# डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर लखनऊ में योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि

> योगी आदित्यनाथ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर लखनऊ में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी साझा की।

**Type:** article · **Category:** नेता जी · **Published:** 2026-07-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/neta-ji/do-shyama-prasada-mukharji-ki-jaynti-para-lakhanau-men-yogi-adityanatha-ne-di-shraddhanjali-5129 · **Language:** Hindi
**Tags:** myogiadityanath

योगी आदित्यनाथ (@myogiadityanath) ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने आज लखनऊ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह मौका डॉ. मुखर्जी की जयंती का था और पोस्ट में उन्हें भारत माता का महान सपूत तथा भारतीय जनसंघ का संस्थापक अध्यक्ष बताया गया।

## पोस्ट में क्या कहा गया
पोस्ट में लिखा गया कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के मौके पर लखनऊ में उनकी प्रतिमा पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद पोस्ट में यह भी कहा गया कि यह बड़े सौभाग्य की बात है कि डॉ. मुखर्जी ने बंगाल को पाकिस्तान के प्रभाव से बचाने की दिशा में अहम भूमिका निभाई थी। पोस्ट का यह हिस्सा एक लिंक के साथ अधूरा छूट गया, इसलिए आगे की पूरी बात सामने नहीं आ सकी।

## कौन थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शिक्षाविद् और चिंतक थे, जिन्होंने भारतीय जनसंघ की नींव रखी थी। यही संगठन आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक बुनियाद बना। इससे पहले 1943 से 1946 के बीच वे अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष भी रहे। उन्हें देश की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले नेता के तौर पर याद किया जाता है, और भाजपा नेता समय-समय पर उनकी सोच को समय से आगे की बताते रहे हैं।

## देशभर में हाल की श्रद्धांजलियां
हाल के दिनों में भाजपा के कई नेताओं ने डॉ. मुखर्जी को याद किया है। झारखंड में रघुवर दास ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी राष्ट्र निर्माण के लिए पथप्रदर्शक हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने देश की एकता और अखंडता के लिए सबसे बड़ा बलिदान दिया। वहीं मुंबई में भाजपा नेता दिलीप घोष ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के संघर्ष की वजह से ही पश्चिम बंगाल बच सका, और उन्होंने उन्हें भारत रत्न दिए जाने की मांग की।

## अनुच्छेद 370 से जुड़ाव
भाजपा नेता यह भी कहते रहे हैं कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले ने डॉ. मुखर्जी के उस सपने को पूरा किया, जिसमें वे देश में एक जैसी संवैधानिक व्यवस्था चाहते थे। योगी आदित्यनाथ खुद भी पहले कह चुके हैं कि डॉ. मुखर्जी के बलिदान दिवस पर देश में एक विधान का सपना साकार होता दिख रहा है।

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## सवाल-जवाब

### 1. योगी आदित्यनाथ ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि कहां दी?
उन्होंने लखनऊ में डॉ. मुखर्जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

### 2. यह श्रद्धांजलि किस मौके पर दी गई?
यह श्रद्धांजलि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर दी गई।

### 3. डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कौन थे?
वे शिक्षाविद्, चिंतक और भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष थे, और 1943 से 1946 तक अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष भी रहे।

### 4. योगी आदित्यनाथ ने पोस्ट में बंगाल को लेकर क्या लिखा?
उन्होंने लिखा कि डॉ. मुखर्जी ने बंगाल को पाकिस्तान के प्रभाव से बचाने में अहम भूमिका निभाई, हालांकि पोस्ट का यह हिस्सा एक लिंक के साथ अधूरा रह गया।

### 5. भाजपा नेता डॉ. मुखर्जी को भारत रत्न देने की मांग क्यों कर रहे हैं?
मुंबई में दिलीप घोष ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के संघर्ष की वजह से पश्चिम बंगाल बच सका, इसलिए उन्होंने यह मांग उठाई।

### 6. भाजपा नेता अनुच्छेद 370 को डॉ. मुखर्जी से कैसे जोड़ते हैं?
उनका कहना है कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने से डॉ. मुखर्जी का एक जैसी संवैधानिक व्यवस्था वाला सपना पूरा हुआ।

## नेता परिचय: योगी आदित्यनाथ
- **पद:** उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
- **जन्म:** 5 जून 1972, पंचूर, उत्तराखंड
- **पार्टी:** भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
- **शिक्षा:** गणित में बीएससी

2017 से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखनाथ मठ के महंत। मूल नाम अजय मोहन सिंह बिष्ट; गोरखपुर से पाँच बार सांसद रहे।

### राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां
- सांसद, गोरखपुर (1998–2017, पाँच बार)
- गोरखनाथ मठ के महंत (2014 से)
- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2017 से)
- लगातार दो कार्यकाल जीतने वाले पहले यूपी मुख्यमंत्री
- हिंदू युवा वाहिनी संगठन की स्थापना की

### रोचक तथ्य
- 1998 में 26 वर्ष की आयु में देश के सबसे युवा सांसदों में से एक बने।
- राज्य की कमान संभालने से पहले संन्यास लेकर महंत बने।


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