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  "title": "भारत-यूरोपीय संघ की तीसरी टेक्नोलॉजी और व्यापार परिषद बैठक के बाद विदेश मंत्री ने मीडिया से की बड़ी बातचीत",
  "summary": "विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-यूरोपीय संघ की तीसरी ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत की और सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की, यह घटनाक्रम भारत-यूरोपीय संघ के हालिया बड़े व्यापार समझौते के ठीक बाद सामने आया है।",
  "content": "विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत और यूरोपीय संघ की तीसरी ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत की और इसकी जानकारी सोशल मीडिया मंच X पर भारत और यूरोपीय संघ के झंडों के साथ साझा की। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार को लेकर हलचल पहले से ही तेज है।\n\nट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल का मकसद क्या है\nभारत और यूरोपीय संघ के बीच यह मंच व्यापार और तकनीक से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों को नियमित रूप से बातचीत का मौका देता है। तीसरी बैठक के बाद पत्रकारों से बात करना दिखाता है कि यह सहयोग अब सिर्फ औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वजनिक तौर पर भी इसकी जानकारी साझा की जा रही है।\n\nबड़े व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि\nखबरों के मुताबिक भारत और यूरोपीय संघ ने हाल ही में एक बड़ा और ऐतिहासिक व्यापार समझौता पूरा किया है, जिसे कई जगह मीडिया में सारे व्यापार समझौतों में सबसे बड़ा बताया गया। इस समझौते से पहले यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष काया कालास दिल्ली पहुंची थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते पर कहा था कि इससे भारत के किसानों और मछुआरों को सीधा फायदा मिलेगा। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच वर्षों से चल रही बातचीत का नतीजा है, जिसे लेकर एस. जयशंकर पहले भी कह चुके हैं कि भारत इस व्यापार समझौते को लेकर बातचीत का निर्णायक अंत चाहता है।\n\nघर में उठे सवाल\nइस व्यापार समझौते को लेकर देश के भीतर भी सवाल उठे हैं। कांग्रेस ने समझौते पर खुशी मनाने के बीच यह मुद्दा उठाया कि यूरोपीय संघ भारत से जाने वाले स्टील और एल्युमिनियम पर कार्बन टैक्स लगाएगा, जिससे भारतीय उद्योग पर असर पड़ सकता है।\n\nट्रंप फैक्टर\nभारत-यूरोपीय संघ समझौते के तुरंत बाद अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के साथ अपना अलग व्यापार समझौता किया, जिसे यूरोप से पीछे न रहने की कोशिश के तौर पर देखा गया। इससे पहले भारत ने अमेरिकी अधिकारी लुटनिक के इस दावे को खारिज किया था कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता अटकी हुई है, और बताया था कि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप वर्ष 2025 में आठ बार बात कर चुके हैं।\n\nयूरोपीय संघ की तरफ से क्या कहा गया\nयूरोपीय संघ के व्यापार प्रमुख ने कहा है कि अमेरिका ने भरोसा दिलाया है कि वह अपने व्यापार समझौते का सम्मान करेगा। यह बयान भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ, दोनों समझौतों को लेकर बने माहौल को शांत करने की कोशिश जैसा लगता है।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nएस. जयशंकर की इस पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया मिली जुली रही। कुछ लोगों ने भारत-यूरोपीय संघ की इस साझेदारी को व्यापार, तकनीक और युवाओं के लिए नए अवसर बताते हुए इसका स्वागत किया, जबकि कुछ ने इसे हल्के-फुल्के अंदाज में लिया। वहीं कुछ यूजर्स ने इस मौके का इस्तेमाल कर घरेलू आर्थिक नीतियों और वीजा नियमों से जुड़ी अपनी शिकायतें भी सामने रखीं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से किसानों, मछुआरों और निर्यातकों को नए बाजार मिलने की उम्मीद है, लेकिन स्टील और एल्युमिनियम पर यूरोपीय संघ के कार्बन टैक्स से जुड़े उद्योगों पर लागत का असर पड़ सकता है।\n• आम उपभोक्ताओं के लिए: भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ, दोनों तरफ के व्यापार समझौते आने वाले समय में आयात-निर्यात होने वाले उत्पादों की कीमतों और उपलब्धता को प्रभावित कर सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया?\nउन्होंने बताया कि वह भारत-यूरोपीय संघ की तीसरी ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल बैठक के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे, और इसके साथ भारत व यूरोपीय संघ के झंडे लगाए।\n\n2. ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल क्या है?\nयह भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार और तकनीक के मुद्दों पर नियमित बातचीत के लिए बना एक मंच है, यह इसकी तीसरी बैठक थी।\n\n3. भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौते से किसे फायदा होगा?\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुताबिक इस समझौते से भारत के किसानों और मछुआरों को सीधा फायदा मिलेगा।\n\n4. कांग्रेस ने इस समझौते पर क्या चिंता जताई?\nकांग्रेस ने कहा कि यूरोपीय संघ भारत से जाने वाले स्टील और एल्युमिनियम पर कार्बन टैक्स लगाएगा, जिससे भारतीय उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।\n\n5. डोनाल्ड ट्रंप का इससे क्या संबंध है?\nभारत-यूरोपीय संघ समझौते के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के साथ अपना अलग व्यापार समझौता किया।\n\n6. काया कालास कौन हैं और उनका इससे क्या संबंध है?\nकाया कालास यूरोपीय संघ की उपाध्यक्ष हैं और व्यापार समझौते से पहले वह दिल्ली पहुंची थीं।\n\nनेता परिचय: एस. जयशंकर\n• पद: विदेश मंत्री\n• जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी\n\n2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• चीन में राजदूत (2009–2013)\n• अमेरिका में राजदूत (2013–2015)\n• भारत के विदेश सचिव (2015–2018)\n• विदेश मंत्री (2019 से)\n• भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका\n\nरोचक तथ्य\n• विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं।\n• चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-07-15",
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