अहम खनिजों की प्रोसेसिंग के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता खत्म करने के पक्ष में नरेंद्र मोदी नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर भारत के भविष्य के लिए जरूरी खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण पर जोर दिया है। उन्होंने लिथियम, निकेल और कोबाल्ट के परिष्कृत आयात पर निर्भरता घटाने का आह्वान किया। भविष्य की आधुनिक तकनीकों को ऊर्जा देने वाले अहम खनिजों के मामले में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर बड़ा विमर्श शुरू हो गया है। लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे संसाधन स्वच्छ ऊर्जा, बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रक्षा क्षेत्र की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में इन कच्चे और रिफाइंड खनिजों के घरेलू स्तर पर प्रसंस्करण की क्षमता तैयार करना देश की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर क्या कहा नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखते हुए देश की बाहरी निर्भरता पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या भारत को हमारे भविष्य को ताकत देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस तरह की निर्भरता के कतई पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा प्रणालियों के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके बावजूद मौजूदा समय में भारत रिफाइंड और प्रोसेस्ड खनिजों की आपूर्ति के लिए भारी मात्रा में बाहरी आयातों पर निर्भर बना हुआ है। इस स्थिति को बदलने और देश के भीतर ही इन खनिजों के रिफाइनिंग तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया। महत्वपूर्ण खनिजों का रणनीतिक महत्व आधुनिक उद्योग और ऊर्जा क्षेत्र में लिथियम, निकेल और कोबाल्ट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए बैटरी निर्माण सबसे प्रमुख कड़ी है, जिसमें ये घटक अनिवार्य भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा संवेदनशील रक्षा उपकरणों और दैनिक उपयोग के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के उत्पादन में भी इनके परिष्कृत स्वरूप की भारी मांग रहती है। यदि घरेलू स्तर पर प्रोसेसिंग की सुविधाएं विकसित नहीं होती हैं, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान का सीधा असर राष्ट्रीय विनिर्माण पर पड़ सकता है। जनता की प्रतिक्रिया इस विचार पर आम नागरिकों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने मिली-जुली राय जाहिर की। कई लोगों ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक जरूरी और दूरदर्शी कदम बताते हुए घरेलू क्षमता निर्माण का समर्थन किया, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने सवाल उठाया कि इस दिशा में जमीनी स्तर पर ठोस काम और तेजी से लागू होने वाली नीतियां कब देखने को मिलेंगी। इसका आप पर असर महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण पर जोर देने से भविष्य में तकनीकी और विनिर्माण क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। • इलेक्ट्रिक वाहन खरीदार: देश में बैटरी खनिजों के प्रसंस्करण से ईवी की उत्पादन लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक गाड़ियां और बैटरियां आम खरीदारों के लिए अधिक किफायती बन सकती हैं। • इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग: घरेलू स्तर पर रिफाइंड सामग्री मिलने से कलपुर्जों की आपूर्ति में रुकावट कम होगी। इसका मतलब है कि स्थानीय गैजेट्स निर्माताओं को विदेशी शिपमेंट पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। • औद्योगिक विनिर्माण: रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग संयंत्रों की स्थापना से भारी पूंजी निवेश और बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा। इसके परिणामस्वरूप तकनीकी कौशल वाले युवाओं के लिए विनिर्माण और शोध के नए अवसर तैयार होंगे। • रणनीतिक सुरक्षा: रक्षा उपकरणों के लिए आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता सुरक्षित होगी। बाहरी आपूर्ति में किसी संकट या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के समय देश की उत्पादन क्षमता अप्रभावित रहेगी। सवाल-जवाब 1. नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर किस विषय पर विचार रखे? उन्होंने भविष्य की तकनीकों को शक्ति देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहने की आवश्यकता पर बल दिया। 2. इस विमर्श में किन प्रमुख खनिजों का उल्लेख किया गया है? इसमें मुख्य रूप से लिथियम, निकेल और कोबाल्ट का जिक्र किया गया है, जो बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवश्यक हैं। 3. इन खनिजों का उपयोग किन प्रमुख क्षेत्रों में होता है? इनका प्राथमिक उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, रिचार्जेबल बैटरियों, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों और रक्षा प्रणालियों में होता है। 4. वर्तमान में इन खनिजों को लेकर भारत की क्या स्थिति है? वर्तमान में भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के परिष्कृत और प्रसंस्कृत स्वरूप के आयात पर काफी हद तक निर्भर है। 5. सोशल मीडिया पर जनता की ओर से कैसी प्रतिक्रिया आई? लोगों ने आत्मनिर्भरता की दिशा में इसे जरूरी कदम बताया, जबकि कुछ ने जमीनी स्तर पर ठोस नीति और त्वरित क्रियान्वयन की मांग की। नेता परिचय: नरेंद्र मोदी • पद: भारत के प्रधानमंत्री • जन्म: 17 सितंबर 1950, वडनगर, गुजरात • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: राजनीति विज्ञान में एमए 2014 से भारत के प्रधानमंत्री। वे 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और भाजपा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चुनावी राजनीति से पहले आरएसएस प्रचारक • गुजरात के मुख्यमंत्री (2001–2014) • भारत के प्रधानमंत्री (2014 से) • 2014 और 2019 में भाजपा को लोकसभा बहुमत दिलाया • स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया और जीएसटी लागू किया रोचक तथ्य • चुनावी राजनीति से बहुत पहले 1971 में आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बने। • 2014 में 1984 के बाद पहली बार किसी दल को अकेले लोकसभा बहुमत दिलाया। https://trendkia.com/neta-ji/ahama-khanijon-ki-prosesinga-ke-lie-dusare-deshon-para-nirbharata-khatma-karane-ke-paksha-men-narendra-modi-56453 TrendKia — Har trend, sabse pehle.