अदीस अबाबा में अफ़्रीकी देशों के भारतीय राजदूतों के सम्मेलन की एस. जयशंकर ने की अध्यक्षता एस. जयशंकर ने इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में अफ़्रीका में तैनात भारतीय मिशन प्रमुखों के सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए ग्लोबल साउथ एकजुटता और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में अफ़्रीकी महाद्वीप में तैनात भारत के मिशन प्रमुखों का एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की। इस दौरान भारत और अफ़्रीकी देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से मंथन हुआ। ग्लोबल साउथ एकजुटता और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर बैठक के दौरान दोनों पक्षों के साझा हितों, बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और विकास की साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के रास्तों की समीक्षा की गई। भारत और अफ़्रीका के संबंध ऐतिहासिक विश्वास और ग्लोबल साउथ की साझी आकांक्षाओं पर टिके हैं, जिन्हें आधुनिक समय की चुनौतियों के अनुरूप विस्तार दिया जा रहा है। एस. जयशंकर ने क्या कहा सम्मेलन के बाद एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि उन्होंने अदीस अबाबा में अफ़्रीका स्थित भारतीय मिशन प्रमुखों की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि भारत और अफ़्रीका के रिश्ते ग्लोबल साउथ एकजुटता, रणनीतिक स्वायत्तता, बहुध्रुवीयता और विकास की साझा आकांक्षाओं पर टिके गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि द्विपक्षीय साझेदारी को नई दिशा देने के लिए बैठक में गहन चर्चा हुई। अदीस अबाबा की कूटनीतिक अहमियत अदीस अबाबा लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कूटनीति, विकास और जलवायु वार्ताओं का एक बड़ा केंद्र रहा है। इस शहर में अफ़्रीकी संघ का मुख्यालय स्थित है और यहाँ अदीस अबाबा विश्वविद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ वैश्विक विकास वित्तपोषण और शांति पहलों पर लगातार संवाद होता रहा है। इस पृष्ठभूमि में भारत द्वारा अपने सभी अफ़्रीकी राजदूतों को यहाँ एकत्र कर रणनीति तैयार करना महाद्वीप के प्रति नई प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। जनता की प्रतिक्रिया इस कूटनीतिक पहल पर ऑनलाइन मंचों पर लोगों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। कई नागरिकों ने भारत की बहुध्रुवीय विदेश नीति की सराहना की, जबकि कुछ प्रयोक्ताओं ने ज़ांज़ीबार में खुले परिसर की तरह अफ़्रीका के अन्य हिस्सों में भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया। इसका आप पर असर यह बैठक अफ़्रीका में भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को गति देने के साथ विकास साझेदारी को मजबूत करती है। • भारत में: यह रणनीतिक संवाद भारतीय शिक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापारिक संस्थानों के लिए अफ़्रीकी महाद्वीप में नए विस्तार के रास्ते खोलता है। इससे वैश्विक बहुध्रुवीय व्यवस्था में भारत की मध्यस्थ और सहयोगी भूमिका को मजबूती मिलती है। • अदीस अबाबा और अफ़्रीकी देशों में: स्थानीय स्तर पर भारत के सहयोग से क्षमता निर्माण, बुनियादी ढांचे और उच्च शिक्षा के संयुक्त प्रोजेक्ट्स में तेजी आएगी। इससे ज़ांज़ीबार जैसे सफल शैक्षणिक मॉडलों को अन्य अफ़्रीकी क्षेत्रों में दोहराने की संभावनाएँ बढ़ेंगी। • वैश्विक मंच पर: ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जा सकेगा। यह पहल बहुपक्षीय संस्थाओं में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की संयुक्त आवाज को धार देगी। • प्रवासी समुदाय और विद्यार्थियों के लिए: अफ़्रीका में रहने वाले भारतीय नागरिकों और वहाँ अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए राजनयिक समन्वय और कांसुलर सहायता अधिक सुलभ होगी। दोनों पक्षों के बीच जन-जन के संपर्क को प्रोत्साहन मिलेगा। सवाल-जवाब 1. एस. जयशंकर ने किस सम्मेलन की अध्यक्षता की? उन्होंने अफ़्रीका में तैनात भारतीय मिशन प्रमुखों के सम्मेलन की अध्यक्षता की। 2. यह बैठक कहाँ आयोजित की गई? यह बैठक इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में आयोजित की गई। 3. सम्मेलन में किन प्रमुख सिद्धांतों पर चर्चा हुई? बैठक में ग्लोबल साउथ एकजुटता, रणनीतिक स्वायत्तता, बहुध्रुवीयता और साझा विकास प्राथमिकताओं पर जोर दिया गया। 4. जनता ने इस पहल पर क्या सुझाव दिए? लोगों ने विदेश नीति की सराहना की और ज़ांज़ीबार की तरह अन्य स्थानों पर भी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित करने की बात कही। नेता परिचय: एस. जयशंकर • पद: विदेश मंत्री • जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी 2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चीन में राजदूत (2009–2013) • अमेरिका में राजदूत (2013–2015) • भारत के विदेश सचिव (2015–2018) • विदेश मंत्री (2019 से) • भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका रोचक तथ्य • विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। • चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे। https://trendkia.com/neta-ji/adisa-ababa-men-afriki-deshon-ke-bharatiya-rajaduton-ke-sammelana-ki-esa-jayashnkara-ne-ki-adhyakshata-46129 TrendKia — Har trend, sabse pehle.