बर्लिन में शशि थरूर का संबोधन: वैश्विक मंच पर मिडिल पावर्स की बढ़ती भूमिका पर रखी बात बर्लिन के रिचर्ड वॉन विट्ज़सेकर फोरम में मुख्य भाषण देते हुए शशि थरूर ने कहा कि जब पारंपरिक वैश्विक नेतृत्व कमजोर हो रहा है, तब मध्यम शक्तियों को आपसी सहयोग बनाए रखने के लिए आगे आना होगा। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बदलते स्वरूप और वैश्विक व्यवस्था की चुनौतियों के बीच वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने जर्मनी के बर्लिन में आयोजित एक प्रतिष्ठित मंच पर दुनिया के वर्तमान हालात पर अपना दृष्टिकोण पेश किया है। रिचर्ड वॉन विट्ज़सेकर फोरम में हिस्सा लेते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शीतयुद्ध के बाद से चली आ रही पुरानी वैश्विक व्यवस्था इस समय कड़े दबाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे नाजुक मोड़ पर जब किसी एक या दो महाशक्तियों का निर्विरोध नेतृत्व धीरे-धीरे पीछे छूट रहा है, तब दुनिया भर के मध्यम दर्जे के प्रभावशाली देशों यानी मिडिल पावर्स पर वैश्विक स्थिरता और बहुपक्षीय साझेदारी को जिंदा रखने का एक बहुत बड़ा दायित्व आ गया है। वैश्विक व्यवस्था के दबाव और मिडिल पावर्स की जिम्मेदारी बर्लिन के इस कूटनीतिक संवाद में अपने संबोधन के दौरान थरूर ने 'द मिडिल पावर मोमेंट' विषय पर विचार रखे। उन्होंने रेखांकित किया कि दुनिया अब उस दौर में प्रवेश कर चुकी है जहां किसी एक ध्रुव का वर्चस्व लगातार घट रहा है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद खड़ी की गई संस्थाएं और वैश्विक नियम-कायदे आज अभूतपूर्व तनाव का सामना कर रहे हैं। इस बदलते माहौल में जो देश पारंपरिक महाशक्तियां नहीं हैं, लेकिन क्षेत्रीय और आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति रखते हैं, उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वतंत्र आवाज उठाने और अहम भूमिका निभाने के नए अवसर तैयार हुए हैं। थरूर ने क्या कहा अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक मंच पर उभरते देशों की ताकत और प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। थरूर के अनुसार जब पारंपरिक महाशक्तियां पीछे हटती हैं या वैश्विक मुद्दों पर आम सहमति बनाने में विफल रहती हैं, तब मध्यम शक्तियों को अपनी इस बढ़ती स्वायत्तता और कूटनीतिक क्षमता का उपयोग करना चाहिए। उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, साझा बातचीत और बहुपक्षीय समझौतों की निरंतरता बनाए रखने के लिए इन देशों को आगे बढ़कर कमान संभालनी होगी ताकि दुनिया टकराव के बजाय साझी प्रगति की दिशा में आगे बढ़ सके। जनता की प्रतिक्रिया थरूर के इस विदेशी दौरे और भाषण को लेकर ऑनलाइन मंचों पर मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कुछ लोगों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक चिंतन की सराहना की, वहीं कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए तीखी आलोचना की। आलोचकों का कहना था कि देश के भीतर राजनीतिक हलचलों और जमीनी संघर्षों के बीच विदेश जाकर व्याख्यान देने के बजाय उन्हें घरेलू स्तर पर लोकतांत्रिक मुद्दों और जनहित की लड़ाई में सक्रिय रहना चाहिए था। इसका आप पर असर वैश्विक कूटनीति और मध्यम शक्तियों की बदलती भूमिका से जुड़े इस विमर्श के अंतरराष्ट्रीय और नीतिगत मायने हैं। • भारत में: यह विमर्श अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत जैसे उभरते देशों की स्वतंत्र और बहुपक्षीय कूटनीति के महत्व को रेखांकित करता है। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक संकटों के दौर में प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों के कूटनीतिक रुख पर पूरे विश्व की नजर रहती है। • नीति और जनता पर: वैश्विक स्तर पर हो रहे ऐसे संवाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक साझेदारी की दिशा तय करने में मदद करते हैं। इसका सीधा असर भविष्य की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में मध्यम दर्जे के देशों की भागीदारी पर पड़ता है। • राजनीतिक जवाबदेही: नेताओं के विदेशी दौरों पर घरेलू स्तर पर होने वाली तीखी बहस जनप्रतिनिधियों के कर्तव्यों को लेकर जनता की बढ़ती सतर्कता को दर्शाती है। नागरिक अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ-साथ घरेलू मुद्दों पर भी लगातार सक्रियता की उम्मीद करते हैं। • अंतरराष्ट्रीय साझेदारी: जब पारंपरिक नेतृत्व कमजोर पड़ता है तब क्षेत्रीय सहयोग ही वैश्विक स्थिरता की बुनियाद बनता है। यह स्थिति विभिन्न देशों के बीच नए व्यापारिक और कूटनीतिक गठबंधनों की जमीन तैयार करती है। सवाल-जवाब 1. शशि थरूर ने बर्लिन में किस विषय पर मुख्य भाषण दिया? उन्होंने रिचर्ड वॉन विट्ज़सेकर फोरम में 'द मिडिल पावर मोमेंट' विषय पर अपना मुख्य संबोधन दिया। 2. संबोधन में मिडिल पावर्स के बारे में क्या कहा गया? उन्होंने कहा कि पारंपरिक नेतृत्व के पीछे हटने पर मध्यम शक्तियों को अंतरराष्ट्रीय सहयोग बनाए रखने के लिए आगे आना चाहिए। 3. पुरानी वैश्विक व्यवस्था के बारे में क्या चिंता जताई गई? थरूर ने रेखांकित किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चली आ रही वैश्विक व्यवस्था इस समय कड़े दबाव और तनाव के दौर से गुजर रही है। 4. इस व्याख्यान पर आम लोगों और सोशल मीडिया की क्या प्रतिक्रिया रही? सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें घरेलू राजनीतिक संघर्षों को छोड़कर विदेश में भाषण नहीं देना चाहिए था। नेता परिचय: शशि थरूर • पद: सांसद, तिरुवनंतपुरम • जन्म: 9 मार्च 1956, लंदन, यूके • पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस • शिक्षा: फ्लेचर स्कूल, टफ्ट्स से पीएचडी 2009 से तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और 25 से अधिक पुस्तकों के पुरस्कृत लेखक। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव (2002–2007) • सांसद, तिरुवनंतपुरम (2009 से) • विदेश राज्य मंत्री (2009–2010) • विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष • 25+ पुस्तकों के लेखक; साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता रोचक तथ्य • 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे। • 22 वर्ष की आयु में पीएचडी पूरी की — फ्लेचर स्कूल के इतिहास में सबसे कम उम्र में। https://trendkia.com/neta-ji/barlina-men-shashi-tharura-ka-snbodhana-vaishvika-mncha-para-midila-pavarsa-ki-barhati-bhumika-para-rakhi-bata-44175 TrendKia — Har trend, sabse pehle.