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  "type": "article",
  "title": "गांधी जयंती पर एस जयशंकर ने बापू को किया नमन, मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत को बताया उनके विचारों का विस्तार",
  "summary": "गांधी जयंती के पावन अवसर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सत्य और अहिंसा के उनके वैश्विक संदेश को याद किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत अभियान जैसी पहलों के माध्यम से बापू के स्वदेशी तथा स्वच्छता के विजन को जमीन पर उतार रही है।",
  "content": "राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी जा रही है। इस मौके पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सत्य, अहिंसा और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता के मूल्यों को याद करते हुए बापू को नमन किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि महात्मा गांधी के विचार न केवल वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोगों को निरंतर प्रेरित कर रहे हैं, बल्कि आधुनिक भारत की प्रमुख विकास योजनाओं में भी उनकी स्पष्ट झलक दिखाई देती है।\n\nविदेश मंत्री ने बापू के विचारों को विकास योजनाओं से जोड़ा\nएस जयशंकर ने इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया कि बापू के आदर्श केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वर्तमान प्रशासनिक प्राथमिकताओं का अभिन्न हिस्सा हैं। उनके अनुसार महात्मा गांधी का स्वदेशी का दृष्टिकोण आज मेक इन इंडिया पहल के रूप में साकार हो रहा है, जिससे देश में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिल रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान को बापू के स्वच्छता संकल्प की वास्तविक सिद्धि बताया और कहा कि सरकार इन राष्ट्रीय अभियानों के जरिए उनके सपनों को यथार्थ में बदल रही है।\n\nसत्य और अहिंसा का वैश्विक प्रभाव\nविदेश मंत्री ने अपने संदेश में विशेष रूप से रेखांकित किया कि महात्मा गांधी द्वारा स्थापित सत्य और अहिंसा की विरासत ने पूरी दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। उनके सिद्धांतों ने न केवल भारत के स्वाधीनता संग्राम को दिशा दी, बल्कि विश्व भर में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता के संघर्षों को नई ऊर्जा प्रदान की। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक शांति के संदर्भ में भी गांधीवादी मूल्यों को आज एक प्रभावी और प्रासंगिक मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है।\n\nकौन थे महात्मा गांधी\nमोहनदास करमचंद गांधी भारत के एक प्रमुख वकील, उपनिवेशवाद विरोधी राष्ट्रवादी नेता और राजनीतिक नीतिशास्त्री थे। उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत से भारत की आजादी के लिए चलाए गए जनांदोलन का नेतृत्व अहिंसक प्रतिरोध के दम पर किया। उनके इस शांतिपूर्ण संघर्ष ने आगे चलकर पूरी दुनिया में नागरिक अधिकारों और स्वतंत्रता के बड़े आंदोलनों को प्रेरित किया। वर्ष 1914 में दक्षिण अफ्रीका के दौरान उन्हें पहली बार 'महात्मा' की उपाधि दी गई थी, जिसे आज पूरे विश्व में अत्यंत सम्मान के साथ प्रयोग किया जाता है।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nसोशल मीडिया पर इस श्रद्धांजलि संदेश के सामने आने के बाद नागरिकों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं। कई लोगों ने बापू के योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए, जबकि बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं ने उसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती होने का उल्लेख करते हुए उनके असाधारण नेतृत्व और सादगी को भी समान रूप से याद करने का आग्रह किया।\n\nइसका आप पर असर\nगांधी जयंती पर दिए गए इस संदेश का मुख्य व्यावहारिक प्रभाव राष्ट्रीय कार्यक्रमों और सार्वजनिक जागरूकता के प्रति नागरिकों की भागीदारी पर पड़ता है।\n\n• नागरिक चेतना: सार्वजनिक स्वच्छता और स्थानीय उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा मिलता है। आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता बनाए रखने और घरेलू वस्तुओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित होते हैं।\n• घरेलू उद्योग: स्थानीय विनिर्माताओं और कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है। स्वदेशी और स्थानीय उत्पादन पर बल दिए जाने से छोटे उद्यमियों के लिए कारोबारी संभावनाएं बेहतर होती हैं।\n• प्रशासनिक दिशा: सरकारी विभागों में विकास योजनाओं को तेज गति दी जाती है। इससे बुनियादी ढांचागत स्वच्छता और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के प्रयासों को बल मिलता है।\n• सांस्कृतिक जागरूकता: नई पीढ़ी को राष्ट्रीय इतिहास और नैतिक मूल्यों की जानकारी मिलती है। शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक मंचों पर राष्ट्र निर्माताओं के योगदान पर चर्चाएं आयोजित होती हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गांधी जयंती पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने क्या संदेश दिया?\nविदेश मंत्री ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सत्य और अहिंसा के वैश्विक प्रभाव को याद किया तथा मेक इन इंडिया और स्वच्छ भारत को उनके विचारों का विस्तार बताया।\n\n2. एस जयशंकर ने मेक इन इंडिया को गांधी जी के किस विचार से जोड़ा?\nउन्होंने मेक इन इंडिया पहल को महात्मा गांधी के स्वदेशी के दृष्टिकोण को साकार करने वाला कदम बताया।\n\n3. महात्मा गांधी को 'महात्मा' की उपाधि कब और कहां मिली थी?\nदस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1914 में दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान उन्हें पहली बार 'महात्मा' की उपाधि दी गई थी।\n\n4. सोशल मीडिया पर जनता ने इस संदेश पर क्या प्रतिक्रिया दी?\nनागरिकों ने बापू को नमन करने के साथ-साथ उसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को भी याद रखने की बात कही।\n\nनेता परिचय: एस. जयशंकर\n• पद: विदेश मंत्री\n• जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी\n\n2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• चीन में राजदूत (2009–2013)\n• अमेरिका में राजदूत (2013–2015)\n• भारत के विदेश सचिव (2015–2018)\n• विदेश मंत्री (2019 से)\n• भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका\n\nरोचक तथ्य\n• विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं।\n• चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-10-02",
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