{
  "type": "article",
  "title": "नई दिल्ली में एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया से रिश्तों पर परामर्शदात्री समिति की बैठक बुलाई",
  "summary": "विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में पश्चिम एशिया से भारत के रिश्तों पर परामर्शदात्री समिति की बैठक बुलाई, जिसमें व्यापार, निवेश, ऊर्जा और समुद्री सहयोग पर चर्चा हुई।",
  "content": "विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आज नई दिल्ली में भारत के पश्चिम एशिया से रिश्तों को लेकर एक परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस जानकारी को उन्होंने खुद सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने हैंडल @DrSJaishankar से साझा किया।\n\nबैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा\nबैठक के दौरान एस. जयशंकर ने खाड़ी और WANA यानी पश्चिम एशिया-उत्तर अफ्रीका क्षेत्र के साथ भारत के करीबी रिश्तों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि इन देशों के साथ भारत की साझेदारी काफी पुरानी है और इसमें व्यापार, निवेश, ऊर्जा, समुद्री सहयोग और लोगों से लोगों के बीच के रिश्ते जैसे कई पहलू शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में सहयोग को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इस पर समिति के सदस्यों के साथ विचार-विमर्श हुआ।\n\nपरामर्शदात्री समितियों की भूमिका\nसंसद से जुड़ी परामर्शदात्री समितियां आमतौर पर किसी मंत्रालय की नीतियों और कामकाज पर सांसदों की राय लेने के लिए बनाई जाती हैं। हाल के महीनों में विदेश और अन्य मंत्रालयों से जुड़ी ऐसी कई बैठकें हो चुकी हैं। इसी तरह की एक बैठक में एस. जयशंकर पहले भारत-अफ्रीका संबंधों पर भी परामर्शदात्री समिति की अध्यक्षता कर चुके हैं, जिसमें व्यापार और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई थी। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, दूरसंचार, वन्यजीव संघर्ष रोकथाम और तकनीक जैसे विषयों पर भी अलग-अलग मंत्रियों ने ऐसी समितियों की बैठकें बुलाई हैं। इससे साफ है कि सरकार अलग-अलग नीतिगत मुद्दों पर सांसदों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है। भारत पिछले कुछ समय से खाड़ी और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों में अपनी कूटनीतिक और व्यापारिक मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है, और पश्चिम एशिया पर यह बैठक भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।\n\nक्यों अहम है पश्चिम एशिया से भारत का रिश्ता\nखाड़ी देश भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी भारतीयों के रोजगार और व्यापार के लिहाज से बेहद अहम रहे हैं। लाखों भारतीय नागरिक इन देशों में काम करते हैं और वहां से हर साल बड़ी रकम भारत भेजते हैं। यही वजह है कि व्यापार, निवेश और ऊर्जा सहयोग पर होने वाली हर बड़ी बैठक को अहमियत दी जाती है।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nपोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कई यूजर्स ने पश्चिम एशिया से रिश्ते मजबूत करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने की पहल की तारीफ की, तो कुछ ने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर और ध्यान देने का सुझाव दिया। वहीं कुछ यूजर्स ने इस पोस्ट पर विदेश नीति से हटकर घरेलू राजनीतिक मुद्दे भी उठाए।\n\nइसका आप पर असर\nपश्चिम एशिया से भारत के रिश्तों की समीक्षा सीधे उन लाखों भारतीयों को प्रभावित करती है जो खाड़ी देशों में काम करते हैं या वहां से जुड़े कारोबार में लगे हैं।\n\n• प्रवासी भारतीय: खाड़ी और WANA क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार रहते हैं। रिश्तों में मजबूती से वीज़ा, रोजगार और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत आसान होती है।\n• ऊर्जा कीमतें: भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। ऊर्जा सहयोग मजबूत रहने से पेट्रोल-डीजल जैसी चीजों की आपूर्ति स्थिर बने रहने की उम्मीद रहती है।\n• व्यापार और निवेश: व्यापार और निवेश पर जोर का मतलब है कि खाड़ी देशों से जुड़े कारोबारियों और निवेशकों के लिए आने वाले समय में और मौके बन सकते हैं।\n• समुद्री सुरक्षा: समुद्री सहयोग पर बातचीत का असर उन शिपिंग और व्यापार मार्गों पर पड़ता है जिनसे होकर भारत का बड़ा हिस्सा आयात-निर्यात होता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह बैठक किसने बुलाई?\nविदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की।\n\n2. बैठक कब और कहां हुई?\nयह बैठक आज नई दिल्ली में हुई।\n\n3. बैठक का मुख्य विषय क्या था?\nभारत के पश्चिम एशिया, यानी खाड़ी और WANA क्षेत्र, से रिश्ते इस बैठक का केंद्रीय विषय थे।\n\n4. किन क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई?\nव्यापार, निवेश, ऊर्जा, समुद्री सहयोग और लोगों से लोगों के बीच के रिश्तों पर चर्चा हुई।\n\n5. यह जानकारी कैसे सामने आई?\nएस. जयशंकर ने खुद सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी।\n\n6. लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?\nप्रतिक्रिया मिली-जुली रही, कुछ ने पहल की तारीफ की तो कुछ ने ऊर्जा-सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सुझाव दिए।\n\nनेता परिचय: एस. जयशंकर\n• पद: विदेश मंत्री\n• जन्म: 9 जनवरी 1955, नई दिल्ली\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी\n\n2019 से भारत के विदेश मंत्री और पेशेवर राजनयिक। वे विदेश सचिव (2015–18) तथा चीन और अमेरिका में राजदूत रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• चीन में राजदूत (2009–2013)\n• अमेरिका में राजदूत (2013–2015)\n• भारत के विदेश सचिव (2015–2018)\n• विदेश मंत्री (2019 से)\n• भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की वार्ता में भूमिका\n\nरोचक तथ्य\n• विदेश सचिव रहकर विदेश मंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति हैं।\n• चीन में भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले राजदूत रहे।",
  "url": "https://trendkia.com/neta-ji/new-delhi-men-esa-jayashnkara-ne-pashchima-eshiya-se-rishton-para-paramarshadatri-samiti-ki-baithaka-bulai-29056",
  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-09-07",
  "tags": [
    "DrSJaishankar"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}