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  "type": "article",
  "title": "रामविलास पासवान की जयंती पर अमित शाह की भावुक श्रद्धांजलि, याद किया आपातकाल का संघर्ष",
  "summary": "गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया पर रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि देते हुए आपातकाल के दौरान उनके संघर्ष और लोकतंत्र में योगदान को याद किया।",
  "content": "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दिवंगत नेता रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि दी है। इस पोस्ट में उन्होंने रामविलास पासवान के जीवन को गरीबों और वंचितों के कल्याण के लिए समर्पित बताया और आपातकाल के दौर में उनके संघर्ष को खास तौर पर याद किया।\n\nअमित शाह ने पोस्ट में क्या लिखा\n\n रामविलास पासवान जी का पूरा जीवन गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित रहा। आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया तथा अनेक यातनाएं सहीं। लोकतंत्र और राष्ट्रनिर्माण में उनका योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।\nअमित शाह के इस संदेश में आपातकाल के दिनों का खास तौर पर जिक्र किया गया, जब रामविलास पासवान ने नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए कठिन दौर झेला था। इस पोस्ट को लोकतंत्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करने वाला बताया जा रहा है।\n\nपुलिस की नौकरी छोड़कर चुनी राजनीति\nरामविलास पासवान का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। खबरों के मुताबिक उन्होंने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर एक दोस्त की सलाह पर डीएसपी की नौकरी छोड़ दी थी और पूरी तरह राजनीति में उतर आए थे। आगे चलकर वे कई बार सांसद बने और केंद्र में मंत्री पद तक पहुंचे। एक दौर ऐसा भी आया जब वे बिहार का मुख्यमंत्री बनने से बेहद करीब पहुंचकर चूक गए थे।\n\nविरासत को लेकर चिराग और पशुपति पारस के बीच खींचतान\nरामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर परिवार में मतभेद सामने आए। खबरों के अनुसार चिराग पासवान और पशुपति पारस दोनों ही खुद को उनका असली उत्तराधिकारी बताते रहे हैं और इसे लेकर अलग-अलग रणनीतियां भी बनाई गई हैं। इसके अलावा रांची में लोक जनशक्ति पार्टी का स्थापना दिवस मनाते हुए कार्यकर्ताओं ने रामविलास पासवान के सपनों को पूरा करने का संकल्प भी लिया था।\n\nप्रधानमंत्री मोदी की भावुक चिट्ठी और प्रतिमा का अनावरण\nरामविलास पासवान की पहली पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावुक चिट्ठी लिखी थी, जिसके जवाब में उनके बेटे चिराग पासवान ने कहा था कि उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहे। इसके अलावा एक कार्यक्रम में रामविलास पासवान की आदमकद प्रतिमा का भी अनावरण किया गया था, जिसमें चिराग पासवान ने कहा था कि उन्होंने अंतिम समय तक गरीबों के लिए काम किया।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nअमित शाह की इस श्रद्धांजलि पोस्ट पर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने रामविलास पासवान के सामाजिक न्याय और गरीबों के उत्थान के लिए किए गए कार्यों की सराहना की, वहीं कुछ यूजर्स ने इस मौके का इस्तेमाल पेट्रोल की कीमतों और अन्य सरकारी नीतियों पर सवाल उठाने के लिए भी किया।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे किसी नीति या पैसे से जुड़ी नहीं है, लेकिन इसका राजनीतिक असर बना रहता है।\n\n• भारत में: गृह मंत्री जैसे बड़े नेता की ऐसी श्रद्धांजलि सामाजिक न्याय की राजनीति को फिर चर्चा में ला सकती है, जिसका असर आगे के राजनीतिक गठबंधनों पर पड़ सकता है।\n• बिहार में: रामविलास पासवान की विरासत को लेकर चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच चल रही खींचतान बिहार की सियासत और आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमित शाह ने सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट किया?\nअमित शाह ने एक्स पर रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि उनका पूरा जीवन गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित रहा और आपातकाल में उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष किया।\n\n2. रामविलास पासवान ने आपातकाल में क्या किया था?\nआपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया और कई यातनाएं सहीं।\n\n3. रामविलास पासवान ने डीएसपी की नौकरी क्यों छोड़ी थी?\nखबरों के मुताबिक उन्होंने अपने पिता की इच्छा के खिलाफ जाकर एक दोस्त की सलाह पर डीएसपी की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा था।\n\n4. रामविलास पासवान की राजनीतिक विरासत को लेकर विवाद किसके बीच है?\nउनकी राजनीतिक विरासत को लेकर बेटे चिराग पासवान और भाई पशुपति पारस के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।\n\n5. पीएम मोदी ने रामविलास पासवान को कैसे याद किया था?\nउनकी पहली पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावुक चिट्ठी लिखी थी, जिसका जवाब चिराग पासवान ने दिया था।\n\n6. क्या रामविलास पासवान बिहार के मुख्यमंत्री बने थे?\nनहीं, खबरों के अनुसार वे एक मौके पर बिहार का मुख्यमंत्री बनने से बेहद करीब पहुंचकर चूक गए थे।\n\nनेता परिचय: अमित शाह\n• पद: केंद्रीय गृह मंत्री\n• जन्म: 22 अक्टूबर 1964, मुंबई, महाराष्ट्र\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: बायोकेमिस्ट्री में बीएससी\n\n2019 से भारत के गृह मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष (2014–20); पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार माने जाते हैं।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष (2014–2020)\n• केंद्रीय गृह मंत्री (2019 से)\n• केंद्रीय सहकारिता मंत्री (2021 से)\n• सांसद, गांधीनगर\n• 2019 में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन का नेतृत्व\n\nरोचक तथ्य\n• भाजपा के सबसे सफल अध्यक्षों में गिने जाते हैं।\n• 1982 में गुजरात में आरएसएस के ज़रिए नरेंद्र मोदी से पहली मुलाक़ात हुई।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-07-05",
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