बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर योगी आदित्यनाथ ने जताई श्रद्धा योगी आदित्यनाथ ने बटुकेश्वर दत्त की पुण्यतिथि पर एक्स पर श्रद्धांजलि पोस्ट की। बटुकेश्वर दत्त भगत सिंह के साथ 1929 में दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में हुए बम कांड में शामिल थे। योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए महान स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने अपनी पोस्ट में बटुकेश्वर दत्त को राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक बताते हुए उनके योगदान को याद किया। योगी आदित्यनाथ ने क्या लिखा अपने एक्स पोस्ट में योगी आदित्यनाथ ने बटुकेश्वर दत्त को राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक और महान स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आगे लिखा कि मां भारती की आजादी के लिए बटुकेश्वर दत्त का समर्पण, संघर्ष और बलिदान आज भी राष्ट्रसेवा के लिए एक अमूल्य प्रेरणा स्रोत है। कौन थे बटुकेश्वर दत्त बटुकेश्वर दत्त भारत के स्वतंत्रता संग्राम के उन गिने-चुने क्रांतिकारियों में शामिल थे, जिनकी हिम्मत ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। देश ने उन्हें पहली बार 8 अप्रैल 1929 को तब जाना, जब वे भगत सिंह के साथ दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में हुए बम धमाके के बाद गिरफ्तार हुए। यह धमाका अंग्रेज सरकार को झकझोरने और आम जनता तक क्रांतिकारियों की आवाज पहुंचाने के मकसद से किया गया था। गिरफ्तारी के बाद बटुकेश्वर दत्त लंबे समय तक जेल में रहे, लेकिन उनका जज्बा कभी कमजोर नहीं पड़ा। इससे पहले उन्होंने आगरा में स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित करने में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई थी, जहां उन्होंने युवाओं को क्रांतिकारी विचारधारा से जोड़ने का काम किया। असेंबली में धमाके की पूरी कहानी 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में हुआ बम धमाका भारत के स्वतंत्रता संग्राम की सबसे चर्चित घटनाओं में गिना जाता है। बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह ने जानबूझकर ऐसी जगह बम फेंका था, जहां किसी को नुकसान न पहुंचे, क्योंकि मकसद सिर्फ बहरी अंग्रेजी हुकूमत के कानों तक क्रांतिकारियों की आवाज पहुंचाना था। धमाके के बाद दोनों ने भागने की बजाय खुद को गिरफ्तार करवाया, ताकि अदालत के जरिए अपनी बात देश और दुनिया के सामने रख सकें। इसी घटना ने बटुकेश्वर दत्त को भगत सिंह के सबसे करीबी साथियों में शामिल कर दिया और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। ऐसी श्रद्धांजलियों की अहमियत राजनीतिक नेताओं की ओर से स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती और पुण्यतिथि पर इस तरह की श्रद्धांजलि देना भारत के सार्वजनिक जीवन का नियमित हिस्सा बन चुका है, जिससे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने वालों की याद जिंदा रहती है। ऐसी पहल का मकसद नागरिकों को आजादी के लिए दिए गए बलिदानों की याद दिलाना और बटुकेश्वर दत्त जैसे क्रांतिकारियों को युवा पीढ़ी के लिए साहस की मिसाल के तौर पर पेश करना होता है। जिन क्रांतिकारियों का योगदान अक्सर उसी आंदोलन के ज्यादा चर्चित नामों की छाया में दब जाता है, उनके लिए किसी बड़े नेता की श्रद्धांजलि जनता का ध्यान फिर से उनकी कहानी की ओर खींचने में मदद करती है। जनता की प्रतिक्रिया योगी आदित्यनाथ की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आईं। ज्यादातर लोगों ने बटुकेश्वर दत्त को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बलिदान को याद किया और इस पहल का समर्थन किया। वहीं कुछ यूजर्स ने यह सवाल भी उठाया कि स्वतंत्रता सेनानियों को उनके जीवनकाल में वह सम्मान क्यों नहीं मिल पाता, जो पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि के रूप में दिया जाता है। कुल मिलाकर पोस्ट पर सकारात्मक और भावुक प्रतिक्रियाओं की संख्या ज्यादा रही। सवाल-जवाब 1. योगी आदित्यनाथ ने किसे श्रद्धांजलि दी? उन्होंने महान स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। 2. बटुकेश्वर दत्त कौन थे? वे भारत के एक क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह के साथ दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में बम धमाके के बाद गिरफ्तार किया गया था। 3. यह बम धमाका कब और कहां हुआ था? यह घटना 8 अप्रैल 1929 को दिल्ली की केंद्रीय विधान सभा में हुई थी। 4. बटुकेश्वर दत्त ने आगरा में क्या काम किया था? उन्होंने आगरा में स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित करने और युवाओं को क्रांतिकारी विचारधारा से जोड़ने का काम किया था। 5. योगी आदित्यनाथ ने अपनी श्रद्धांजलि किस मंच पर पोस्ट की? उन्होंने यह श्रद्धांजलि सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट की। 6. बम धमाके का असली मकसद क्या था? इसका मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि बहरी अंग्रेजी हुकूमत तक क्रांतिकारियों की आवाज पहुंचाना था। 7. पोस्ट पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही? ज्यादातर लोगों ने श्रद्धांजलि का समर्थन किया, हालांकि कुछ ने सवाल उठाया कि स्वतंत्रता सेनानियों को यह सम्मान जीवनकाल में क्यों नहीं मिलता। नेता परिचय: योगी आदित्यनाथ • पद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री • जन्म: 5 जून 1972, पंचूर, उत्तराखंड • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: गणित में बीएससी 2017 से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखनाथ मठ के महंत। मूल नाम अजय मोहन सिंह बिष्ट; गोरखपुर से पाँच बार सांसद रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • सांसद, गोरखपुर (1998–2017, पाँच बार) • गोरखनाथ मठ के महंत (2014 से) • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2017 से) • लगातार दो कार्यकाल जीतने वाले पहले यूपी मुख्यमंत्री • हिंदू युवा वाहिनी संगठन की स्थापना की रोचक तथ्य • 1998 में 26 वर्ष की आयु में देश के सबसे युवा सांसदों में से एक बने। • राज्य की कमान संभालने से पहले संन्यास लेकर महंत बने। https://trendkia.com/neta-ji/batukeshvara-datta-ki-punyatithi-para-yogi-adityanatha-ne-jatai-shraddha-8866 TrendKia — Har trend, sabse pehle.