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  "type": "article",
  "title": "कांसा नक्काशी को पांच दशकों तक जिंदा रखने वाले चिरंजी लाल यादव पद्म श्री से सम्मानित",
  "summary": "राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में कलाकार श्री चिरंजी लाल यादव को कला के क्षेत्र में 'पद्म श्री' से सम्मानित किया। उन्होंने पिछले पांच दशकों से कांसा नक्काशी की परंपरागत कला को संरक्षित कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।",
  "content": "नई दिल्ली में आज एक ऐसे कलाकार को राष्ट्रीय सम्मान मिला जिन्होंने पांच दशकों तक एक दुर्लभ पारंपरिक कला को जीवित रखने का काम किया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने श्री चिरंजी लाल यादव को कला के क्षेत्र में 'पद्म श्री' से अलंकृत किया। यह सम्मान उन्हें 'कांसा नक्काशी' की समृद्ध कला को संरक्षित करने और उसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए दिया गया।\n\nकांसा नक्काशी: लुप्त होती कला को मिली नई जिंदगी\nकांसा नक्काशी एक पारंपरिक भारतीय शिल्पकला है जिसमें कांसे पर बेहद बारीक नक्काशी की जाती है। यह कला समय के साथ धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही थी, लेकिन श्री चिरंजी लाल यादव ने पिछले पांच दशकों से इस विरासत को बचाए रखने का बीड़ा उठाया। उन्होंने इस कला को सहेजा और संवारा, और साथ ही इसे देश की सीमाओं से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक नई पहचान दिलाई। उनके इस लंबे और धैर्यपूर्ण प्रयास ने एक लुप्त होती कला को फिर से जीवंत कर दिया।\n\nयोगी आदित्यनाथ ने X पर दी हार्दिक बधाई\nयोगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके श्री चिरंजी लाल यादव को हार्दिक बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने इस सम्मान को 'कांसा नक्काशी' के प्रति उनकी पांच दशकों की अनथक मेहनत और समर्पण का परिणाम बताया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस कलाकार ने इस पारंपरिक विधा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान से नवाजा है।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nइस पोस्ट पर कई लोगों ने श्री चिरंजी लाल यादव को बधाई देते हुए उनके जीवनभर के समर्पण और कांसा नक्काशी को मिली पहचान पर खुशी जताई, वहीं कुछ लोगों ने इस मंच का इस्तेमाल अपने इलाके की बिजली कटौती और सार्वजनिक सुरक्षा जैसी स्थानीय समस्याओं को उठाने के लिए किया।\n\nइसका आप पर असर\n• कला प्रेमियों और संस्कृति के जानकारों के लिए: पद्म श्री जैसे सम्मान कांसा नक्काशी जैसी लुप्त होती पारंपरिक कलाओं को मुख्यधारा में लाते हैं और नई पीढ़ी को इन विधाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।\n• देशभर के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए: यह सम्मान उन तमाम कारीगरों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो बिना किसी बड़ी पहचान के पारंपरिक कलाओं को जीवित रखे हुए हैं, यह दिखाता है कि लगन और मेहनत को एक दिन राष्ट्रीय पहचान जरूर मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चिरंजी लाल यादव को पद्म श्री क्यों दिया गया?\nउन्हें 'कांसा नक्काशी' की पारंपरिक कला को पांच दशकों तक संरक्षित करने और उसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए कला के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।\n\n2. यह सम्मान किसने दिया और कहां?\nराष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में श्री चिरंजी लाल यादव को पद्म श्री प्रदान किया।\n\n3. कांसा नक्काशी क्या होती है?\nकांसा नक्काशी एक पारंपरिक भारतीय शिल्पकला है जिसमें कांसे पर बेहद बारीक नक्काशी की जाती है।\n\n4. चिरंजी लाल यादव कितने समय से इस कला में काम कर रहे हैं?\nवे पिछले पांच दशकों से कांसा नक्काशी की कला को सहेजने और आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।\n\n5. योगी आदित्यनाथ ने इस सम्मान पर क्या कहा?\nयोगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके श्री चिरंजी लाल यादव को हार्दिक बधाई दी और उनकी पांच दशकों की अनथक लगन की सराहना की।\n\n6. इस कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान कैसे मिली?\nश्री चिरंजी लाल यादव के निरंतर प्रयासों की बदौलत कांसा नक्काशी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और यह क्षेत्रीय कला देश-विदेश में जानी जाने लगी।\n\nनेता परिचय: योगी आदित्यनाथ\n• पद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री\n• जन्म: 5 जून 1972, पंचूर, उत्तराखंड\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: गणित में बीएससी\n\n2017 से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखनाथ मठ के महंत। मूल नाम अजय मोहन सिंह बिष्ट; गोरखपुर से पाँच बार सांसद रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• सांसद, गोरखपुर (1998–2017, पाँच बार)\n• गोरखनाथ मठ के महंत (2014 से)\n• उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2017 से)\n• लगातार दो कार्यकाल जीतने वाले पहले यूपी मुख्यमंत्री\n• हिंदू युवा वाहिनी संगठन की स्थापना की\n\nरोचक तथ्य\n• 1998 में 26 वर्ष की आयु में देश के सबसे युवा सांसदों में से एक बने।\n• राज्य की कमान संभालने से पहले संन्यास लेकर महंत बने।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-06-23",
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