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  "type": "article",
  "title": "लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 संसद से पारित, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम",
  "summary": "संसद के दोनों सदनों ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता लाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।",
  "content": "भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 को पूरी तरह पारित कर दिया है। लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी इस विधेयक को मंजूरी मिलने से देशभर के लाखों अभ्यर्थियों के हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार हो गया है। इस नए कानून के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने वालों और संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।\n\nविधेयक के मुख्य प्रावधान और कड़े नियम\nनए संशोधन विधेयक में परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी रोकने के लिए कई बड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके अंतर्गत अनुचित साधनों का प्रयोग करने, प्रश्नपत्र लीक करने तथा परीक्षा केंद्रों में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी में लिप्त पाए जाने वाले दोषियों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष के कारावास की सजा तय की गई है। इसके अतिरिक्त, गंभीर मामलों में भारी जुर्माने और संपत्ति कुर्क करने जैसे कड़े कदम उठाने का भी प्रावधान है।\n\nकानून को प्रभावकारी बनाने के लिए मामलों की समयबद्ध जांच पूरी करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जांच प्रक्रियाओं को तेजी से निपटाने और मुकदमों की जल्द सुनवाई के लिए विशेष तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे न केवल फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि निर्दोष अभ्यर्थियों को बिना किसी देरी के त्वरित न्याय भी मिल सकेगा।\n\nसंसद के दोनों सदनों में पारित होने का घटनाक्रम\nसंसदीय कार्यवाही के दौरान इस कानून को पारित कराने के लिए विशेष तत्परता देखी गई। लोकसभा ने 29 जुलाई 2026 को गहन चर्चा के बाद लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 को अपनी सहमति प्रदान की थी। इसके ठीक अगले दिन, 30 जुलाई 2026 को राज्यसभा ने भी विपक्ष के वाकआउट के बीच ध्वनि मत से इस विधेयक को मंजूरी दे दी।\n\nसदन में विधेयक पर बहस के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखना देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक अति संवेदनशील विषय है। विपक्ष के विरोध और वाकआउट के बावजूद राज्यसभा में ध्वनि मत द्वारा इस महत्वपूर्ण विधेयक को स्वीकृत कर लिया गया।\n\nविदेश मंत्री एस जयशंकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वक्तव्य\nसंसद के दोनों सदनों से विधेयक के सफलतापूर्वक पारित होने पर केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा, \"दोनों सदनों द्वारा लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 का पारित होना भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की शुचिता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।\"\n\nइसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस विधायी कदम का स्वागत करते हुए कहा कि \"यह कानून हमारी परीक्षा प्रणाली को अत्यधिक मजबूत बनाएगा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।\" सरकारी पक्ष का मानना है कि इस कानून से देश के योग्य और मेधावी छात्रों का परीक्षा प्रणाली में विश्वास फिर से कायम होगा।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nसोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर इस कानून को लेकर नागरिकों और परीक्षार्थियों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली है। एक ओर जहां अधिकांश छात्रों और अभिभावकों ने कड़ी सजा के प्रावधानों का स्वागत करते हुए इसे पेपर लीक माफिया के खिलाफ आवश्यक कदम माना है, वहीं दूसरी ओर कई अभ्यर्थियों ने पूर्व में रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करने तथा जमीनी स्तर पर इसका सख्त क्रियान्वयन सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में अभ्यर्थियों के लिए:\n\n• कड़ा कानूनी संरक्षण: प्रतियोगी परीक्षा देने वाले लाखों छात्रों को पेपर लीक और धांधली से सुरक्षा मिलेगी, जिससे मेधावी उम्मीदवारों के अवसर सुरक्षित होंगे।\n• पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया: धोखाधड़ी के मामलों में समयबद्ध जांच और न्यूनतम 5 साल की जेल के प्रावधान से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और गति आएगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 संसद के किस सदन से कब पारित हुआ?\nयह विधेयक 29 जुलाई 2026 को लोकसभा द्वारा और 30 जुलाई 2026 को राज्यसभा द्वारा पारित किया गया।\n\n2. परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक करने पर न्यूनतम कितनी सजा का प्रावधान है?\nनए कानून के तहत अनुचित साधनों के प्रयोग और पेपर लीक में शामिल दोषियों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया है।\n\n3. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस विधेयक के बारे में क्या कहा?\nविदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दोनों सदनों द्वारा विधेयक का पारित होना भारत की लोक परीक्षा प्रणाली की ईमानदारी, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।\n\n4. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नए कानून पर क्या बयान दिया?\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह विधेयक परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाएगा और पेपर लीक में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।\n\nनेता परिचय: एस. जयशंकर\n• पद: विदेश मंत्री\n• जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी\n\n2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• चीन में राजदूत (2009–2013)\n• अमेरिका में राजदूत (2013–2015)\n• भारत के विदेश सचिव (2015–2018)\n• विदेश मंत्री (2019 से)\n• भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका\n\nरोचक तथ्य\n• विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं।\n• चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-07-31",
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