{
  "type": "article",
  "title": "मनुस्मृति विवाद पर योगी का राहुल को जवाब, बिहार के अस्पतालों और महाराष्ट्र में ऑटो चालकों की हड़ताल पर बड़ी बातें",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में राहुल गांधी के मनुस्मृति वाले बयान पर पलटवार किया है। इसके अलावा बिहार के सरकारी अस्पतालों में दलाली और महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों की मराठी सीखने की मांग को लेकर हड़ताल पर चर्चा की गई है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उस संवेदनशील विषय पर खुलकर अपनी बात रखी, जिस पर अक्सर राजनीति तो बहुत गरमाती है, लेकिन नेता खुलकर बोलने से कतराते हैं। योगी ने राहुल गांधी के लोकसभा चुनाव क्षेत्र रायबरेली में मनुस्मृति को लेकर तीखा बयान दिया। कुछ समय पहले पुणे में राहुल ने महिलाओं से मनुस्मृति की गुलामी वाली मानसिकता की जंजीरें तोड़ने का आह्वान किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए योगी ने कहा कि मनुस्मृति पर निष्पक्ष चर्चा होनी चाहिए और इसके नकारात्मक पहलुओं के साथ-साथ सकारात्मक पक्षों की भी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। योगी ने आरोप लगाया कि राहुल भारत की पारंपरिक पारिवारिक व्यवस्था को कमजोर करना चाहते हैं, इसलिए वह इस प्राचीन ग्रंथ की गलत व्याख्या कर रहे हैं।\n\n पुणे में दिए गए अपने भाषण में राहुल गांधी ने कहा था कि मनुस्मृति के अनुसार बचपन में महिला को पिता के संरक्षण में, जवानी में पति के अधीन और पति के निधन के बाद बेटों के नियंत्रण में रहना चाहिए तथा स्त्री को कभी भी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए। राहुल ने इन बातों को बेहद शर्मनाक करार दिया था। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मनुस्मृति में समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए कर्तव्यों का निर्धारण किया गया है। हो सकता है कि इनमें से कुछ बातें आधुनिक युग में प्रासंगिक न लगें, लेकिन यह भी अकाट्य सत्य है कि स्त्री के बिना परिवार की कल्पना नहीं की जा सकती। योगी ने सवाल किया कि क्या मां के बिना किसी बेटे का अस्तित्व हो सकता है, क्या पिता का वजूद बेटी के बिना संभव है और क्या पत्नी के बिना पति की कोई पहचान हो सकती है।\n\n विशेषज्ञों के अनुसार, राहुल गांधी ने महिलाओं को लेकर जो टिप्पणियां कीं, वे मुख्य रूप से मनुस्मृति के नौवें अध्याय पर आधारित हैं। इस अध्याय के एक श्लोक में महिलाओं की सुरक्षा का उल्लेख है और कहा गया है कि उन्हें पुरुषों के मार्गदर्शन में रखना चाहिए। इसी अध्याय के एक अन्य श्लोक में यह बात है कि महिला जीवन के विभिन्न चरणों में पिता, पति और पुत्रों की रक्षा में रहती है। हालांकि, इन श्लोकों की मूल ग्रंथ में उपस्थिति को लेकर भी विद्वानों के बीच विवाद है। कुछ इतिहासकारों और विद्वानों का यह भी मानना है कि ब्रिटिश काल में एक अंग्रेज विद्वान ने कुछ अंश इसमें जोड़ दिए थे। इसके बावजूद, यदि किसी प्राचीन ग्रंथ में कोई अनुचित बात कही गई है, तो उसकी आलोचना या विरोध करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए।\n\n लेकिन दूसरी ओर, राहुल गांधी ने केवल कुछ चुनिंदा अंशों को ही अपने भाषण का आधार बनाया। वास्तविकता यह है कि मनुस्मृति में कुल बारह अध्याय और 2664 श्लोक हैं। इसमें संपूर्ण न्यायशास्त्र का विस्तार से वर्णन है, राजनीतिक व्यवस्था की रूपरेखा है तथा राजा और प्रजा दोनों के कर्तव्यों का विस्तृत विवरण दिया गया है। महिलाओं और वर्ण व्यवस्था से जुड़े कुछ संदर्भ आज के समय के अनुकूल नहीं हैं, और इसी आधार पर योगी ने यह रेखांकित किया कि केवल आधा सच पेश करके और चुनिंदा हिस्सों को सामने लाकर मनुस्मृति को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना अनुचित है। यह बात काफी हद तक सही प्रतीत होती है क्योंकि कई राजनीतिक नेता इसी ग्रंथ का नाम लेकर बयानबाजी करते हैं और इसे महिलाओं तथा दलितों के विरुद्ध एक ब्राह्मणवादी ग्रंथ बताकर समाज के इन वर्गों को भड़काने का प्रयास करते हैं। इसके विपरीत, सनातन परंपरा में यह स्थापित है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है।