भारत और रूस रिश्तों पर परामर्श समिति की बैठक, विदेश मंत्री ने बहुआयामी सहयोग की समीक्षा की विदेश मंत्री एस. जयशंकर की अध्यक्षता में भारत और रूस संबंधों पर संसद की परामर्श समिति की अहम बैठक हुई, जिसमें व्यापार, निवेश और कूटनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संसद की परामर्श समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के तमाम प्रमुख आयामों की प्रगति की समीक्षा की गई और भविष्य के सहयोग की रूपरेखा पर विचार-विमर्श हुआ। व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर बैठक में दोनों देशों के बीच जारी बहुआयामी साझेदारी के विभिन्न पहलुओं का व्यापक जायजा लिया गया। मुख्य रूप से व्यापारिक आदान-प्रदान, रणनीतिक निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक संबंध और दोनों देशों की जनता के बीच आपसी संपर्क (पी2पी) को बढ़ावा देने पर केंद्रित चर्चा हुई। आर्थिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य को निरंतर बनाए रखने की आवश्यकता रेखांकित की गई। संवाद और कूटनीति के जरिए शांति का समर्थन द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक प्रयासों के महत्व पर भी बल दिया गया। भारत ने विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के मार्ग पर अपनी निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि वैश्विक स्थिरता और क्षेत्रीय शांति को बनाए रखने के लिए रचनात्मक बातचीत ही सबसे प्रभावी माध्यम है। विदेश मंत्री ने क्या कहा विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के विवरण साझा करते हुए कहा कि उन्होंने भारत और रूस संबंधों पर परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और जन-जन के संपर्क सहित बहुआयामी जुड़ाव के विभिन्न पहलुओं को रेखांकित किया गया, साथ ही कूटनीति और संवाद के प्रति सक्रिय समर्थन भी व्यक्त किया गया। इसका आप पर असर इस द्विपक्षीय समीक्षा बैठक से भारत की ऊर्जा और व्यापारिक प्राथमिकताओं को प्रत्यक्ष मजबूती मिलेगी। • ऊर्जा आपूर्ति: द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी मजबूत होने से देश में कच्चे तेल और ईंधन की स्थिर उपलब्धता बनी रहने में मदद मिलती है। इसका सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ता है। • व्यापार और उद्योग: दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापारिक ढांचे के विस्तार से भारतीय निर्यातकों को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे विनिर्माण और कृषि उत्पादों के द्विपक्षीय लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा। • कूटनीतिक संतुलन: संवाद और कूटनीति पर भारत का जोर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। इससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच आर्थिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। • सांस्कृतिक व जन-संपर्क: जनता के बीच आपसी संपर्क सुगम होने से शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्रों में आदान-प्रदान आसान बनता है। छात्रों और पेशेवरों के लिए आवागमन के रास्ते अधिक सुगम हो सकते हैं। सवाल-जवाब 1. परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता किसने की? इस बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की। 2. बैठक का मुख्य विषय क्या था? बैठक का मुख्य विषय भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों और साझेदारी की समीक्षा करना था। 3. बैठक में किन प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हुई? बैठक में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, संस्कृति और दोनों देशों की जनता के बीच आपसी संपर्क पर चर्चा की गई। 4. विवादों और संघर्षों के समाधान को लेकर क्या रुख दोहराया गया? भारत ने विवादों को समाप्त करने और शांति बहाली के लिए संवाद और कूटनीति के मार्ग का सक्रिय समर्थन दोहराया। नेता परिचय: एस. जयशंकर • पद: विदेश मंत्री • जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी 2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चीन में राजदूत (2009–2013) • अमेरिका में राजदूत (2013–2015) • भारत के विदेश सचिव (2015–2018) • विदेश मंत्री (2019 से) • भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका रोचक तथ्य • विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। • चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे। https://trendkia.com/neta-ji/bharata-aura-rusa-rishton-para-paramarsha-samiti-ki-baithaka-videsha-mntri-ne-bahuayami-sahayoga-ki-samiksha-ki-42294 TrendKia — Har trend, sabse pehle.