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  "type": "article",
  "title": "भदोही के केएनपीजी कॉलेज को मिला राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा, 21 करोड़ रुपये भी मंजूर",
  "summary": "उत्तर प्रदेश के भदोही स्थित 1951 में स्थापित काशी नरेश पीजी कॉलेज अब उत्तर प्रदेश का 25वां राज्य विश्वविद्यालय बन गया है, जिससे स्थानीय युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में स्थित काशी नरेश स्नातकोत्तर महाविद्यालय (केएनपीजी) को आधिकारिक तौर पर राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया है। 1951 में स्थापित यह प्रतिष्ठित संस्थान अब 'काशी नरेश विश्वविद्यालय' के नाम से पहचाना जाएगा। 75 वर्षों का शैक्षणिक सफर पूरा कर चुके इस कॉलेज के मुख्य प्रवेश द्वार पर विश्वविद्यालय के नए नाम का बोर्ड भी लगा दिया गया है। शासन स्तर पर इस बदलाव के साथ ही विश्वविद्यालय के शुरुआती बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक विकास के लिए 21 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस ऐतिहासिक फैसले से पूर्वांचल क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों को अपने गृह जिले में ही उच्च स्तरीय उपाधियां हासिल करने का अवसर मिलेगा।\n\nयोगी आदित्यनाथ का ऐलान और विधायी प्रक्रिया\nउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भदोही के काशी नरेश पीजी कॉलेज को विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दे दी गई है। इस निर्णय की नींव जुलाई 2025 में रखी गई थी जब उच्च शिक्षा निदेशालय ने कॉलेज को राज्य विश्वविद्यालय बनाने की संस्तुति शासन को भेजी थी। इसके बाद दिसंबर 2025 में राज्य कैबिनेट ने विश्वविद्यालय में आगामी सत्र से दाखिले शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। उत्तर प्रदेश विधानसभा में फरवरी 2026 में इस संबंध में विधेयक पारित हुआ, जिससे यह संस्थान प्रदेश का 25वां राज्य विश्वविद्यालय बन गया।\n\nप्रशासनिक कमान और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम\nविश्वविद्यालय के विधिवत संचालन की दिशा में 16 मई 2026 को प्रोफेसर उमा श्रीवास्तव ने प्रथम कुलपति के रूप में अपना कार्यभार संभाला। कुलपति की नियुक्ति के साथ ही संस्थान के शैक्षणिक विस्तार की गति तेज हो गई। 2 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय परिषद ने कई नए रोजगारपरक और पारंपरिक पाठ्यक्रमों को अपनी हरी झंडी दी, जिनमें बीएससी, बीकॉम और बीएड शामिल हैं। इसके अलावा 16 जुलाई 2026 को एक अकादमिक सत्र के दौरान प्राध्यापकों ने जीवन को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने के लिए जीवविज्ञान की महत्ता को रेखांकित किया। 23 अगस्त 2026 से परास्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके तहत अभ्यर्थियों को 31 अगस्त 2026 तक सभी जरूरी प्रमाणपत्रों के साथ आवेदन जमा करने का अवसर दिया गया।\n\n75 वर्ष पुराना गौरवशाली इतिहास\nवर्ष 1951 में स्थापित इस महाविद्यालय ने अपनी शैक्षणिक यात्रा के 75 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। संस्थान अपनी स्थापना के हीरक जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में विविध सांस्कृतिक और अकादमिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। 8 अगस्त 2025 को महाविद्यालय परिसर में 75वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में सावन उत्सव धूमधाम से मनाया गया था, जिसमें कजरी गायन, चित्रकला प्रतियोगिता, नाट्य मंचन और मेहंदी जैसी लोक कलाओं के रंग देखने को मिले थे। अब विश्वविद्यालय बनने के बाद यह संस्थान अपने संबद्ध कॉलेजों को खुद डिग्री प्रदान करने में पूरी तरह सक्षम हो गया है।\n\nकाशी के बारे में\nकाशी नगरी वर्तमान उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पौराणिक नगरी है, जिसे दुनिया के सबसे पुराने जीवित शहरों में गिना जाता है। यह विश्वविख्यात नगर गंगा नदी के उत्तरी यानी बाएं तट पर, वरुणा और असी नदियों के संगम के मध्य बसा हुआ है। इस भौगोलिक स्थल पर गंगा नदी लगभग चार मील का एक अर्धचंद्राकार घुमाव दक्षिण से उत्तर की ओर लेती है और यह पवित्र नगरी इसी घुमाव के किनारे विस्तृत है। आम बोलचाल में लंबे समय तक इसे बनारस कहा जाता रहा, लेकिन प्रदेश सरकार ने आधिकारिक रिकॉर्ड्स में इसका प्राचीन नाम वाराणसी पुनर्स्थापित कर दिया है, जिसकी ऐतिहासिक परंपरा में राज ऋषि राम कोल नागवंशीय राजाओं का भी उल्लेख मिलता है।