\n\n• भारत में: बहुआयामी अभावों में आई भारी कमी यह दर्शाती है कि बुनियादी नागरिक सुविधाएं व्यापक आबादी तक पहुंच रही हैं। इससे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और स्वरोजगार कार्यक्रमों की प्रभावशीलता का स्वतंत्र सत्यापन मिलता है।\n• आर्थिक विषमता के स्तर पर: निम्न मध्यम आय सीमा वाले पैमाने में 57.7 प्रतिशत से 16.1 प्रतिशत की गिरावट आम परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार की पुष्टि करती है। वैश्विक मंचों पर बेहतर गिनी स्कोर विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच देश की साख को मजबूती देता है।\n• मतदाता और नागरिक विमर्श: चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर जारी विवाद के बीच प्रशासनिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर जनता की नजर बनी रहेगी। नागरिक राजनीतिक दलों के प्रदर्शन का आकलन नारों के बजाय वास्तविक आर्थिक आंकड़ों के आधार पर कर सकेंगे।\n• नीतिगत योजनाओं की निरंतरता: अत्यधिक गरीबी दर के 2.6 प्रतिशत पर आ जाने से आने वाले बजटों में लक्षित सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा ढांचे को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकता है। इससे गरीब परिवारों को स्थायी आजीविका से जोड़ने के प्रयासों को गति मिलने की संभावना है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक टकराव विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ किए गए प्रतीकात्मक विरोध और भाजपा द्वारा पेश किए गए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आंकड़ों के टकराव से उपजा है।\n\n• तात्कालिक कारण: विपक्षी गठबंधन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव प्रक्रिया में कथित कमियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग का मंचन किया था। भाजपा ने इस आयोजन को बनावटी ड्रामा बताते हुए उसी दिन विश्व बैंक के आंकड़े जारी कर पलटवार किया।\n• आर्थिक आंकड़ों की पृष्ठभूमि: विश्व बैंक ने अपने विभिन्न आकलनों में 2011 से 2023 के दौरान भारत में अत्यधिक गरीबी में तीव्र गिरावट दर्ज की थी। सत्ताधारी दल ने इन निष्कर्षों को अपनी विकास नीतियों और सुशासन के प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया।\n• वैचारिक मतभेद: पूर्ववर्ती सरकारों की कल्याणकारी रणनीतियों और वर्तमान सरकार की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण नीतियों के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक बहस इस तीखी बयानबाजी का मुख्य आधार बनी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भाजपा ने विपक्षी दलों के किस कार्यक्रम को दिखावा बताया?\nभाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन द्वारा आयोजित किए गए सार्वजनिक महाभियोग कार्यक्रम को दिखावा करार दिया।\n\n2. विश्व बैंक की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में अत्यधिक गरीबी की क्या स्थिति है?\nरिपोर्ट के अनुसार भारत में अत्यधिक गरीबी 2011 के 27 प्रतिशत से अधिक से घटकर 2023 में 2.6 प्रतिशत पर आ गई है।\n\n3. 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा पर क्या आंकड़े सामने आए हैं?\nविश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक इस रेखा से नीचे रहने वाली आबादी 2011 के 57.7 प्रतिशत से घटकर 2023 में 16.1 प्रतिशत रह गई है।\n\n4. गिनी इंडेक्स में भारत को क्या स्कोर और स्थान मिला था?\nअगस्त 2025 के गिनी इंडेक्स में भारत का स्कोर 22.5 रहा, जिससे वह दुनिया में आर्थिक समानता के मामले में चौथे स्थान पर रहा।",
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