केरल के संगीतकार स्टीफन देवस्सी ने संस्कृत में रचा पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा, शशि थरूर बोले यही है वर्ल्ड म्यूज़िक की सच्ची परिभाषा केरल के संगीतकार स्टीफन देवस्सी ने एक पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा कंपोज़ और कंडक्ट किया जिसमें सारा गायन संस्कृत भाषा में था। शशि थरूर ने इस प्रस्तुति को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए इसे वर्ल्ड म्यूज़िक की सर्वोत्तम परिभाषा बताया। शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करके केरल के संगीतकार स्टीफन देवस्सी की खूब तारीफ की। थरूर ने बताया कि देवस्सी ने एक पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा कंपोज़ और कंडक्ट किया है, जिसमें गायन का पूरा हिस्सा संस्कृत भाषा में था। थरूर ने क्या लिखा? थरूर ने अपनी पोस्ट में इस प्रस्तुति को 'अद्भुत' बताया। उन्होंने लिखा कि केरल के स्टीफन देवस्सी ने एक पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा को कंपोज़ और कंडक्ट किया जिसमें पूरी तरह संस्कृत में गाया गया। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या 'वर्ल्ड म्यूज़िक' की इससे बेहतर कोई परिभाषा हो सकती है। संस्कृत और पश्चिमी संगीत का असाधारण संगम देवस्सी की इस रचना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उन्होंने पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा की पूरी परंपरा को अपनाते हुए भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत को उसके केंद्र में रखा। आमतौर पर संस्कृत को एक कठिन और धार्मिक कामों तक सीमित भाषा समझा जाता है, लेकिन इस प्रयोग ने दिखाया कि इसमें जबरदस्त लचीलापन और जीवंतता है। सदियों पहले यही भाषा पूरे एशिया और उसके परे दर्शन, विज्ञान और सौंदर्यशास्त्र की वाहक रही है। देवस्सी ने उस विरासत को एक वैश्विक संगीत मंच पर फिर से जीवंत कर दिया। जनता की प्रतिक्रिया थरूर की पोस्ट को सोशल मीडिया पर जोरदार समर्थन मिला। लोगों ने देवस्सी के इस अनूठे प्रयोग को भारतीय सांस्कृतिक आत्मविश्वास की एक शानदार मिसाल बताया और कहा कि यह भारत की प्राचीन भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने का एक बेहतरीन तरीका है। इसका आप पर असर • संस्कृत और कला में रुचि रखने वालों के लिए: यह प्रस्तुति साबित करती है कि संस्कृत जैसी प्राचीन भाषाएं वैश्विक कला मंचों पर भी उतनी ही असरदार हो सकती हैं। • भारत में: इस तरह के अनूठे प्रयोग भारतीय भाषाओं और शास्त्रीय विरासत को दुनिया के सामने नए रूप में पेश करने का रास्ता खोलते हैं और सांस्कृतिक गर्व को मज़बूत करते हैं। सवाल-जवाब 1. स्टीफन देवस्सी कौन हैं? स्टीफन देवस्सी केरल के एक संगीतकार हैं जिन्होंने एक पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा कंपोज़ और कंडक्ट किया जिसमें पूरा गायन संस्कृत में था। 2. इस ऑर्केस्ट्रा की खासियत क्या थी? इस प्रस्तुति में पश्चिमी वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया गया लेकिन सारा गायन केवल संस्कृत भाषा में था, जो एक बेहद दुर्लभ और अनूठा संगम है। 3. शशि थरूर ने इस प्रस्तुति के बारे में क्या कहा? थरूर ने इसे 'अद्भुत' बताया और कहा कि यह 'वर्ल्ड म्यूज़िक' की सबसे बेहतरीन परिभाषा हो सकती है। 4. थरूर ने यह पोस्ट कहाँ शेयर की? शशि थरूर ने यह पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की। 5. क्या संस्कृत आधुनिक संगीत के लिए उपयुक्त मानी जाती है? इस प्रस्तुति ने दिखाया कि संस्कृत में जबरदस्त जीवंतता और लचीलापन है जो इसे वैश्विक संगीत के मंच पर भी प्रभावशाली बनाती है। 6. इस पोस्ट पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही? सोशल मीडिया पर इसे जबरदस्त समर्थन मिला और लोगों ने देवस्सी के इस प्रयोग को भारतीय सांस्कृतिक आत्मविश्वास की मिसाल बताया। नेता परिचय: शशि थरूर • पद: सांसद, तिरुवनंतपुरम • जन्म: 9 मार्च 1956, लंदन, यूके • पार्टी: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस • शिक्षा: फ्लेचर स्कूल, टफ्ट्स से पीएचडी 2009 से तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव और 25 से अधिक पुस्तकों के पुरस्कृत लेखक। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव (2002–2007) • सांसद, तिरुवनंतपुरम (2009 से) • विदेश राज्य मंत्री (2009–2010) • विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष • 25+ पुस्तकों के लेखक; साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता रोचक तथ्य • 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दौड़ में दूसरे स्थान पर रहे। • 22 वर्ष की आयु में पीएचडी पूरी की — फ्लेचर स्कूल के इतिहास में सबसे कम उम्र में। https://trendkia.com/neta-ji/kerala-ke-sngitakara-stiphana-devassi-ne-snskrita-men-racha-pashchimi-rkestra-shashi-tharura-bole-yahi-hai-varlda-myuzika-ki-sachc-2275 TrendKia — Har trend, sabse pehle.