# अस्पताल में डिलीवरी बढ़ी, लेकिन स्तनपान घटा; शशि थरूर ने जताई चिंता

> शशि थरूर ने एनएफएचएस-6 के आंकड़ों में एक हैरान करने वाला रुझान उठाया है, अस्पताल में डिलीवरी की दर बढ़कर 90.6% हो गई है, लेकिन छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग 63.7% से घटकर 55.8% रह गई है।

**Type:** article · **Category:** नेता जी · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/neta-ji/aspatala-men-dilivari-barhi-lekina-stanapana-ghata-shashi-tharura-ne-jatai-chinta-28343 · **Language:** Hindi
**Tags:** ShashiTharoor

देश में ज्यादातर महिलाएं अब अस्पताल में ही बच्चे को जन्म दे रही हैं, लेकिन इसी बीच एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है, जन्म के बाद शिशुओं को सिर्फ मां का दूध पिलाने की दर में गिरावट। इस विरोधाभास को शशि थरूर ने एक्स पर उठाया है और सवाल किया है कि आखिर इसके पीछे की वजह क्या हो सकती है।

## एनएफएचएस-6 के आंकड़े क्या कहते हैं
शशि थरूर के मुताबिक, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे यानी NFHS-6 के ताजा आंकड़ों में देश में संस्थागत प्रसव, यानी अस्पताल या किसी रजिस्टर्ड स्वास्थ्य केंद्र में होने वाली डिलीवरी, बढ़कर 90.6% तक पहुंच गया है। इसे मातृ स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच का संकेत माना जाता है, क्योंकि अस्पताल में डिलीवरी के दौरान प्रशिक्षित स्टाफ और आपातकालीन सुविधा मौजूद रहती है। लेकिन इन्हीं आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि छह महीने से कम उम्र के शिशुओं को सिर्फ मां का दूध पिलाने यानी एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग (EBF) की दर 63.7% से घटकर 55.8% पर आ गई है।

## दो अच्छे संकेतकों में यह उलटफेर क्यों चौंकाता है
शशि थरूर ने इसे दिलचस्प आंकड़ा बताते हुए कहा कि यह जानना जरूरी है कि इसका मतलब क्या हो सकता है, क्योंकि दोनों आंकड़े मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधरने का संकेत माने जाते हैं, फिर भी दोनों उलटी दिशा में जा रहे हैं। आम तौर पर माना जाता है कि जब ज्यादा महिलाएं अस्पताल में डिलीवरी कराती हैं, तो उन्हें प्रसव के तुरंत बाद स्तनपान से जुड़ी सलाह और सहायता भी आसानी से मिलनी चाहिए। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग की दर करीब आठ प्रतिशत अंक तक गिर गई है, और यह गिरावट राष्ट्रीय स्तर के सर्वे के हिसाब से लाखों नवजातों को सीधे प्रभावित करती है।

## शशि थरूर ने क्या लिखा
अपनी पोस्ट में शशि थरूर ने लिखा, 
> एक दिलचस्प आंकड़ा, और इसका क्या मतलब हो सकता है
 इसके बाद उन्होंने सर्वे के दोनों आंकड़े सामने रखे और इसे विशेषज्ञों तथा नीति निर्माताओं के लिए एक सवाल के तौर पर पेश किया, न कि खुद इसकी वजह बताते हुए कोई निष्कर्ष दिया।

## जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई। कई यूजर्स ने कहा कि छह महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाना हर बच्चे के लिए जरूरी माना जाना चाहिए, वहीं कुछ ने नई माओं की मानसिक सेहत, दफ्तर के दबाव और डिलीवरी के बाद बेहतर सहयोग व्यवस्था की जरूरत पर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने अस्पतालों में जवाबदेही और अलग-अलग राज्यों के आंकड़ों की तुलना जैसे मुद्दे भी उठाए, जो दिखाता है कि लोग मां और नवजात दोनों की सेहत को एक साथ जोड़कर देखने की मांग कर रहे हैं।

