आईBSA विदेश मंत्रियों की बैठक: भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र सुधारों और अंतरराष्ट्रीय नियमों पर दिया जोर न्यूयॉर्क में 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों ने बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने और वैश्विक चुनौतियों पर साझा रुख अपनाने पर चर्चा की। न्यूयॉर्क में आयोजित 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के त्रिपक्षीय समूह यानी आईBSA की विदेश मंत्रिस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा के साथ व्यापक कूटनीतिक चर्चा की। तीनों लोकतांत्रिक देशों ने मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में बहुपक्षवाद की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के निष्पक्ष अनुपालन पर अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान के प्रमुख बिंदु बैठक के बाद जारी संयुक्त मीडिया वक्तव्य में तीनों देशों ने स्पष्ट किया कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और विश्व संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता रेखांकित की गई। तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि विकासशील दुनिया की आवाज को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। दक्षिण-दक्षिण सहयोग के तहत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को भी आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। एस. जयशंकर ने साझा की जानकारी बैठक के समापन के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर त्रिपक्षीय विमर्श की मुख्य बातों को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस बैठक में वैश्विक स्तर पर एक मजबूत बहुपक्षीय ढांचे के निर्माण, अंतरराष्ट्रीय नियमों के प्रति निष्ठा और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित करने वाला वक्तव्य जारी किया गया है। तीनों नेताओं ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को और अधिक गहरा करने की रणनीतियों पर सहमति व्यक्त की। जनता की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर इस कूटनीतिक बैठक को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जहां कुछ नागरिकों ने विदेशों में भारतीय दूतावासों से त्वरित सहायता की मांग उठाई, तो वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने वैश्विक सम्मेलनों के साथ-साथ घरेलू मुद्दों और करदाताओं की चिंताओं पर भी समान ध्यान देने की बात कही। इसका आप पर असर इस कूटनीतिक वार्ता से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विकासशील देशों की रणनीतिक आवाज और मजबूत होगी। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भागीदारी से विदेशी निवेश और वैश्विक कूटनीतिक पहुंच को निरंतर मजबूती मिलती है। नागरिकों के लिए यह पहल मजबूत अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जरिए व्यापार और वीजा प्रक्रियाओं को सुगम बनाने में सहायक सिद्ध होती है। • वैश्विक स्तर पर: विकासशील देशों के समूह द्वारा सुरक्षा परिषद सुधारों की मांग से वैश्विक संस्थाओं में संतुलन बनने की संभावना बढ़ती है। इसके फलस्वरूप अंतरराष्ट्रीय नीतियों और शांति अभियानों में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की प्राथमिकताओं को अधिक महत्व मिलेगा। • आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई: त्रिपक्षीय मंच द्वारा आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराने से सीमा सुरक्षा और साझा खुफिया तंत्र को बढ़ावा मिलता है। इससे सीमा पार गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाए रखने में मदद मिलेगी। • दक्षिण-दक्षिण व्यापार: तीनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने से परस्पर व्यापारिक बाधाएं कम होने का मार्ग प्रशस्त होता है। भारतीय निर्यातकों और सेवा प्रदाताओं को लैटिन अमेरिका तथा अफ्रीकी बाजारों में नए अवसर मिल सकते हैं। सवाल-जवाब 1. आईBSA की इस बैठक में कौन-कौन से नेता शामिल हुए? इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने भाग लिया। 2. यह बैठक किस मंच पर और कहां आयोजित की गई? यह त्रिपक्षीय बैठक न्यूयॉर्क में आयोजित 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान संपन्न हुई। 3. बैठक के संयुक्त बयान में किन प्रमुख मुद्दों पर बल दिया गया? बयान में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पालन, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और बहुपक्षीय प्रणाली को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। 4. आईBSA देशों की विदेश नीति की साझा प्राथमिकता क्या है? तीनों देश दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देने, संयुक्त राष्ट्र में सुधार करने और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नेता परिचय: एस. जयशंकर • पद: विदेश मंत्री • जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी 2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चीन में राजदूत (2009–2013) • अमेरिका में राजदूत (2013–2015) • भारत के विदेश सचिव (2015–2018) • विदेश मंत्री (2019 से) • भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका रोचक तथ्य • विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। • चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे। https://trendkia.com/neta-ji/aibsa-videsha-mntriyon-ki-baithaka-bharata-brajila-aura-dakshina-aphrika-ne-snyukta-rashtra-sudharon-aura-antararashtriya-niyamon--38428 TrendKia — Har trend, sabse pehle.