# यौन उत्पीड़न मामले में सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, तरुण तेजपाल ने गोवा अदालत में किया सरेंडर

> सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम राहत से इनकार किए जाने के बाद तहलका के संस्थापक तरुण तेजपाल ने गोवा की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया है। 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा 10 साल की सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/yauna-utpirana-mamale-men-supreme-court-se-nahin-mili-rahata-tarun-tejpal-ne-goa-adalata-men-kiya-sarendara-32141 · **Language:** Hindi
**Tags:** तरुण तेजपाल, गोवा अदालत, सुप्रीम कोर्ट, यौन उत्पीड़न मामला, तहलका

तहलका पत्रिका के संस्थापक तरुण तेजपाल ने सोमवार को गोवा की एक अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। देश की सर्वोच्च अदालत से कोई राहत नहीं मिलने के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल की जेल की सजा के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर तुरंत कोई रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके बाद उनके पास सरेंडर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

## सर्वोच्च अदालत से झटका और सरेंडर
बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। जब शीर्ष अदालत ने राहत याचिका खारिज कर दी, तो तरुण तेजपाल ने गोवा की सत्र अदालत में पहुंचकर सरेंडर किया। अदालत ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें सीधे कारागार भेजने का निर्देश जारी किया।

## 2013 का घटनाक्रम और आरोप
यह पूरा विवाद साल 2013 का है, जब गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित 'थिंक फेस्ट' कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल पर अपनी एक कनिष्ठ सहकर्मी के साथ लिफ्ट में यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का आरोप लगा था। इस मामले की जांच लंबे समय तक चली और निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक इस पर व्यापक कानूनी बहस हुई।

## 10 साल की सजा और आगे का रास्ता
बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के ऐलान के बाद तेजपाल ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए खुद को निर्दोष कहा था। अब जेल जाने के बाद उनके वकील सुप्रीम कोर्ट में इस 10 साल की सजा को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका पर कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

## इसका आप पर असर
यह फैसला भारत में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और कानूनी जवाबदेही से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण पेश करता है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** हाई-प्रोफाइल मामलों में कोर्ट का यह सख्त रुख देश में महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न रोधी कानूनों के क्रियान्वयन को मजबूती देता है। इसके तहत संस्थागत पदों पर बैठे वरिष्ठ लोगों के खिलाफ भी निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का स्पष्ट संदेश जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सरेंडर बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 साल की सजा और सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस पर तत्काल रोक लगाने से इनकार करने के कारण हुआ है।

- **सर्वोच्च अदालत का रुख:** सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल की अंतरिम राहत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनके पास हिरासत से बचने का कोई कानूनी रास्ता नहीं बचा।
- **2013 का मामला:** गोवा के पांच सितारा होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कनिष्ठ सहकर्मी द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें 10 साल की सजा सुनाई थी।

## सवाल-जवाब

### 1. तरुण तेजपाल ने किस अदालत में सरेंडर किया?
तरुण तेजपाल ने गोवा की सत्र अदालत में आत्मसमर्पण किया।

### 2. सुप्रीम कोर्ट ने तरुण तेजपाल की याचिका पर क्या फैसला सुनाया?
सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल की सजा के खिलाफ अंतरिम राहत या सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

### 3. तरुण तेजपाल को कितने साल की सजा सुनाई गई है?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल की सजा सुनाई है।

### 4. यह यौन उत्पीड़न का मामला किस वर्ष का है?
यह मामला साल 2013 का है, जो गोवा के एक पांच सितारा होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ था।

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