# नई दिल्ली में 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन के दौरान एस. जयशंकर ने वैश्विक रणनीतियों पर की चर्चा

> विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में जॉर्ज येओ योंग-बून और एन.के. सिंह के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक और आर्थिक विषयों पर संवाद किया।

**Type:** article · **Category:** नेता जी · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/neta-ji/new-delhi-men-5ven-kautilya-arthika-sammelana-ke-daurana-esa-jayashnkara-ne-vaishvika-rananitiyon-para-ki-charcha-43390 · **Language:** Hindi
**Tags:** DrSJaishankar

नई दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श हुआ। इस अवसर पर भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जॉर्ज येओ योंग-बून और एन.के. सिंह के साथ एक विशेष संवाद सत्र में भाग लिया। वैश्विक कूटनीति, बहुध्रुवीय व्यवस्था और दक्षिण एशियाई स्थिरता के लिहाज से यह मंच नीति निर्माताओं और रणनीतिकारों के बीच अहम चर्चा का केंद्र बना।

## कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में उच्चस्तरीय संवाद
सम्मेलन के दौरान कूटनीतिक और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों ने वर्तमान विश्व व्यवस्था की जटिलताओं पर मंथन किया। इस परिचर्चा में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों, बदलते व्यापारिक समीकरणों और क्षेत्रीय संतुलन पर दृष्टिकोण साझा किए गए। प्रतिभागियों ने उभरती हुई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संवाद और सहयोग को आवश्यक बताया।

## एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
इस संवाद सत्र की जानकारी देते हुए एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में जॉर्ज येओ योंग-बून और एन.के. सिंह के साथ व्यापक चर्चा की। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने कार्यक्रम में अपनी भागीदारी और महत्वपूर्ण आर्थिक तथा रणनीतिक मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान को रेखांकित किया।

## वैश्विक व्यवस्था और क्षेत्रीय कूटनीति के पहलू
सम्मेलन में भाग लेने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों और बहुध्रुवीय व्यवस्था के विस्तार के बीच भारत और चीन जैसी प्रमुख शक्तियों के संबंध स्थिर होना क्षेत्रीय शांति के लिए अहम हैं। इसके साथ ही दक्षिण एशिया में संयम बरतने की रणनीति और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ऐसे संवाद देशों के बीच आपसी समझ को गहरा करने में मददगार साबित होते हैं।

## जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस जानकारी के सामने आने के बाद आम नागरिकों और विश्लेषकों ने इस उच्चस्तरीय संवाद का स्वागत किया। कई प्रयोक्ताओं ने इसे भारत की मजबूत विदेश नीति और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

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## इसका आप पर असर
यह उच्चस्तरीय संवाद देश की आर्थिक प्राथमिकताओं और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संबंधों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है।

- **भारत में:** शिखर सम्मेलनों में होने वाली चर्चाएं देश की विदेश व्यापार नीतियों और क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीतियों को दिशा देती हैं। इससे घरेलू उद्योगों के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर और नीतिगत स्थिरता सुनिश्चित होती है।
- **नई दिल्ली में:** राष्ट्रीय राजधानी में ऐसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों के आयोजन से शहर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनता है। इससे स्थानीय बुनियादी ढांचे, आतिथ्य क्षेत्र और अनुसंधान संस्थानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।
- **आर्थिक परिदृश्य:** बहुध्रुवीय व्यवस्था में नीतिगत समन्वय बढ़ने से विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलता है। यह भारतीय व्यापारिक माहौल को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है।
- **नीति निर्माण:** प्रख्यात विचारकों और अर्थशास्त्रियों के विचार सीधे सरकारी नीतियों के निर्माण में योगदान देते हैं। इससे दीर्घकालिक योजनाओं को अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाया जा सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. एस. जयशंकर ने किस कार्यक्रम में भाग लिया?
उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में भाग लिया।

### 2. इस सत्र में किन प्रमुख व्यक्तियों के साथ चर्चा हुई?
इस सत्र में जॉर्ज येओ योंग-बून और एन.के. सिंह के साथ बातचीत हुई।

### 3. सम्मेलन का आयोजन कहां हुआ?
यह सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया।

### 4. इस परिचर्चा का मुख्य विषय क्या था?
इसका मुख्य विषय वैश्विक आर्थिक परिदृश्य, कूटनीति और बहुध्रुवीय व्यवस्था में रणनीतिक संतुलन था।

## नेता परिचय: एस. जयशंकर
- **पद:** विदेश मंत्री
- **जन्म:** 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली
- **पार्टी:** भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
- **शिक्षा:** जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी

2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे।

### राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां
- चीन में राजदूत (2009–2013)
- अमेरिका में राजदूत (2013–2015)
- भारत के विदेश सचिव (2015–2018)
- विदेश मंत्री (2019 से)
- भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका

### रोचक तथ्य
- विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं।
- चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे।


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