\n\n वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हमें आधुनिक युग की वास्तविकताओं पर बात करनी चाहिए। इस विषय पर बोलते हुए बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद महिलाओं के नाम पर करीब तीन करोड़ पक्के मकान पंजीकृत हुए, महिलाओं के लिए 16 करोड़ शौचालयों का निर्माण हुआ, महिलाओं के वास्ते उज्ज्वला गैस योजना की शुरुआत की गई और लगभग 32 करोड़ से ज्यादा जन-धन बैंक खाते खोले गए ताकि सरकारी सहायता का सारा पैसा सीधे डिजिटल माध्यम से उनके खातों में स्थानांतरित हो सके। यदि ये सरकारी आंकड़े सही हैं, तो कम से कम यह आरोप नहीं लगाया जा सकता कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं को उनके अधिकार नहीं मिले। संसद में पारित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक भी इसी दूरगामी सोच का प्रत्यक्ष परिणाम है।\n\n \n\nबिहार के सरकारी अस्पतालों में बढ़ता दलाल राज और बदहाली\n दूसरी तरफ बिहार से स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार जब सीतामढ़ी के एक सरकारी अस्पताल के औचक निरीक्षण पर पहुंचे, तो वहां मौजूद मरीजों के तीमारदारों ने डॉक्टरों के समक्ष ही पोल खोल दी। उन्होंने मंत्री को विस्तार से बताया कि कैसे इन अस्पतालों में बिचौलियों और दलालों का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बरगलाकर निजी क्लीनिकों में रेफर करवा देते हैं। इसके बाद वहां इलाज के नाम पर भारी-भरकम वसूली की जाती है और इस लूट में दलालों का हिस्सा पहले से तय होता है। जब मंत्री सीतामढ़ी के सदर अस्पताल के वार्डों में गए, तो वहां न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही नर्सिंग स्टाफ, और जिनकी ड्यूटी थी वे सभी नदारद मिले।\n\n अस्पताल परिसर में न तो पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध थीं और न ही साफ-सफाई का कोई प्रबंध था। पचास बिस्तरों वाले इस अस्पताल में कुल 22 सरकारी डॉक्टर नियुक्त हैं, लेकिन अधिकांश डॉक्टर अपनी ड्यूटी से लगातार गायब रहते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए मंत्री निशांत कुमार ने एक गंभीर मरीज को एम्बुलेंस के जरिए मुजफ्फरपुर भेजने के निर्देश दिए और मरीज के परिजनों को अपना व्यक्तिगत मोबाइल नंबर देते हुए भरोसा दिलाया कि यदि उन्हें कोई भी परेशानी आए, तो वे सीधे उनके नंबर पर संपर्क करें। बिहार में चिकित्सा सेवाओं की यह दयनीय स्थिति कोई नई बात नहीं है। केंद्रीय सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में दम तोड़ने वाले प्रत्येक तीन व्यक्तियों में से दो की मृत्यु गलत उपचार या चिकित्सा सुविधाओं के पूर्ण अभाव के कारण होती है। इस प्रकार हर साल लगभग पांच लाख लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं।\n\n भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक यानी CAG की 2024 की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ था कि सरकारी धन से बड़े-बड़े अस्पताल भवन तो खड़े कर दिए गए और वहां एक्स-रे तथा अल्ट्रासाउंड जैसी महंगी मशीनें भी स्थापित कर दी गईं, लेकिन प्रशिक्षित तकनीशियनों के अभाव में वे सभी उपकरण धूल फांक रहे हैं और बेकार हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती तो की जाती है, लेकिन चिकित्सक वहां रहना या अपनी सेवाएं देना पसंद नहीं करते। ऐसे तमाम मामले सामने आए हैं जहां डॉक्टर जिला मुख्यालय या शहरों में अपनी निजी प्रैक्टिस करते हैं और केवल कागजों में ग्रामीण अस्पतालों की हाजिरी पूरी करते हैं। अब बिहार सरकार ने अपनी स्वास्थ्य योजना के तहत राज्य का कुल स्वास्थ्य बजट बढ़ाकर 21 हजार 270 करोड़ रुपये कर दिया है। चालू वर्ष के अंत तक राज्य में 3200 नए स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, लेकिन जब तक जमीनी स्तर पर डॉक्टर और तकनीशियन उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक यह सारी योजनाएं कागजी साबित होंगी।