# वोटर लिस्ट से बाहर हुए नागरिकों की होगी दोबारा जांच, 20 राज्यों में घर-घर जाएंगे बीएलओ

> स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पूरा होने के बाद छूटे पात्र मतदाताओं को वापस जोड़ने के लिए निर्वाचन आयोग ने बीएलओ को पुरानी और नई वोटर सूचियों का मिलान करने और घर-घर सत्यापन करने का आदेश दिया है.

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/votara-lista-se-bahara-hue-nagarikon-ki-hogi-dobara-jancha-20-rajyon-men-ghara-ghara-jaenge-blo-41711 · **Language:** Hindi
**Tags:** चुनाव आयोग, वोटर लिस्ट, बीएलओ, एसआईआर, फॉर्म 6, मतदाता सूची, मुख्य निर्वाचन आयुक्त

विशेष सघन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया पूरी कर चुके राज्यों में अब पुरानी और नई मतदाता सूचियों के व्यापक मिलान की तैयारी शुरू हो चुकी है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पुनरीक्षण से पूर्व वाली सूची और वर्तमान सूची की तुलना करके उन सभी नागरिकों का रिकॉर्ड अलग से तैयार किया जाए जिनके नाम हालिया फेरबदल में कट गए हैं। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वैध और पात्र भारतीय नागरिक तकनीकी या लिपिकीय भूल के चलते अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए। हाल के दिनों में एसआईआर को लेकर विभिन्न स्तरों पर तीखी बहसें और आपत्तियां सामने आई थीं, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर यह विस्तृत सुधारात्मक कदम उठाया गया है। आयोग के भीतर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्य संचालन तौर-तरीकों पर निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की असहमति की चर्चाएं भी उठी थीं, हालांकि आयोग ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी निर्णय तीनों निर्वाचन आयुक्तों की सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं।

## प्री-एसआईआर और वर्तमान सूचियों की आमने-सामने तुलना
इस विशेष अभियान के अंतर्गत बूथ स्तर अधिकारी यानी बीएलओ सबसे पहले अपने-अपने कार्यक्षेत्र की पूर्ववर्ती सूची और हालिया संशोधित सूची का बारीकी से परीक्षण करेंगे। इस गहन मिलान से उन नागरिकों का एक अलग डेटाबेस तैयार होगा जिनका नाम पुरानी सूची में बाकायदा दर्ज था लेकिन नई सूची में नदारद है। बीएलओ को इस तुलनात्मक सूची में प्रत्येक संबंधित व्यक्ति की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट रूप से अंकित करना होगा। यदि जांच के दौरान किसी योग्य व्यक्ति का नाम छूटा हुआ पाया जाता है तो तुरंत फॉर्म 6 भरवाकर उसका ब्योरा दर्ज किया जाएगा। आयोग ने इस पूरी कवायद के लिए समयबद्ध रूपरेखा तैयार की है, जिसमें प्रत्येक बीएलओ को हर सप्ताह कम से कम 20 से 25 मतदाताओं के पते पर पहुंचने का लक्ष्य सौंपा गया है ताकि पूरा अभियान लगभग एक महीने की अवधि में सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

## मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित श्रेणियों की दोबारा पड़ताल
मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कई बार लोगों को मृत, अन्यत्र स्थानांतरित या लंबे समय से अनुपस्थित दर्ज कर दिया जाता है। इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं श्रेणियों में दर्ज प्रविष्टियों की जमीनी पड़ताल पर केंद्रित रहेगा। बीएलओ सीधे संबंधित घरों में जाकर यह देखेंगे कि कहीं किसी जीवित या उसी पते पर रह रहे पात्र व्यक्ति को भूलवश मृत या स्थानांतरित मानकर सूची से तो नहीं हटा दिया गया। यदि कोई मतदाता अपने पुराने पते पर ही निवास करता हुआ मिलता है और वह मतदान के सभी नियमों को पूरा करता है, तो मौके पर ही फॉर्म 6 की औपचारिकता पूरी करवाई जाएगी। इस अभियान की प्राथमिकता सूची में वे मामले मुख्य केंद्र बिंदु नहीं हैं जो ट्रिब्यूनल के समक्ष संदिग्ध मतदाता के रूप में पहले से विचाराधीन हैं। प्रशासनिक ध्यान केवल उन वास्तविक नागरिकों पर है जो लिपिकीय चूक के कारण बाहर हुए हैं।