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## इसका आप पर असर
यह आंकड़ा सीधे तौर पर नई और गर्भवती माओं, नवजात वाले परिवारों और प्रसव के बाद देखभाल से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों से जुड़ा है।

- **नई माओं के लिए:** अगर आपने हाल ही में डिलीवरी कराई है या गर्भवती हैं, तो याद रखें कि छह महीने तक सिर्फ मां का दूध पिलाना अब भी डॉक्टरों की सलाह है। अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही स्तनपान से जुड़ी सलाह जरूर ले लें, क्योंकि डिलीवरी के तुरंत बाद मिलने वाली मदद सबसे ज्यादा असर डालती है।
- **वर्किंग महिलाओं के लिए:** यह गिरावट अक्सर डिलीवरी के तुरंत बाद काम पर लौटने या घर संभालने के दबाव से भी जुड़ी होती है। अपने दफ्तर की मैटरनिटी लीव और फीडिंग ब्रेक से जुड़ी नीतियों की जानकारी पहले से ले लें ताकि छह महीने की अवधि को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सके।
- **परिवार और घरवालों के लिए:** शुरुआती महीनों में मां के दूध की जगह फॉर्मूला और पैकेज्ड बेबी फूड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। घर के सदस्य मां का काम का बोझ कम करके इस दौरान एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग को संभव बना सकते हैं।
- **स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए:** संस्थागत प्रसव 90.6% तक पहुंचने के साथ अस्पताल ही ज्यादातर नई माओं से सीधा संपर्क रखते हैं, इसलिए डिलीवरी के बाद के हफ्तों में स्तनपान से जुड़ी काउंसलिंग और फॉलोअप को वहीं मजबूत करना सबसे कारगर हो सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर कौन सा आंकड़ा साझा किया?
उन्होंने NFHS-6 सर्वे के हवाले से बताया कि संस्थागत प्रसव 90.6% तक पहुंच गया है जबकि छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग 63.7% से घटकर 55.8% रह गई है।

### 2. एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग (EBF) का मतलब क्या है?
इसका मतलब है छह महीने की उम्र तक शिशु को सिर्फ मां का दूध पिलाना, कोई और आहार या तरल पदार्थ नहीं।

### 3. यह आंकड़ा किस सर्वे से लिया गया है?
यह आंकड़ा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के ताजा आंकड़ों से लिया गया है।

### 4. संस्थागत प्रसव का क्या मतलब है?
इसका मतलब है अस्पताल या किसी रजिस्टर्ड स्वास्थ्य केंद्र में होने वाली डिलीवरी, न कि घर पर।

### 5. शशि थरूर ने इस आंकड़े को क्या बताया?
उन्होंने इसे एक दिलचस्प आंकड़ा बताया और सवाल उठाया कि इसका असल में क्या मतलब हो सकता है।

### 6. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस पोस्ट पर कैसी प्रतिक्रिया दी?
प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं, कुछ ने नई माओं की मानसिक सेहत और दफ्तर के दबाव पर सवाल उठाए, तो कुछ ने स्तनपान को अनिवार्य बनाने की मांग की।

## नेता परिचय: शशि थरूर
- **पद:** सांसद, तिरुवनंतपुरम
- **जन्म:** 9 मार्च 1956, लंदन, यूके
- **पार्टी:** भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
- **शिक्षा:** फ्लेचर स्कूल, टफ्ट्स से पीएचडी

2009 से तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और 25 से अधिक पुस्तकों के पुरस्कृत लेखक।

### राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां
- संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव (2002–2007)
- सांसद, तिरुवनंतपुरम (2009 से)
- विदेश राज्य मंत्री (2009–2010)
- विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष
- 25+ पुस्तकों के लेखक; साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता

### रोचक तथ्य
- 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे।
- 22 वर्ष की आयु में पीएचडी पूरी की — फ्लेचर स्कूल के इतिहास में सबसे कम उम्र में।


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