वोटर लिस्ट ड्राफ्ट से हटा नाम तो बेझिझक भरें फॉर्म 6, चुनाव आयोग ने कानूनी कार्रवाई के डर पर दी सफाई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के ड्राफ्ट से नाम गायब होने पर दोबारा फॉर्म 6 भरने वाले मतदाताओं पर धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं होगी। भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि अन्यत्र नाम दर्ज न होने की शर्त पर नागरिक निसंकोच आवेदन कर सकते हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन प्रक्रिया के दौरान तैयार ड्राफ्ट से नाम गायब होने को लेकर नागरिकों में बना संशय अब पूरी तरह दूर हो गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने स्थिति को साफ करते हुए कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम नई ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं, वे बिना किसी कानूनी भय के दोबारा फॉर्म 6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इस कदम से उन लाखों नागरिकों को बड़ी राहत मिली है, जो आवेदन पत्र में घोषणा देखकर कानूनी अड़चनों की आशंका से परेशान थे। कानूनी कार्रवाई और धारा 31 के डर पर आयोग का रुख मतदाताओं के बीच यह चिंता फैल गई थी कि यदि वे पहले से वोटर रहे हैं और दोबारा फॉर्म 6 जमा करते हैं, तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के अंतर्गत उन पर झूठी घोषणा करने का आरोप लग सकता है। इस धारा के तहत झूठी जानकारी देने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान होता है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि केवल इस आधार पर किसी भी पूर्व मतदाता के खिलाफ धारा 31 के तहत कोई कदम नहीं उठाया जाएगा कि उसने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन या उसके बाद फॉर्म 6 दाखिल किया है। दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायिक फैसले का आधार इस पूरे मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के ऐतिहासिक आदेश का भी प्रमुख उल्लेख किया गया है। नीलोत्पल दत्ता बनाम भारत निर्वाचन आयोग मामले में अदालत ने पहले ही साफ कर दिया था कि पुराने मतदाताओं द्वारा नाम छूटने पर फॉर्म 6 भरने को अपराध मानना पूरी तरह निराधार है। कोर्ट के इसी रुख पर मुहर लगाते हुए आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर इस व्यवस्था को पारदर्शी बना दिया है, ताकि किसी भी वास्तविक नागरिक को मताधिकार से वंचित न रहना पड़े। आवेदन के लिए अनिवार्य शर्त का पालन जरूरी यद्यपि आयोग ने पुराने मतदाताओं को फॉर्म 6 भरने की पूरी छूट प्रदान की है, लेकिन इसके साथ एक अनिवार्य वैधानिक शर्त जुड़ी हुई है। नागरिक का नाम देश के किसी अन्य विधानसभा या संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं होना चाहिए। मतदाता द्वारा दी जाने वाली जानकारी और घोषणा कानून के पूर्णतः अनुकूल होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति का नाम केवल उसी क्षेत्र की सूची से हटा है और अन्यत्र दर्ज नहीं है, तो वह पूरी तरह वैध रूप से इस फॉर्म का उपयोग कर सकता है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रचार के निर्देश आयोग ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों यानी सीईओ को निर्देश दिए हैं कि वे इस नियम का स्थानीय भाषाओं में व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें। चुनावी तंत्र को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है कि नागरिकों के बीच किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे। प्रशासन का लक्ष्य है कि जिनका नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आया है, वे समय रहते अपना फॉर्म 6 जमा कराकर आने वाले चुनावों के लिए अपनी मतदाता पहचान सुनिश्चित कर सकें। इसका आप पर असर मतदाता सूची के ड्राफ्ट से नाम कटने वाले नागरिकों को कानूनी पेचीदगियों के बिना दोबारा नाम जुड़वाने का स्पष्ट रास्ता मिल गया है। • भारत में: देश भर के नागरिक ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने पर बिना पुलिस कार्रवाई या मुकदमे के डर के तुरंत फॉर्म 6 भरकर अपना नाम जुड़वा सकते हैं। इससे आगामी चुनावों में लाखों मतदाताओं का मताधिकार सुरक्षित रहेगा और उन्हें जटिल अदालती प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। • पुराने मतदाताओं के लिए: पूर्व में वोटर रह चुके लोग अब बिना किसी कानूनी झिझक के फॉर्म 6 की घोषणा पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। उन्हें सिर्फ यह ध्यान रखना होगा कि उनका नाम किसी दूसरी जगह की मतदाता सूची में दर्ज न हो। • राज्यों में चुनावी तंत्र: सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय भाषा में प्रचार होने से नागरिकों को अपने अधिकारों की सही जानकारी मिलेगी। क्षेत्रीय चुनाव कार्यालयों में अब बेवजह के कानूनी नोटिस या आपत्तियां दर्ज नहीं की जाएंगी। • मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया: ड्राफ्ट में हुई त्रुटियों को सुधारने के लिए तय समय सीमा के भीतर आवेदन करना सुगम हो गया है। नागरिक अपने नजदीकी निर्वाचन केंद्र या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से तुरंत आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के बाद कई पूर्व मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गए थे, जिसके बाद दोबारा आवेदन को लेकर कानूनी कार्रवाई का डर बन गया था। • ड्राफ्ट सूची में नाम विलोपन: चुनाव आयोग द्वारा चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल से हट गए थे। इसके कारण प्रभावित नागरिकों को अपना मताधिकार दोबारा प्राप्त करने के लिए नए सिरे से आवेदन करना आवश्यक हो गया। • धारा 31 का कानूनी संशय: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 झूठी घोषणा करने पर सजा का प्रावधान करती है, जिससे फॉर्म 6 भरने वाले पुराने वोटर कानूनी कार्रवाई से घबरा रहे थे। फॉर्म में पहली बार नाम जोड़ने से जुड़ी भाषा के कारण लोगों को डर था कि इसे झूठा दावा माना जा सकता है। • दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला: नीलोत्पल दत्ता बनाम चुनाव आयोग मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने इस डर को पूरी तरह निराधार ठहराते हुए राहत दी थी। आयोग ने उसी न्यायिक आदेश को आधार बनाकर देश भर के अधिकारियों के लिए स्पष्ट परिपत्र जारी किया ताकि नागरिकों का भ्रम दूर हो सके। सवाल-जवाब 1. क्या ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने पर दोबारा फॉर्म 6 भरना अपराध है? नहीं, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पुराने मतदाताओं द्वारा फॉर्म 6 भरना कोई अपराध या झूठी घोषणा नहीं है। 2. क्या दोबारा फॉर्म 6 जमा करने पर धारा 31 के तहत जेल हो सकती है? नहीं, आयोग और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशानुसार केवल फॉर्म 6 भरने के आधार पर धारा 31 के तहत कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। 3. फॉर्म 6 भरने के लिए मुख्य शर्त क्या है? मुख्य शर्त यह है कि आवेदक का नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज नहीं होना चाहिए। 4. इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का क्या फैसला रहा है? दिल्ली हाईकोर्ट ने नीलोत्पल दत्ता मामले में साफ किया था कि पुराने वोटर द्वारा फॉर्म 6 भरने पर कानूनी कार्रवाई का डर पूरी तरह बेबुनियाद है। 5. चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को क्या आदेश दिया है? आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को स्थानीय भाषाओं में इस स्पष्टीकरण का व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया है। https://trendkia.com/national/votara-lista-draphta-se-hata-nama-to-bejhijhaka-bharen-form-6-election-commission-ne-kanuni-karravai-ke-dara-para-di-saphai-55932 TrendKia — Har trend, sabse pehle.