## युवा मतदाताओं का पंजीकरण और नए नामों का समावेश
घर-घर जाकर सत्यापन करने के साथ-साथ अधिकारियों को अपने क्षेत्र के उन युवाओं की पहचान करने की जिम्मेदारी भी दी गई है जो हाल ही में मतदान की पात्रता आयु में आए हैं। पहली बार मतदाता बनने के योग्य पाए जाने वाले ऐसे युवक-युवतियों से सीधे फॉर्म 6 भरवाया जाएगा ताकि चुनावी प्रक्रिया में युवाओं की शत-प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा अन्य ऐसे पात्र नागरिक भी, जिनका नाम किसी भी कारण से अब तक नहीं जुड़ सका था, इस अभियान के तहत कवर किए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के लिए बूथ स्तर पर विशेष सहायता शिविरों का आयोजन भी किया जाएगा, जहां नागरिक मौके पर आकर आवश्यक जानकारी और दस्तावेज जमा कर सकेंगे।

## राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझेदारी
प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आयोग ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी इससे जोड़ने का फैसला किया है। बीएलओ द्वारा तैयार की जाने वाली तुलनात्मक और स्थिति-आधारित सूचियां मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए के साथ साझा की जाएंगी। जब यह जमीनी पड़ताल और सत्यापन अभियान पूरा हो जाएगा, तब प्रत्येक बूथ की अंतिम संकलित सूची भी दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम से राजनीतिक दलों को अपने स्तर पर यह देखने का अवसर मिलेगा कि कोई पात्र नागरिक छूट तो नहीं गया है, और वे भी योग्य मतदाताओं का नाम जुड़वाने में सहयोग कर सकेंगे।

## गरीब बस्तियों, रैन बसेरों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष शिविर
जिला निर्वाचन अधिकारियों को समाज के सबसे कमजोर तबकों तक सीधे पहुंचने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि शहरों और कस्बों के रैन बसेरों, रात्रि आश्रय गृहों और श्रमिक बस्तियों में विशेष पंजीकरण शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों का मकसद उन गरीब और बेघर लोगों को मतदाता सूची से जोड़ना है जिनके पास स्थायी आवास न होने के कारण अक्सर दस्तावेज संबंधी जटिलताएं आ जाती हैं। इसके साथ ही सामान्य बूथ स्तर के शिविर भी जारी रहेंगे ताकि स्थानीय लोग सहजता से नाम जोड़ने के लिए अपने आवेदन जमा करा सकें।

## फॉर्म 6 के नियम और तार्किक विसंगतियों के नोटिस पर कार्रवाई
निर्वाचन आयोग ने प्रपत्रों के उपयोग को लेकर भी नियमों की स्थिति साफ कर दी है। आयोग के अनुसार, घोषणा पत्र के साथ फॉर्म 6 का प्रयोग एसआईआर के चरण के दौरान किया जाना निर्धारित है। एक बार जब किसी क्षेत्र में एसआईआर का चरण पूर्ण हो जाता है, तो उसके बाद सामान्य मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन पंजीकरण नियम 1960 के तहत निर्धारित संबंधित प्रपत्रों का ही इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं जिन नागरिकों को अनमैप्ड श्रेणी या तार्किक विसंगतियों के आधार पर नोटिस मिले हैं, उनके समाधान के लिए बीएलओ स्वयं उनके पते पर जाकर जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज एकत्र करेंगे। इन दस्तावेजों को विभागीय पोर्टल ईसीआईनेट पर अपलोड किया जाएगा, जिसके आधार पर संबंधित ईआरओ या एईआरओ औपचारिक निर्णय लेंगे।

## 20 राज्यों में सीईओ और डीईओ स्तर पर सीधी निगरानी
यह व्यापक अभियान उन 20 राज्यों में लागू किया जा रहा है जहां एसआईआर का कार्य पहले ही संपन्न हो चुका है। इस संदर्भ में निर्वाचन आयोग ने सभी 20 राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत दिशा-निर्देश साझा किए हैं। तय व्यवस्था के तहत मुख्य निर्वाचन अधिकारी संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को आवश्यक आदेश पारित करेंगे, जो आगे चलकर बीएलओ स्तर तक इसे लागू कराएंगे। यह अभियान किसी औपचारिकता तक सीमित न रहे, इसके लिए आयोग ने स्पष्ट कहा है कि सीईओ और डीईओ स्तर पर इसकी प्रगति की निरंतर और नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि हर एक वास्तविक पात्र नागरिक का नाम सूची में दर्ज हो सके।

## इसका आप पर असर
अगर आपका नाम हालिया मतदाता पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट से कट गया है, तो यह विशेष अभियान आपको बिना किसी परेशानी के दोबारा अपना वोटिंग अधिकार वापस दिलाने का सीधा मौका देगा।

