# जंतर मंतर पर अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर शशि थरूर ने उठाए सवाल

> कांग्रेस नेता शशि थरूर ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और अंकिता भंडारी के माता-पिता की हिरासत को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं।

**Type:** article · **Category:** नेता जी · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/neta-ji/jntara-mntara-para-ankita-bhndari-ke-mata-pita-ko-hirasata-men-lie-jane-para-shashi-tharura-ne-uthae-savala-47814 · **Language:** Hindi
**Tags:** ShashiTharoor

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों और अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने के कदम ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। तिरंगा हाथ में लेकर न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे युवाओं और पीड़ित परिवार के खिलाफ हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई की विपक्षी दलों ने कड़ी आलोचना की है। इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शन की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर सार्वजनिक बहस छिड़ गई है।

## प्रशासनिक कार्रवाई और विरोध का दायरा
जंतर मंतर पर न्याय की गुहार लगाने पहुंचे नागरिकों और अंकिता भंडारी के परिजनों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कर रहे थे और राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपनी बात रख रहे थे। इसके विपरीत, धरना स्थल पर मौजूद सुरक्षा बलों ने इलाके के नियमों और प्रतिबंधों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और मामले ने तुरंत राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक रूप अख्तियार कर लिया।

## शशि थरूर ने क्या कहा
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने सार्वजनिक मंच पर अपनी तीखी असहमति दर्ज कराई। थरूर ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने अपनी जवाबदेही की जिम्मेदारी को पूरी तरह त्याग दिया है और अब वह सवाल पूछने वालों की आवाज दबाने के लिए सिर्फ हिरासत का सहारा ले रही है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि जंतर मंतर पर युवा नागरिक तिरंगा लहराते हुए अपने शांतिपूर्ण विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे, लेकिन उन्हें सुरक्षा व्यवस्था की सख्ती का सामना करना पड़ा।

## जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल
अंकिता भंडारी मामले में लंबे समय से परिजन निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। राजधानी के प्रमुख विरोध स्थल पर पीड़ित माता-पिता की मौजूदगी आम लोगों और सामाजिक संगठनों के लिए एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई थी। आलोचकों का तर्क है कि नागरिकों द्वारा सरकार से पारदर्शिता और इंसाफ की मांग करना किसी भी जीवंत लोकतंत्र की पहचान है। जब पीड़ितों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाता है, तो इससे जनता में यह संदेश जाता है कि व्यवस्था निष्पक्ष संवाद करने के बजाय कठोर कदमों को प्राथमिकता दे रही है।

## जनता की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम और सार्वजनिक बयान के बाद आम लोगों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। जहां कई नागरिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन करते हुए पुलिसिया कार्रवाई को अनुचित ठहराया, वहीं अन्य लोगों ने धरना स्थल के नियमों, प्रशासनिक अनुमति और पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए इस तरह के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल भी उठाए।

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## इसका आप पर असर
यह घटनाक्रम नागरिक अधिकारों, सार्वजनिक प्रदर्शनों के नियमों और पीड़ितों के न्याय की मांग से सीधे जुड़ा हुआ है।

- **भारत में:** देश भर के नागरिकों के लिए यह मामला सार्वजनिक प्रदर्शनों और लोकतांत्रिक असहमति जताने के बुनियादी अधिकारों की सीमाओं को लेकर कानूनी समझ को महत्वपूर्ण बनाता है। किसी भी सार्वजनिक आंदोलन में भाग लेने से पूर्व स्थानीय अनुमति और दिशा-निर्देशों की जानकारी रखना अब बेहद आवश्यक हो गया है।
- **दिल्ली में:** राष्ट्रीय राजधानी के मध्य क्षेत्र में सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी के चलते जंतर मंतर और आसपास के मार्गों पर यातायात तथा सामान्य आवागमन प्रभावित हो सकता है। कनॉट प्लेस और नई दिल्ली क्षेत्र से गुजरने वाले दैनिक यात्रियों को पुलिस प्रतिबंधों और सुरक्षा जांच को देखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।
- **कानूनी अधिकार:** प्रदर्शनकारियों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण धरने के दौरान हिरासत संबंधी कानूनी प्रावधानों और अधिकारों के प्रति सजग रहना होगा। किसी भी अप्रत्याशित हिरासत की स्थिति में विधिक सहायता और औपचारिक प्रक्रियाओं की जानकारी होना जरूरी है।
- **प्रशासनिक निगरानी:** सार्वजनिक स्थलों पर बिना पूर्व अनुमति के एकत्र होने पर पुलिस की सतर्कता और पाबंदियां पहले से अधिक सख्त हो सकती हैं। छात्रों और सामाजिक संगठनों को किसी भी शांतिपूर्ण मार्च के आयोजन से पहले प्रशासनिक औपचारिकताओं की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को क्यों हिरासत में लिया गया?
सुरक्षा बलों ने धरना स्थल के नियमों और प्रशासनिक औपचारिकताओं के उल्लंघन का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों और परिजनों को हिरासत में लिया।

### 2. इस प्रदर्शन में अंकिता भंडारी के परिजनों की क्या भूमिका थी?
अंकिता भंडारी के माता-पिता अन्य युवा प्रदर्शनकारियों के साथ न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरने में शामिल हुए थे।

### 3. शशि थरूर ने इस घटना पर क्या बयान दिया?
शशि थरूर ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने जवाबदेही की अपनी जिम्मेदारी छोड़कर सवाल पूछने वालों को दबाने के लिए हिरासत का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

### 4. इस कार्रवाई पर जनता की क्या प्रतिक्रिया रही?
सार्वजनिक प्रतिक्रिया बंटी हुई रही, जहां कई लोगों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया तो कुछ ने नियमों के अनुपालन की आवश्यकता बताई।

## नेता परिचय: शशि थरूर
- **पद:** सांसद, तिरुवनंतपुरम
- **जन्म:** 9 मार्च 1956, लंदन, यूके
- **पार्टी:** भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
- **शिक्षा:** फ्लेचर स्कूल, टफ्ट्स से पीएचडी

2009 से तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और 25 से अधिक पुस्तकों के पुरस्कृत लेखक।

### राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां
- संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव (2002–2007)
- सांसद, तिरुवनंतपुरम (2009 से)
- विदेश राज्य मंत्री (2009–2010)
- विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष
- 25+ पुस्तकों के लेखक; साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता

### रोचक तथ्य
- 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे।
- 22 वर्ष की आयु में पीएचडी पूरी की — फ्लेचर स्कूल के इतिहास में सबसे कम उम्र में।


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