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nइस फैसले के सामने आने के बाद आम नागरिकों ने भदोही के शैक्षणिक उत्थान की सराहना करते हुए इसे स्थानीय छात्रों के लिए बड़ा कदम बताया। वहीं कई अन्य जिलों के लोगों ने भी अपने क्षेत्रों में इसी तर्ज पर नए विश्वविद्यालय और बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी।\n\nइसका आप पर असर\nभदोही में नया राज्य विश्वविद्यालय बनने से स्थानीय छात्र-छात्राओं को अब उच्च शिक्षा के लिए दूसरे महानगरों में नहीं भटकना पड़ेगा।\n\n• उत्तर प्रदेश में: राज्य में सरकारी विश्वविद्यालयों का नेटवर्क मजबूत होकर अब 25 राज्य विश्वविद्यालयों तक पहुंच गया है। इससे प्रदेश के उच्च शिक्षा बुनियादी ढांचे में शोध और गुणवत्तापूर्ण सीटों का विस्तार होगा।\n• भदोही में: जिले के विद्यार्थियों को अब परास्नातक, व्यावसायिक और शोध उपाधियों के लिए प्रयागराज अथवा वाराणसी जाने का भारी खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। स्थानीय संबद्ध कॉलेजों के प्रशासनिक कार्य और परीक्षा से जुड़े मसले भी अब जिले के भीतर ही सुलझ सकेंगे।\n• दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए: नए अनुमोदित पाठ्यक्रमों जैसे बीएससी, बीकॉम और बीएड में सीधे प्रवेश के रास्ते खुल गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 31 अगस्त की तय समयसीमा तक अपने शैक्षिक प्रमाणपत्रों के साथ आवेदन पूरा कर सकते हैं।\n• आसपास के महाविद्यालयों के लिए: भदोही और निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के डिग्री कॉलेजों को अब इस नए विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त होगी। इससे कॉलेज स्तर पर डिग्री मिलने और परीक्षाओं के आयोजन में होने वाली देरी पर विराम लगेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भदोही के किस कॉलेज को राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा मिला है?\nभदोही में 1951 से संचालित काशी नरेश पीजी कॉलेज (केएनपीजी) को अब राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है।\n\n2. काशी नरेश विश्वविद्यालय के लिए सरकार ने कितना बजट स्वीकृत किया है?\nविश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक विकास के लिए शासन की ओर से 21 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।\n\n3. काशी नरेश विश्वविद्यालय की पहली कुलपति कौन बनी हैं?\nप्रोफेसर उमा श्रीवास्तव ने 16 मई 2026 को विश्वविद्यालय की प्रथम कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है।\n\n4. विश्वविद्यालय में किन नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी गई है?\nविश्वविद्यालय में बीएससी, बीकॉम और बीएड सहित कई अन्य नए पाठ्यक्रमों को अनुमोदित किया गया है।\n\n5. परास्नातक दाखिले के लिए आवेदन की अंतिम तिथि क्या रखी गई है?\nपरास्नातक पाठ्यक्रमों में आवश्यक शैक्षिक प्रमाणपत्रों के साथ आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की गई है।\n\nनेता परिचय: योगी आदित्यनाथ\n• पद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री\n• जन्म: 5 जून 1972, पंचूर, उत्तराखंड\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: गणित में बीएससी\n\n2017 से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखनाथ मठ के महंत। मूल नाम अजय मोहन सिंह बिष्ट; गोरखपुर से पाँच बार सांसद रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• सांसद, गोरखपुर (1998–2017, पाँच बार)\n• गोरखनाथ मठ के महंत (2014 से)\n• उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2017 से)\n• लगातार दो कार्यकाल जीतने वाले पहले यूपी मुख्यमंत्री\n• हिंदू युवा वाहिनी संगठन की स्थापना की\n\nरोचक तथ्य\n• 1998 में 26 वर्ष की आयु में देश के सबसे युवा सांसदों में से एक बने।\n• राज्य की कमान संभालने से पहले संन्यास लेकर महंत बने।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-10-04",
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