विश्व हाथी दिवस पर जामनगर से बैंकॉक तक बड़ा ऐलान, अनंत अंबानी के वनतारा ने जयपुर से पूर्वोत्तर तक छेड़ी संरक्षण की मुहिम विश्व हाथी दिवस 2026 के मौके पर गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा ने देश भर में हाथियों की सुरक्षा, अत्याधुनिक इलाज और महावतों के प्रशिक्षण के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा की है। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर 12 अगस्त 2026 को हाथियों के संरक्षण और उनके कल्याण को लेकर एक बड़ी वैश्विक पहल की घोषणा की गई है। गुजरात के जामनगर में स्थित विश्व प्रसिद्ध एलिफेंट वेलफेयर सेंटर वनतारा ने भारत के विभिन्न राज्यों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाथियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए विस्तृत खाका पेश किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी द्वारा स्थापित और रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस केंद्र में वर्तमान में 260 से अधिक एशियन हाथियों की देखभाल की जा रही है। संस्था का मुख्य उद्देश्य हाथियों को एक सुरक्षित, तनावमुक्त और प्राकृतिक वातावरण प्रदान करना है। वनतारा की इस व्यापक योजना में राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित प्रसिद्ध हाथी गांव के कायाकल्प से लेकर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित होने वाले आगामी ग्लोबल समिट तक की रणनीतिक योजनाएं शामिल हैं। इस पूरे अभियान का केंद्र बिंदु हाथियों की चिकित्सा, महावतों का कौशल विकास और बच्चों के बीच वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है। जामनगर की इस हरित भूमि से शुरू हुई यह पहल अब एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। गौरी के रेस्क्यू से हुई थी वनतारा के महाभियान की शुरुआत वनतारा की स्थापना और इसके पीछे की सोच एक भावुक घटना से जुड़ी हुई है। इस पूरे संरक्षण केंद्र की नींव गौरी नाम की एक बीमार और पीड़ित हथिनी के रेस्क्यू के साथ पड़ी थी। गौरी वह पहली हथिनी थी जिसे अनंत अंबानी ने अत्यंत दयनीय हालत से बचाकर नए जीवन की राह दिखाई थी। गौरी की देखभाल और उसके स्वास्थ्य में आए सकारात्मक सुधार ने ही आगे चलकर एक विशाल वन्यजीव आश्रय स्थल के निर्माण की प्रेरणा दी। इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए अनंत अंबानी ने कहा कि हाथियों का उनके व्यक्तिगत जीवन और वनतारा की पूरी यात्रा में एक बेहद खास स्थान रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र में लाया गया हर हाथी अपने साथ दुखों और कठिनाइयों की एक अलग कहानी लेकर आता है। हर नया रेस्क्यू पूरी टीम को यह याद दिलाता है कि इन बेजुबान और विशालकाय जीवों के प्रति समाज और इंसानों की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है। अनंत अंबानी के अनुसार, गौरी के बचाव से शुरू हुआ यह छोटा सा कदम आज हाथियों के समग्र कल्याण की एक मजबूत और स्थायी प्रतिबद्धता में बदल चुका है। संस्था अब केवल जामनगर तक सीमित नहीं है, बल्कि देश और दुनिया भर के केयरगिवर्स, पशु चिकित्सकों और वन विभागों के साथ अपनी वैज्ञानिक तकनीकों और अनुभवों को साझा कर रही है। उन्होंने विश्व हाथी दिवस पर सभी से इन शानदार जीवों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। जयपुर के हाथी गांव में बनेगा अत्याधुनिक अस्पताल और न्यूट्रिशन सेंटर राजस्थान सरकार ने इस खास मौके पर वनतारा के साथ मिलकर एक ऐतिहासिक साझेदारी की घोषणा की है। राजस्थान के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री संजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि जयपुर स्थित प्रसिद्ध हाथी गांव में हाथियों की देखभाल के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार उन्नत किया जाएगा। