इसरो ने जीएसएलवी-एफ18 से एनवीएस-03 सैटेलाइट किया लॉन्च, नाविक नेविगेशन प्रणाली को मिली नई मजबूती भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिए अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को कक्षा में स्थापित कर दिया है, जिससे देश की स्वदेशी नाविक प्रणाली की स्थिति निर्धारण क्षमता मजबूत हुई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के माध्यम से अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। इस सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत की क्षेत्रीय उपग्रह नेविगेशन प्रणाली नाविक (NavIC) का न्यूनतम परिचालन ढांचा बहाल हो गया है। एनवीएस श्रृंखला का यह तीसरा उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित होने से देश के भीतर और पड़ोसी क्षेत्रों में सटीक स्थिति, नेविगेशन तथा सटीक समय निर्धारण की क्षमताओं में उल्लेखनीय विस्तार होगा। नाविक उपग्रह समूह का परिचालन फिर हुआ पूरी तरह सक्रिय इसरो प्रमुख वी नारायणन ने इस मिशन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि एनवीएस-03 के कक्षा में स्थापित होने से नाविक उपग्रह समूह चार उपग्रहों के आवश्यक परिचालन विन्यास में लौट आया है। यह प्रणाली भारत और उसके आसपास के क्षेत्रों में उपयोगकर्ताओं को रियल-टाइम पोजिशनिंग और टाइमिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार की गई है। स्वदेशी तकनीक पर आधारित यह नेटवर्क नागरिक उड्डयन, समुद्री परिवहन, व्यक्तिगत गतिशीलता और रक्षा क्षेत्र की रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एस जयशंकर और अन्य शीर्ष नेताओं ने दी बधाई इसरो की इस तकनीकी उपलब्धि पर केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया पर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और औद्योगिक सहयोगियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एनवीएस-03 का प्रक्षेपण हमारी स्वदेशी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली नाविक को मजबूत करेगा, जिससे पूरे भारत और उसके बाहर पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग क्षमताओं में सुधार होगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और बिहार के मुख्यमंत्री ने भी वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दीं और भारत की अंतरिक्ष यात्रा में इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण बताया। स्वदेशी नेविगेशन क्षमता का सामरिक महत्व एनवीएस श्रृंखला के उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण भारत की विदेशी नेविगेशन प्रणालियों पर निर्भरता घटाने के प्रयासों का अहम हिस्सा है। आधुनिक दूरसंचार नेटवर्क, डिजिटल मैपिंग सेवाओं, परिवहन बेड़े के प्रबंधन और आपातकालीन आपदा राहत कार्यों में सटीक समय और स्थिति के आंकड़े बेहद जरूरी होते हैं। नए उपग्रह के जुड़ने से सिग्नल की निरंतरता और विश्वसनीयता पहले से कहीं अधिक पुख्ता हो गई है। जनता की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर नागरिकों ने वैज्ञानिकों की इस सफलता की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे देश के तकनीकी स्वावलंबन की दिशा में बड़ा कदम बताया। आम लोगों ने विशेष रूप से इंजीनियरिंग और अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए इसे एक बड़ा प्रेरणास्रोत माना। इसका आप पर असर एनवीएस-03 उपग्रह के सक्रिय होने से आम नागरिकों और उद्योगों को अधिक सटीक और निर्बाध डिजिटल लोकेशन सेवाएं मिलेंगी। • भारत में: देश भर में मोबाइल नेविगेशन, लॉजिस्टिक्स ट्रैकिंग और नागरिक उड्डयन को अधिक मजबूत स्वदेशी जीपीएस विकल्प मिलेगा। इससे विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर सटीक समय और स्थिति के आंकड़े उपलब्ध रहेंगे। • तकनीकी उपयोगकर्ताओं के लिए: परिवहन ऑपरेटरों और डिजिटल मैपिंग सेवाओं को सिग्नल टूटने की समस्या से राहत मिलेगी। नए उपग्रह से उपकरणों में सटीक रूट और लोकेशन ट्रैकिंग अधिक विश्वसनीय हो जाएगी। • आपातकालीन सेवाओं के लिए: आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सुदूर इलाकों में बचाव कार्यों के दौरान बेहतर लोकेशन ट्रैकिंग का लाभ मिलेगा। इससे संकट के समय त्वरित राहत पहुंचाने में सुविधा होगी। • रणनीतिक सुरक्षा के लिए: देश के समुद्री और हवाई सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वायत्त नेविगेशन सुरक्षा मजबूत होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को किसी भी बाहरी रुकावट के बिना सटीक सेवाएं मिलती रहेंगी। सवाल-जवाब 1. एनवीएस-03 उपग्रह को किस रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया? इसरो ने एनवीएस-03 उपग्रह को अपने जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा। 2. नाविक प्रणाली के लिए इस प्रक्षेपण का क्या महत्व है? इस उपग्रह के जुड़ने से नाविक उपग्रह समूह चार उपग्रहों के आवश्यक परिचालन विन्यास में वापस लौट आया है। 3. एनवीएस श्रृंखला के इस उपग्रह का क्रम क्या है? यह इसरो की अगली पीढ़ी की नेविगेशन श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। 4. इसरो के वर्तमान प्रमुख कौन हैं जिन्होंने इस सफलता की घोषणा की? इसरो प्रमुख वी नारायणन ने उपग्रह के सफल प्रक्षेपण और नाविक के बहाल होने की पुष्टि की। 5. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मिशन पर क्या प्रतिक्रिया दी? उन्होंने इसरो और उद्योग सहयोगियों को बधाई दी और कहा कि यह प्रक्षेपण नाविक की स्थिति, नेविगेशन और समय क्षमताओं को मजबूत करेगा। नेता परिचय: एस. जयशंकर • पद: विदेश मंत्री • जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी 2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चीन में राजदूत (2009–2013) • अमेरिका में राजदूत (2013–2015) • भारत के विदेश सचिव (2015–2018) • विदेश मंत्री (2019 से) • भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका रोचक तथ्य • विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। • चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे। https://trendkia.com/neta-ji/isaro-ne-jiesaelavi-epha18-se-enaviesa-03-saitelaita-kiya-loncha-navika-nevigeshana-pranali-ko-mili-nai-majabuti-54000 TrendKia — Har trend, sabse pehle.