- **घर बैठे सत्यापन:** यदि आपका नाम पुरानी लिस्ट में था लेकिन नई में छूट गया है, तो बीएलओ खुद आपके पते पर आकर स्थिति की पुष्टि करेंगे। इसके लिए आपको सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- **फॉर्म 6 भरने की सुविधा:** पते पर सत्यापन पूरा होने के बाद अधिकारी मौके पर ही नाम दोबारा जोड़ने के लिए आवश्यक फॉर्म भरवाएंगे। इससे मतदाता सूची में आपका नाम आगामी चुनावों से पहले विधिवत पुनः जुड़ जाएगा।
- **गलत नाम कटने से सुरक्षा:** किसी जीवित या स्थानीय निवासी को गलती से मृत, अनुपस्थित या स्थानांतरित मान लिए जाने की भूल अब सुधारी जा सकेगी। बीएलओ की सीधी रिपोर्ट से गलत तरीके से हटाए गए नाम दोबारा बहाल होंगे।
- **नए मतदाताओं के लिए अवसर:** पहली बार मतदान की पात्रता हासिल करने वाले युवा घर आए बीएलओ या नजदीकी बूथ कैंप में अपना नाम दर्ज करवा सकेंगे। इसके लिए युवाओं को जरूरी आयु और पते के प्रमाण पत्र साथ रखने होंगे।
- **रैन बसेरों और मजदूरों के लिए राहत:** बेघर नागरिकों और मजदूर वर्ग के लोगों के लिए शेल्टर होम और बस्तियों में विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों के जरिए बिना स्थायी पते की जटिलताओं के भी पात्र लोग अपना नाम जुड़वा सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण के बाद बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम कटने की शिकायतों और प्रशासनिक विवादों के चलते निर्वाचन आयोग को यह सुधारात्मक अभियान शुरू करना पड़ा है।

- **एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठा विवाद:** देश भर में एसआईआर के क्रियान्वयन और कई पात्र मतदाताओं के नाम हटने को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। आयोग के भीतर कार्यशैली पर उठी असहमति की खबरों के बाद पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय लिया गया।
- **दस्तावेजी और लिपिकीय गलतियां:** बड़े पैमाने पर सूची संशोधन के दौरान कई जीवित और स्थानीय मतदाताओं को गलती से मृत, स्थानांतरित या अनुपस्थित दर्ज कर दिया गया था। इन गलतियों को सुधारने के लिए पुरानी और नई सूचियों का आमने-सामने मिलान जरूरी हो गया था।
- **संवैधानिक मताधिकार की सुरक्षा:** निर्वाचन आयोग की मुख्य संवैधानिक जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वास्तविक और योग्य नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। इसी जवाबदेही को पूरा करने के लिए 20 राज्यों में जमीनी सत्यापन का आदेश दिया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. निर्वाचन आयोग ने वोटर लिस्ट के मिलान का फैसला क्यों लिया है?
एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान करने और गलती से कटे नामों को दोबारा जोड़ने के लिए यह फैसला लिया गया है।

### 2. यह विशेष सत्यापन अभियान किन राज्यों में लागू किया जा रहा है?
यह अभियान उन 20 राज्यों में संचालित किया जा रहा है जहां स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर का काम पूरा हो चुका है।

### 3. अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम लिस्ट से कट गया है तो क्या प्रक्रिया होगी?
बीएलओ संबंधित मतदाता के घर जाकर स्थिति की जांच करेंगे और पात्र पाए जाने पर फॉर्म 6 भरवाकर नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कराएंगे।

### 4. बीएलओ को कितने समय में यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है?
प्रत्येक बीएलओ को प्रति सप्ताह 20 से 25 मतदाताओं को कवर करते हुए लगभग एक महीने में यह अभियान पूरा करने का निर्देश है।

### 5. क्या पहली बार वोट देने वाले युवाओं को भी इस अभियान में शामिल किया जाएगा?
हां, घर-घर सत्यापन और बूथ लेवल शिविरों के जरिए पहली बार वोट डालने के योग्य युवाओं से भी फॉर्म 6 भरवाया जाएगा।

### 6. बेघर और गरीब लोगों के पंजीकरण के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
जिला निर्वाचन अधिकारियों को शहरों के रात्रि आश्रय गृहों, रैन बसेरों और मजदूर बस्तियों में विशेष पंजीकरण कैंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

### 7. क्या राजनीतिक दलों को भी सत्यापन की जानकारी दी जाएगी?
हां, बीएलओ द्वारा तैयार तुलनात्मक सूची और अंतिम बूथवार लिस्ट मान्यता प्राप्त दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ साझा की जाएगी।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._