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य वहां रहने वाले हाथियों के जीवन की गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार लाना है। जयपुर में तैयार होने वाले इस नए प्रोजेक्ट के तहत एक एडवांस एलिफेंट ट्रीटमेंट और केयर फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। इस केंद्र में एक अत्याधुनिक पशु अस्पताल, उन्नत न्यूट्रिशन सेंटर और हाथियों के शारीरिक उपचार के लिए हाइड्रोथेरेपी फैसिलिटी बनाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, अपनी सेवा पूरी कर चुके बुजुर्ग और बीमार हाथियों के लिए एक विशेष रिटायरमेंट एंड केयर सेंटर का निर्माण भी किया जाएगा जहां उन्हें जीवन के अंतिम पड़ाव में विश्राम और बेहतर इलाज मिल सके। यह परियोजना राजस्थान फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के क्षेत्रीय अनुभव और वनतारा की आधुनिक पशु चिकित्सा विशेषज्ञता का एक अनूठा संगम होगी। दोनों संस्थाएं मिलकर हाथियों की उम्र, उनकी शारीरिक स्थिति और व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से कस्टमाइज्ड केयर प्लान तैयार करेंगी। इससे जयपुर के हाथी गांव को एक नया स्वरूप मिलेगा और हाथियों को एक सुरक्षित, आरामदायक और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण प्राप्त हो सकेगा। 8 राज्यों में आउटरीच प्रोग्राम: 182 हाथियों और 242 महावतों को मिला सीधा लाभ वनतारा ने हाल ही में अपने नेशनल एलिफेंट वेलफेयर आउटरीच प्रोग्राम का एक बड़ा चरण सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह आउटरीच अभियान देश के आठ अलग-अलग क्षेत्रों में संचालित किया गया, जिसमें पूर्वोत्तर भारत के असम, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्य शामिल हैं। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दूरस्थ क्षेत्रों में भी संबंधित राज्य वन विभागों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू किया गया। इस विस्तृत कार्यक्रम का मुख्य फोकस जमीनी स्तर पर काम करने वाले फील्ड स्टाफ के अनुभवों का आदान-प्रदान करना और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाना था। इस पहल के माध्यम से कुल 182 हाथियों के स्वास्थ्य की गहन जांच की गई और उनके कल्याण के उपाय किए गए। साथ ही, हाथियों की देखरेख में दिन-रात लगे 242 महावतों को आधुनिक तकनीकों, व्यवहार प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण सत्रों के दौरान प्रिवेंटिव वेटरनरी केयर, हाथियों के साथ मानवीय व्यवहार, आपातकालीन फर्स्ट ऐड और हाथियों में मस्ट स्थिति के प्रभावी प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। वनतारा की टीमों ने स्थानीय महावतों को आवश्यक वेटरनरी और वेलफेयर किट्स के साथ-साथ हाथियों के लिए उच्च गुणवत्ता वाला न्यूट्रिशनल सपोर्ट भी मुहैया कराया। इस पहल का दीर्घकालिक उद्देश्य देश भर के एलिफेंट केयर प्रोफेशनल्स के बीच एक मजबूत नेटवर्किंग और नॉलेज-शेयरिंग प्लेटफॉर्म तैयार करना है। बच्चों के लिए शुरू हुआ 'माई फ्रेंड लीलावती' कैंपेन वनतारा ने बच्चों में वन्यजीवों और विशेषकर हाथियों के प्रति दया की भावना जगाने के लिए सोशल मीडिया पर 'माई फ्रेंड लीलावती' नाम से एक विशेष डिजिटल अभियान शुरू किया है। यह कैंपेन लीलावती नाम की एक हथिनी के दर्दनाक अतीत और उसके बाद वनतारा में मिले नए जीवन की सच्ची कहानी पर आधारित है। लीलावती को बचपन में ही उसकी मां से अलग कर दिया गया था और