अवध ओझा ने राहुल गांधी की राजनीति पर उठाया सवाल, स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में न जाने को लेकर दी सलाह शिक्षाविद अवध ओझा ने इटली की पीएम पर बयानों और स्वतंत्रता दिवस समारोह से दूरी बनाने को लेकर राहुल गांधी व कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधा है। शिक्षाविद अवध ओझा ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक शैली पर अपनी राय रखते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की है। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी से जुड़ी टिप्पणियों से लेकर स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय समारोह तक, उन्होंने राजनीतिक मर्यादा और राष्ट्रीय कर्तव्यों का उल्लेख किया है। अवध ओझा का मानना है कि देश के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों का मुख्य काम केवल जनता का मनोरंजन करना या हल्के बयानों से ध्यान खींचना नहीं होता, बल्कि राष्ट्र को एक जिम्मेदार और दूरदर्शी दिशा प्रदान करना होता है। विपक्ष के नेता की भूमिका और राजनीति का स्तर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के संबंध में कांग्रेस नेताओं द्वारा हाल ही में दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अवध ओझा ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी या जेन-जी बेहद समझदार और जागरूक है। वे इस तरह की बयानबाजी पर कुछ पल के लिए हंस सकते हैं, लेकिन ऐसी बातों को कभी भी गंभीरता से स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक विमर्श का स्तर इसी तरह गिरता रहा, तो राजनीति और मनोरंजन शो के बीच का अंतर समाप्त हो जाएगा। अवध ओझा ने हास्य कलाकार कपिल शर्मा के शो का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि कपिल शर्मा का काम लोगों को हंसाना और उनका मनोरंजन करना है। हालांकि, लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद एक अत्यंत जिम्मेदार संवैधानिक दायित्व होता है। इस पद पर आसीन व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह देश के गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे और राष्ट्र के विकास के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करे। इसलिए राजनीतिक नेताओं को अपने बयानों और आचरण में गंभीरता बनाए रखनी चाहिए। स्वतंत्रता दिवस समारोह में उपस्थिति और राष्ट्रीय हित लालकिले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति पर भी अवध ओझा ने अपनी असहमति जताई। उन्होंने राहुल गांधी को एक समझदार व्यक्ति और विपक्ष का प्रमुख नेता मानते हुए कहा कि वैचारिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन जब बात देश और स्वतंत्रता दिवस जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व की आती है, तो सभी मतभेदों को किनारे रख देना चाहिए। अपने हालिया अनुभवों को साझा करते हुए अवध ओझा ने बताया कि एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अनेक लोगों को राजनीतिक विभाजन और दूरियों से परेशान देखा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधाराओं का भिन्न होना स्वाभाविक है, परंतु इसे कभी भी व्यक्तिगत दुश्मनी या राष्ट्रीय अवसरों के बहिष्कार का कारण नहीं बनना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरे देश का साझा गौरव है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लालकिले के इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय आयोजन में अवश्य शामिल होना चाहिए था। कूटनीतिक व्यवहार और वैश्विक नेताओं के संबंध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मिलने पर उन्हें गले लगाने की शैली पर उठने वाले सवालों का भी अवध ओझा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर अंतरराष्ट्रीय नेताओं का आपस में गले मिलना एक सामान्य कूटनीतिक आचरण है। दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेता आपस में इसी तरह आत्मीयता से मिलते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के इस व्यवहार में कुछ भी गलत या अनुचित नहीं है, और इसे अनावश्यक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। युवा संगठनों का गठन और मार्गदर्शन की आवश्यकता जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों, आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग और कॉकरोच जनता पार्टी का आम आदमी पार्टी से कथित संबंधों पर भी उन्होंने अपनी बात रखी। अवध ओझा ने ऐसे किसी सीधे जुड़ाव की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि हालांकि आम आदमी पार्टी ने युवाओं का समर्थन किया है, लेकिन अभद्र भाषा का बढ़ता प्रभाव सिनेमा और साहित्य के गिरते स्तर का परिणाम है। जब फिल्मों और सार्वजनिक मंचों पर अभद्र भाषा का प्रयोग होता है, तो समाज के बच्चे और युवा उसे देखकर सीखते हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के गठन का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवाओं के इस प्रयास को एक स्वागत योग्य कदम बताया। अवध ओझा ने कहा कि इन युवाओं के पास अपार उत्साह, समझदारी और एक स्पष्ट उद्देश्य है। हालांकि, उन्होंने सलाह दी कि इस युवा संगठन को एक वरिष्ठ और अनुभवी लोगों का दिशा-निर्देशक मंडल बनाना चाहिए। यह मंडल युवाओं को सही दिशा दिखाएगा, उनका उचित मार्गदर्शन करेगा और उन्हें अधिक प्रभावी तथा संगठित तरीके से काम करने में मदद करेगा। इसका आप पर असर • भारत में: राष्ट्रीय त्योहारों और सार्वजनिक पदों की गरिमा को लेकर नेताओं के आचरण पर आम नागरिकों की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। • राजनीति में: राजनीतिक नेताओं द्वारा दिए जाने वाले बयानों और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी पर सार्वजनिक चर्चा तेज हो गई है। सवाल-जवाब 1. अवध ओझा ने राहुल गांधी की तुलना कपिल शर्मा शो से क्यों की? अवध ओझा ने कहा कि विपक्ष के नेता का काम सिर्फ लोगों को हंसाना नहीं बल्कि देश को दिशा देना है, वर्ना राजनीति कपिल शर्मा के शो जैसी बन जाएगी। 2. स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस नेताओं की अनुपस्थिति पर अवध ओझा ने क्या कहा? उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय हित का अवसर है और वैचारिक मतभेदों के बावजूद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को लालकिले के कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए था। 3. प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी नेताओं को गले लगाने पर अवध ओझा की क्या राय थी? उन्होंने इसे पूरी तरह सामान्य कूटनीतिक व्यवहार बताते हुए कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है क्योंकि कई देशों के प्रमुख ऐसा करते हैं। 4. कॉकरोच जनता पार्टी को अवध ओझा ने क्या सलाह दी? उन्होंने युवाओं के इस संगठन का स्वागत करते हुए सलाह दी कि उन्हें सही मार्गदर्शन के लिए वरिष्ठ और अनुभवी लोगों का एक दिशा-निर्देशक मंडल बनाना चाहिए। https://trendkia.com/neta-ji/avadh-ojha-ne-rahul-gandhi-ki-rajaniti-para-uthaya-savala-svatntrata-divasa-karyakrama-men-na-jane-ko-lekara-di-salaha-17289 TrendKia — Har trend, sabse pehle.