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  "type": "article",
  "title": "आलू के दाम 1 रुपये किलो पर आने से अखिलेश यादव का हमला, 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य पर उठाए सवाल",
  "summary": "उत्तर प्रदेश में आलू के मंडी भाव 1 रुपये प्रति किलो तक गिरने पर अखिलेश यादव ने सरकार की 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की योजना पर तंज कसा है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में आलू और अन्य सब्जियों की गिरती कीमतों ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच कृषि मंडी में उपज के गिरते दामों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर किसानों की स्थिति को उजागर करते हुए राज्य सरकार के आर्थिक लक्ष्यों पर निशाना साधा। उन्होंने मंडी में आलू के दाम 1 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिरने का मुद्दा उठाकर 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के दावों की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।\n\nकृषि संकट और राजनीतिक तीखे बाण\nउत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वाकांक्षी योजना के बीच आलू की खेती करने वाले किसान गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, \"क्या किसान को 1 रुपये किलो आलू की क़ीमत देने से बनेगी 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी।\" उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी नीतियों के कारण किसान परेशान हैं और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।\n\nलागत और मंडी भाव के बीच भारी अंतर\nउत्तर भारत की विभिन्न मंडियों में आलू की कीमतें औंधे मुंह गिरी हैं। किसानों के अनुसार प्रति एकड़ आलू उगाने में लगभग 1 लाख रुपये की लागत आती है, जो लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है। इसके विपरीत मंडियों में आलू 300 रुपये प्रति कुंतल यानी 3 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है। कन्नौज में कोल्ड स्टोरेज खुलते ही आलू की बोरियों का भाव 250 रुपये प्रति पैकेट तक आ गया। कई स्थानों पर पुराना आलू 2 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम बेचने पर मजबूर किसान इसे कोल्ड स्टोरेज के बाहर छोड़ने लगे हैं। उपज का मूल्य प्रति एकड़ 80 हजार रुपये से भी कम मिलने के कारण किसानों के लिए लागत निकालना नामुमकिन हो गया है।\n\nअन्य फसलों पर भी मंडराया मंदी का साया\nफसलों की घटती कीमतों की समस्या सिर्फ आलू तक सीमित नहीं है। अन्य सब्जियों की दरें गिरने से स्थिति और बिगड़ी है। 10 रुपये प्रति किलोग्राम भाव मिलने के कारण लाचार होकर किसान ने अपनी 12 बीघा खड़ी अरबी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया। इसके अलावा बिहार में खरीदार न मिलने से फसल खेतों में सड़ने की कगार पर है, वहीं पंजाब के मोगा में कीर्ति किसान यूनियन ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। दूसरी ओर हरियाणा में बंपर पैदावार के बीच किसानों को सहारा देने के लिए भावांतर भरपाई योजना लागू की गई है। इस पूरी मंदी के बावजूद शहरों में आम उपभोक्ता 20 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम की महंगी दर पर आलू खरीदने को मजबूर हैं।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nइस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर आम जनता ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने मध्यस्थों के भारी मुनाफे और किसानों के घाटे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकारी हस्तक्षेप की मांग की, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने मौजूदा आर्थिक नीतियों का बचाव किया।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: कृषि उपज के मंडी भाव और खुदरा मूल्य में बड़े अंतर के कारण उपभोक्ताओं को महंगी दरें चुकानी पड़ रही हैं जबकि किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।\n• उत्तर प्रदेश में: राज्य के आलू और सब्जी किसानों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अखिलेश यादव ने किस मुद्दे पर सवाल उठाया है?\nअखिलेश यादव ने मंडियों में आलू की कीमत 1 रुपये प्रति किलो तक गिरने का मुद्दा उठाकर राज्य सरकार की 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के दावे पर सवाल उठाया है।\n\n2. उत्तर प्रदेश में आलू उत्पादन की प्रति एकड़ लागत कितनी है?\nकिसानों के अनुसार आलू की खेती में प्रति एकड़ लगभग 1 लाख रुपये की लागत आती है, जो करीब 10 रुपये प्रति किलोग्राम बैठती है।\n\n3. मंडियों में आलू किस भाव पर बिक रहा है?\nमंडियों में आलू का भाव 250 रुपये प्रति पैकेट या 300 रुपये प्रति कुंतल तक गिर गया है, जिससे किसानों को 1 से 3 रुपये प्रति किलो का मूल्य ही मिल पा रहा है।\n\n4. किसानों की इस स्थिति पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रही?\nसोशल मीडिया पर लोगों ने किसानों को सही दाम न मिलने और खुदरा बाजार में महंगी कीमतों पर चिंता जताई है तथा बिचौलियों पर लगाम कसने की मांग की है।\n\nनेता परिचय: अखिलेश यादव\n• पद: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष\n• जन्म: 1 जुलाई 1973, सैफई, उत्तर प्रदेश\n• पार्टी: समाजवादी पार्टी\n• शिक्षा: मैसूर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग\n\nसमाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद। वे उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री (2012–17) रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• सांसद (पहली बार 2000 में निर्वाचित)\n• उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2012–2017)\n• समाजवादी पार्टी अध्यक्ष (2017 से)\n• आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और लखनऊ मेट्रो बनवाई\n• कन्नौज से सांसद (18वीं लोकसभा)\n\nरोचक तथ्य\n• 38 वर्ष की आयु में यूपी के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने।\n• पेशे से सिविल इंजीनियर; फुटबॉल में गहरी रुचि।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-08-11",
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