उसने अपने जीवन के कई साल एक सर्कस के तंग माहौल में बिताए। सर्कस के टेंट में लगी एक भीषण आग के दौरान लीलावती बुरी तरह झुलस गई थी, जिससे उसकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी। वनतारा में आने के बाद डॉक्टरों और केयरगिवर्स की निरंतर सेवा से लीलावती पूरी तरह ठीक हो चुकी है और आज वह केंद्र के सबसे चहेते हाथियों में से एक है। उसकी यह कहानी बच्चों को यह सिखाती है कि हर जीव सम्मान, प्रेम और करुणा का हकदार है। इस अभियान के अंतर्गत बच्चों के लिए एक स्पेशल थीम्ड पजल प्रतियोगिता आयोजित की गई है। भाग लेने वाले बच्चों को पजल हल करने के साथ-साथ लीलावती के लिए अपना एक प्यारा सा संदेश भी लिखकर भेजना होगा। प्रतियोगिता में विजेता रहने वाले बच्चों को वनतारा की ओर से लीलावती की थीम पर आधारित विशेष गिफ्ट्स और मर्चेंडाइज दिए जाएंगे। इसका आप पर असर भारत में: हाथियों के बेहतर इलाज, अत्याधुनिक अस्पतालों और महावतों के प्रशिक्षण से देश भर में मानव-हाथी संघर्ष कम होगा और वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी। जयपुर (राजस्थान) में: जयपुर के हाथी गांव में रहने वाले हाथियों को अब आधुनिक अस्पताल, हाइड्रोथेरेपी और बुजुर्ग हाथियों के लिए रिटायरमेंट सेंटर की सुविधाएं मिलेंगी, जिससे स्थानीय पर्यटन और पशु कल्याण में सुधार होगा। सवाल-जवाब 1. वनतारा में इस समय कितने हाथी मौजूद हैं? गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा केंद्र में वर्तमान में 260 से अधिक एशियन हाथी मौजूद हैं, जिनकी नियमित देखभाल और चिकित्सा की जाती है। 2. वनतारा की शुरुआत किस हथिनी के रेस्क्यू से हुई थी? वनतारा का सफर 'गौरी' नाम की एक बीमार और पीड़ित हथिनी के रेस्क्यू के साथ शुरू हुआ था, जिसे अनंत अंबानी ने सबसे पहले रेस्क्यू किया था। 3. जयपुर के हाथी गांव के लिए क्या बड़ी घोषणा की गई है? राजस्थान सरकार और वनतारा मिलकर जयपुर के हाथी गांव में एक एडवांस अस्पताल, न्यूट्रिशन सेंटर, हाइड्रोथेरेपी फैसिलिटी और बुजुर्ग हाथियों के लिए रिटायरमेंट सेंटर बनाएंगे। 4. नेशनल एलिफेंट वेलफेयर आउटरीच प्रोग्राम का लाभ कितने हाथियों और महावतों को मिला? इस आउटरीच प्रोग्राम के तहत असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और अंडमान समेत 8 लोकेशंस पर 182 हाथियों के स्वास्थ्य की जांच की गई और 242 महावतों को प्रशिक्षित किया गया। 5. 'माई फ्रेंड लीलावती' कैंपेन क्या है? यह बच्चों के लिए शुरू किया गया एक सोशल मीडिया अभियान है, जो सर्कस की आग में झुलसी लीलावती हथिनी की कहानी के माध्यम से बच्चों में करुणा और दया की भावना जगाता है। प्रेरणा और सबक वनतारा की सफलता से सीख: • छोटे कदम से बड़ा बदलाव: अनंत अंबानी द्वारा गौरी नाम की एक हथिनी के रेस्क्यू से शुरू हुई छोटी पहल आज 260 से ज्यादा हाथियों का दुनिया का सबसे बड़ा वेलफेयर सेंटर बन गई। • करुणा और सेवा का भाव: बेजुबान जीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना किसी भी सामाजिक बदलाव का आधार होती है। • ज्ञान और संसाधनों की साझेदारी: अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीकों को अन्य राज्यों के साथ साझा कर हाथियों और महावतों का बड़े पैमाने पर सशक्तिकरण संभव हुआ। • नई पीढ़ी में जागरूकता: 'माई फ्रेंड लीलावती' जैसे अभियानों के जरिए बच्चों को बचपन से ही जीवों के प्रति दयालु बनने की प्रेरणा मिलती है। https://trendkia.com/national/vishva-hathi-divasa-para-jamnagar-se-bangkok-bara-ailana-anant-ambani-ke-vantara-ne-jaipur-se-purvottara-taka-chheri-snrakshana-ki-15895 TrendKia — Har trend, sabse pehle.