राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती: नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा और उनके आदर्शों को किया याद नरेंद्र मोदी ने राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विकसित भारत के निर्माण में उनके विचारों को मार्गदर्शक बताया। राष्ट्र निर्माण और जनसेवा में अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाली राजमाता विजयाराजे सिंधिया को उनकी जयंती के मौके पर देशभर में श्रद्धापूर्वक नमन किया जा रहा है। भारतीय राजनीति में सादगी, संघर्ष और सुदृढ़ राष्ट्रवाद की मिसाल मानी जाने वाली राजमाता के विचारों को याद करते हुए शीर्ष नेताओं ने उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प दोहराया है। मध्य प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय फलक तक उनके द्वारा किए गए कार्यों का प्रभाव आज भी स्पष्ट दिखाई देता है। नरेंद्र मोदी का संदेश इस पावन स्मृति दिवस पर नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया मंच पर संदेश साझा करते हुए उनके प्रति गहरा आदर व्यक्त किया। उन्होंने राजमाता के योगदान को याद करते हुए लिखा कि राष्ट्रसेवा के प्रति उनका त्याग और समर्पण हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर बल दिया कि उनके विचार आधुनिक और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को निरंतर गति देने का काम करते हैं। कौन हैं राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय राजमाता विजयाराजे सिंधिया की स्मृति को संजोए रखने और कृषि क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक प्रमुख शिक्षण संस्थान कार्यरत है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में राज्य कृषि विश्वविद्यालय के रूप में की गई थी। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से बागवानी तथा पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन विभागों को अलग करके इस स्वतंत्र संस्थान का गठन किया गया था। यह केंद्र वर्तमान में कृषि शिक्षा, आधुनिक अनुसंधान और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। त्याग, संगठन और वैचारिक दृढ़ता की मिसाल राजमाता विजयाराजे सिंधिया का सार्वजनिक जीवन भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का एक अहम अध्याय रहा है। राजपरिवार के वैभव को त्यागकर उन्होंने आम नागरिकों के अधिकारों और राष्ट्रीय सरोकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। राजनीतिक उतार-चढ़ावों और कई ऐतिहासिक घटनाओं के दौर में उन्होंने जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक विस्तार में निर्णायक भूमिका निभाई। समाज के वंचित तबकों के कल्याण, महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए उनकी प्रतिबद्धता हमेशा उल्लेखनीय रही। उनकी स्मृति में सरकार पहले 100 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का भी जारी कर चुकी है। जनता की प्रतिक्रिया सार्वजनिक मंचों पर नागरिकों ने इस अवसर पर राजमाता के संघर्षपूर्ण जीवन और उनकी सादगी को याद करते हुए अपने विचार साझा किए। कई लोगों ने उनके सिद्धांतों को सराहनीय बताया, जबकि कुछ टिप्पणियों में ऐतिहासिक राजनीतिक घटनाक्रमों और समकालीन मुद्दों को लेकर सवाल भी उठाए गए। इसका आप पर असर यह अवसर देश की ऐतिहासिक और वैचारिक धरोहर के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ विकास प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर राजमाता के विचारों को आत्मनिर्भर भारत और सुशासन के लक्ष्यों से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। इससे नागरिकों और युवाओं में राष्ट्रसेवा तथा सार्वजनिक उत्तरदायित्व की भावना को बल मिलता है। • मध्य प्रदेश में: ग्वालियर और चंबल क्षेत्र में राजमाता के नाम पर संचालित कृषि विश्वविद्यालय और जनकल्याणकारी योजनाओं की महत्ता फिर रेखांकित हुई है। स्थानीय किसानों और विद्यार्थियों को कृषि शोध व आधुनिक तकनीकों से लाभ उठाने का निरंतर अवसर मिल रहा है। सवाल-जवाब 1. नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर क्या संदेश दिया? उन्होंने राजमाता के त्याग और समर्पण को हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा मिलने की बात कही। 2. राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय कहाँ स्थित है? यह कृषि राज्य विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। 3. ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना कब और कैसे हुई थी? इसकी स्थापना वर्ष 2008 में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के बागवानी और पशु चिकित्सा विभागों को अलग करके की गई थी। 4. राजमाता विजयाराजे सिंधिया को किस विशेष योगदान के लिए जाना जाता है? उन्हें भारतीय राजनीति में सादगी, वैचारिक दृढ़ता और सामाजिक उत्थान के कार्यों के लिए जाना जाता है। नेता परिचय: नरेंद्र मोदी • पद: भारत के प्रधानमंत्री • जन्म: 17 सितंबर 1950, वडनगर, गुजरात • पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) • शिक्षा: राजनीति विज्ञान में एमए 2014 से भारत के प्रधानमंत्री। वे 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और भाजपा के सबसे प्रमुख नेताओं में से एक हैं। राजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां • चुनावी राजनीति से पहले आरएसएस प्रचारक • गुजरात के मुख्यमंत्री (2001–2014) • भारत के प्रधानमंत्री (2014 से) • 2014 और 2019 में भाजपा को लोकसभा बहुमत दिलाया • स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया और जीएसटी लागू किया रोचक तथ्य • चुनावी राजनीति से बहुत पहले 1971 में आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बने। • 2014 में 1984 के बाद पहली बार किसी दल को अकेले लोकसभा बहुमत दिलाया। https://trendkia.com/neta-ji/rajamata-vijayaraje-sindhiya-ki-jaynti-narendra-modi-ne-rashtraseva-aura-unake-adarshon-ko-kiya-yada-46731 TrendKia — Har trend, sabse pehle.