एस. जयशंकर ने युवा खिलाड़ियों से की मुलाकात, खेलकूद को बढ़ावा देने पर दिया जोर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली के एक केंद्रीय विद्यालय में युवा स्क्वॉश खिलाड़ियों से मुलाकात की और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत के युवाओं में अपार प्रतिभा और ऊर्जा छिपी हुई है, जिसे सही दिशा में मार्गदर्शन देने की जरूरत है। देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने और नई प्रतिभाओं को तराशने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में राजधानी दिल्ली के एंड्रयूज गंज स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय का दौरा किया और वहां अभ्यास कर रहे साठ उभरते हुए स्क्वॉश खिलाड़ियों के साथ सीधा संवाद किया। युवाओं की प्रतिभा और खेल विकास देशभर के युवाओं में खेलकूद की क्षमता को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है। नीति निर्माताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि भारत के युवाओं और विशेषकर पूर्वोत्तर तथा अन्य क्षेत्रों में खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए जमीनी स्तर पर सही प्रशिक्षण और आधुनिक बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है। शिक्षा और खेल का यह मेल न केवल शारीरिक विकास में मदद करता है, बल्कि छात्रों को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाता है। विभिन्न मंचों पर यह बात बार-बार सामने आई है कि शुरुआती दौर से ही बच्चों को सही खेल सुविधाएं मिलने पर देश का भविष्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक चमक सकता है। स्कॉश का बढ़ता दायरा और ओलंपिक का सफर आगामी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को ध्यान में रखते हुए खेलों का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। स्क्वॉश जैसे खेलों को लेकर युवाओं में उत्साह लगातार बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में इस खेल का कद और अधिक ऊंचा होने वाला है, क्योंकि स्क्वॉश को आधिकारिक रूप से वर्ष 2028 के ओलंपिक खेलों में शामिल कर लिया गया है। इस ऐतिहासिक बदलाव के बाद से देश में इस खेल के प्रति रुचि काफी बढ़ गई है और आने वाले समय में भारत से कई विश्वस्तरीय खिलाड़ी तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है। स्कूल स्तर पर इस तरह के खेलों को बढ़ावा मिलने से भविष्य के चैंपियन तैयार करने में खासी मदद मिलेगी। जनता की प्रतिक्रिया इस मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। जहां कई नागरिकों ने जमीनी स्तर पर युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के इस कदम की सराहना की, वहीं कुछ लोगों ने स्कूलों में पारंपरिक खेलों जैसे कुश्ती को भी बढ़ावा देने और खेल बुनियादी ढांचे के विस्तार की वकालत की। इसका आप पर असर यह खबर मुख्य रूप से खेल के क्षेत्र में नीतिगत प्रोत्साहन और स्कूली स्तर पर खेल संस्कृति से जुड़ी है, जिसका सीधा असर छात्रों और उभरते खिलाड़ियों पर पड़ता है। • भारत में: देश भर के स्कूलों और अकादमियों में खेल सुविधाओं के विस्तार तथा ओलंपिक खेलों के लिए नई प्रतिभाओं को तराशने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिलेंगे। • दिल्ली में: स्थानीय स्तर पर केंद्रीय विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलने से विद्यार्थियों को पेशेवर कोचिंग और बेहतर बुनियादी ढांचा मिलने की उम्मीद बढ़ती है। सवाल-जवाब 1. एस. जयशंकर ने किस स्कूल का दौरा किया? उन्होंने नई दिल्ली के एंड्रयूज गंज स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय का दौरा किया। 2. इस दौरान मंत्री ने कितने खिलाड़ियों से मुलाकात की? उन्होंने वहां अभ्यास कर रहे 60 उभरते हुए स्क्वॉश खिलाड़ियों से मुलाकात की। 3. स्कवॉश को लेकर क्या खास बात सामने आई है? स्कवॉश को वर्ष 2028 के ओलंपिक खेलों में एक आधिकारिक खेल के रूप में शामिल किया गया है। 4. इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या था? इसका उद्देश्य युवाओं की खेल प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना था। नेता परिचय: एस. जयशंकर • पद: विदेश मंत्री • जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी 2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चीन में राजदूत (2009–2013) • अमेरिका में राजदूत (2013–2015) • भारत के विदेश सचिव (2015–2018) • विदेश मंत्री (2019 से) • भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका रोचक तथ्य • विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। • चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे। https://trendkia.com/neta-ji/esa-jayashnkara-ne-yuva-khilariyon-se-ki-mulakata-khelakuda-ko-barhava-dene-para-diya-jora-24193 TrendKia — Har trend, sabse pehle.