\n\n \n\nमहाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों का मराठी भाषा विवाद और हड़ताल\n इधर महाराष्ट्र में भाषा को लेकर एक नया विवाद तूल पकड़ रहा है जहां ऑटो और टैक्सी चालकों ने अपनी तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल पर बैठे गैर-मराठी ऑटो और टैक्सी चालकों का मुख्य तर्क है कि सड़कों पर उनके मराठी ज्ञान की औचक और ऑन द स्पॉट परीक्षा ली जा रही है, जिससे उनके सामने गंभीर परेशानियां खड़ी हो गई हैं। इस प्रक्रिया के कारण जगह-जगह नोकझोंक, विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। जो उत्तर भारतीय नागरिक पिछले चालीस वर्षों से मुंबई या महाराष्ट्र के अन्य प्रमुख शहरों में अपनी आजीविका चलाने के लिए ऑटो और टैक्सी चला रहे हैं, उनका कहना है कि इस ढलती उम्र में नई भाषा को सीखना और उसमें पारंगत होना बेहद कठिन कार्य है।\n\n कुछ चालकों का यह भी कहना है कि यदि वे पूरा दिन मराठी सीखने के लिए कोचिंग कक्षाओं में समय बिताएंगे, तो वे ऑटो कब चलाएंगे और अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे कर पाएंगे। उनकी मुख्य मांग है कि सरकार उन्हें भाषा सीखने के लिए कम से कम तीन से छह महीने का उचित समय दे। हालांकि दूसरी तरफ यह भी एक तथ्य है कि जो लोग महाराष्ट्र की भूमि पर तीन-तीन पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं और लगातार रोजगार पा रहे हैं, यदि उन्हें इसके बाद भी स्थानीय मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान नहीं है, तो यह अपने आप में आश्चर्य का विषय है। राज्य सरकार ने भाषा सीखने के लिए पहले ही साठ दिनों की मोहलत दी थी और इसके लिए निःशुल्क कोचिंग कक्षाओं का भी पूरा प्रबंध किया था।\n\n राज्य में पंजीकृत कुल 1 लाख 85 हजार ऑटो चालकों में से 1 लाख 65 हजार ऑटो और टैक्सी चालकों ने सफलतापूर्वक मराठी भाषा का ज्ञान प्राप्त कर लिया है। ऐसे में जो मात्र 15 प्रतिशत चालक शेष बचे हैं, यदि उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए कुछ और अतिरिक्त समय की आवश्यकता है, तो सरकार की ओर से उन्हें और समय दिए जाने की बात कही जा रही है। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि जब समाधान का रास्ता खुला है, तो गतिरोध क्यों बनाया जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में चालकों की आजीविका और भावनाओं का भी पूरा सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं और उन्हें पराया नहीं समझा जाना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम और विभिन्न मुद्दों पर अधिक जानकारी के लिए दर्शक आज की बात का नियमित प्रसारण देख सकते हैं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: महिलाओं के कल्याणकारी आंकड़ों और स्वास्थ्य नीतियों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हुई है।\n• बिहार और महाराष्ट्र में: स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और परिवहन हड़कंप के कारण दैनिक आवागमन में असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के किस बयान पर आपत्ति जताई?\nयोगी ने पुणे में राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति को गुलामी की मानसिकता से जोड़ने वाले बयान पर पलटवार किया।\n\n2. मनुस्मृति में कुल कितने अध्याय और श्लोक हैं?\nमनुस्मृति में कुल बारह अध्याय और 2,664 श्लोक हैं।\n\n3. बिहार के किस अस्पताल का स्वास्थ्य मंत्री ने औचक निरीक्षण किया?\nबिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सीतामढ़ी के सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।\n\n4. सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार बिहार की स्वास्थ्य स्थिति कैसी है?\nबिहार में हर तीन में से दो मौतें गलत इलाज या इलाज की कमी से होती हैं और सालाना करीब पांच लाख लोग दम तोड़ते हैं।\n\n5. महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों ने क्यों हड़ताल की?\nगैर-मराठी ऑटो चालकों का ऑन द स्पॉट मराठी भाषा का टेस्ट लिए जाने और समय की मांग को लेकर हड़ताल शुरू हुई।",
  "url": "https://trendkia.com/national/yogi-counters-rahul-on-manusmriti-bihar-hospital-racket-and-maharashtra-auto-strike-21871",
  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-25",
  "tags": [
    "योगी आदित्यनाथ",
    "राहुल गांधी",
    "मनुस्मृति विवाद",
    "बिहार स्वास्थ्य व्यवस्था",
    "महाराष्ट्र ऑटो हड़ताल",
    "सुधांशु त्रिवेदी",
    "निशांत कुमार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}