# अमित शाह ने आईटीबीपी के हिमवीरों को स्थापना दिवस पर दी बधाई, दुर्गम बर्फीली चोटियों पर देश की रक्षा के जज्बे को सराहा

> केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के स्थापना दिवस पर जवानों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा में उनके अद्वितीय साहस और कठिन परिस्थितियों में दिखाए गए दृढ़ संकल्प की प्रशंसा की है।

**Type:** article · **Category:** नेता जी · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/neta-ji/amita-shaha-ne-aitibipi-ke-himaviron-ko-sthapana-divasa-para-di-badhai-durgama-barphili-chotiyon-para-desha-ki-raksha-ke-jajbe-ko--51194 · **Language:** Hindi
**Tags:** AmitShah

देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी के सभी कर्मियों को उनके स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने अपने संदेश में बल के जवानों को हिमवीर कहकर संबोधित किया और उनके अदम्य साहस को देश की सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बताया।

 

## बर्फीले पहाड़ों पर तैनात जवानों की वीरता
 गृह मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इन वीर जवानों की बहादुरी की गूंज देश की बर्फीली और दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं में साफ सुनाई देती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये जवान देश की संप्रभुता के सामने आने वाले हर खतरे को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर देते हैं। सबसे कठिन और प्रतिकूल मौसम में भी इनकी अटूट सहनशक्ति भारत के फौलादी इरादों और मजबूत संकल्प को दर्शाती है.

 

## भारत-तिब्बत सीमा पुलिस का गौरवशाली इतिहास
 आईटीबीपी के स्थापना दिवस के अवसर पर देश के शीर्ष नेतृत्व ने बल के योगदान को याद किया है। इस विशेष बल का गठन भारत-चीन युद्ध के तुरंत बाद 24 अक्टूबर 1962 को किया गया था। तब से लेकर आज तक इस बल ने देश की उत्तरी सीमाओं की रक्षा में असाधारण लचीलापन, कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर उत्कृष्टता का परिचय दिया है। सुदूर और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात ये जवान देश के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करते हैं।

 

## शीर्ष नेतृत्व और मंत्रियों की शुभकामनाएं
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों ने भी इस अवसर पर आईटीबीपी के हिमवीरों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने बल के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि भारत-चीन सीमा प्रबंधन के मोर्चे पर इन जवानों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार और देश का नेतृत्व हर परिस्थिति में इन सुरक्षाकर्मियों के साथ खड़ा है और उनके सेवा भाव को सर्वोच्च सम्मान देता है।

 

## आम जनता और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
 इस स्थापना दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया पर आम नागरिकों ने भी बड़ी संख्या में अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। कई उपयोगकर्ताओं ने जवानों के कठिन परिश्रम और बलिदान की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया, वहीं कुछ लोगों ने सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय और सवाल भी सामने रखे।

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## इसका आप पर असर
सीमा सुरक्षा बलों के स्थापना दिवस और उनकी भूमिका का सीधा प्रभाव देश की आंतरिक सुरक्षा और रक्षा तैयारियों पर पड़ता है।

- **भारत में:** देश के नागरिकों को सीमाओं की सुरक्षा और सतर्कता का स्पष्ट संदेश मिलता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होती है।

- **सीमावर्ती क्षेत्रों में:** इन दुर्गम इलाकों में तैनात जवानों के उच्च मनोबल से स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और ढांचागत मजबूती में निरंतर सुधार होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. आईटीबीपी के स्थापना दिवस पर किसने शुभकामनाएं दीं?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आईटीबीपी के जवानों को शुभकामनाएं दीं।

### 2. आईटीबीपी के जवानों को किस नाम से संबोधित किया गया?
संदेश में आईटीबीपी के कर्मियों को 'हिमवीर' कहकर संबोधित किया गया।

### 3. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की स्थापना कब हुई थी?
इस बल की स्थापना 24 अक्टूबर 1962 को की गई थी।

### 4. गृह मंत्री ने जवानों की किस विशेषता का उल्लेख किया?
गृह मंत्री ने बर्फीले पहाड़ों पर उनकी बहादुरी और सबसे कठिन जलवायु में उनकी सहनशक्ति की प्रशंसा की।

## नेता परिचय: अमित शाह
- **पद:** केंद्रीय गृह मंत्री
- **जन्म:** 22 अक्टूबर 1964, मुंबई, महाराष्ट्र
- **पार्टी:** भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
- **शिक्षा:** बायोकेमिस्ट्री में बीएससी

2019 से भारत के गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (2014–20); पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं।

### राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां
- भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष (2014–2020)
- केंद्रीय गृह मंत्री (2019 से)
- केंद्रीय सहकारिता मंत्री (2021 से)
- सांसद, गांधीनगर
- 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन का नेतृत्व

### रोचक तथ्य
- भाजपा के सबसे सफल अध्यक्षों में गिने जाते हैं।
- 1982 में गुजरात में आरएसएस के ज़रिए नरेंद्र मोदी से पहली मुलाक़ात हुई।


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