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  "title": "राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर राजनाथ सिंह ने की बुनकरों के हुनर की तारीफ, आत्मनिर्भर भारत का बताया प्रतीक",
  "summary": "रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर देश के बुनकरों के कौशल और हथकरघा विरासत की सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2015 में शुरू की गई इस पहल को उन्होंने आत्मनिर्भरता का आधार बताया।",
  "content": "राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के खास मौके पर देश भर में भारतीय हथकरघा उद्योग और पारंपरिक बुनकरों के योगदान को याद किया जा रहा है। इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारतीय हथकरघा विरासत को समृद्ध बताते हुए देश के बुनकरों की बेहतरीन कारीगरी और उनकी आत्मनिर्भर भावना की जमकर सराहना की।\n\nवर्ष 2015 में हुई थी शुरुआत\nअपने संदेश में राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि इस विशेष दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में की गई थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के पारंपरिक कपड़ा उद्योग को प्रोत्साहन देना और स्थानीय कारीगरों की आजीविका को मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह दिन भारत की सांस्कृतिक धरोहर और स्वदेशी उत्पादन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।\n\nप्रधानमंत्री और अन्य नेताओं के संदेश\nराष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों को बधाई दी और भारत की बुनाई परंपरा का उत्सव मनाया। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों के प्रमुखों ने भी बुनकरों के समर्थन का आह्वान किया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने लोगों से अपील की कि वे महीने में कम से कम एक बार पारंपरिक हथकरघा वस्त्र अवश्य पहनें। इस तरह के कदमों से स्थानीय हथकरघा उद्योग और इसे जीवित रखने वाले कारीगरों को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा मिलता है।\n\nआत्मनिर्भर भारत और स्थानीय हुनर को बढ़ावा\nभारतीय हथकरघा केवल कपड़ों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह देश की विविध संस्कृति और धैर्यपूर्ण मेहनत की कहानी बयान करता है। हाथ से बुनाई करने में अत्यधिक समय और कुशलता की आवश्यकता होती है। राजनाथ सिंह के अनुसार, स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को अपनाना ही इस प्राचीन कौशल को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।\n\nजनता की प्रतिक्रिया\nसोशल मीडिया पर राजनाथ सिंह की इस पोस्ट पर आम जनता की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई उपयोगकर्ताओं ने खादी और स्वदेशी कपड़ों की गुणवत्ता की तारीफ करते हुए स्थानीय कारीगरों का समर्थन किया, वहीं कुछ लोगों ने देश में रोजगार और भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त कीं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: राष्ट्रीय हथकरघा दिवस स्वदेशी वस्त्रों और स्थानीय कारीगरों की मांग बढ़ाकर देश के कुटीर उद्योग को आर्थिक मजबूती देता है।\n• बुनकरों और खरीदारों के लिए: लोगों द्वारा हथकरघा उत्पादों की खरीदारी से पारंपरिक कला को संरक्षण मिलता है और ग्रामीण कारीगरों को सीधी आजीविका प्राप्त होती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राष्ट्रीय हथकरघा दिवस कब और किसके नेतृत्व में शुरू हुआ था?\nराष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में की गई थी।\n\n2. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुनकरों के बारे में क्या कहा?\nराजनाथ सिंह ने बुनकरों की उत्कृष्ट कारीगरी, हथकरघा विरासत और उनकी आत्मनिर्भरता की भावना की सराहना की।\n\n3. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने लोगों से क्या अपील की?\nआंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू ने नागरिकों से महीने में कम से कम एक बार पारंपरिक हथकरघा वस्त्र पहनने का अनुरोध किया।\n\n4. राजनाथ सिंह के पोस्ट पर सोशल मीडिया की क्या प्रतिक्रिया रही?\nलोगों ने खादी और स्वदेशी कपड़ों की सराहना की, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने रोजगार और भर्ती से जुड़े प्रश्न भी उठाए।\n\nनेता परिचय: राजनाथ सिंह\n• पद: केंद्रीय रक्षा मंत्री\n• जन्म: 10 जुलाई 1951, चंदौली, उत्तर प्रदेश\n• पार्टी: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)\n• शिक्षा: भौतिकी में एमएससी\n\n2019 से भारत के रक्षा मंत्री, पूर्व गृह मंत्री और दो बार भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2000–02) रहे।\n\nराजनीतिक सफ़र और उपलब्धियां\n• उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (2000–2002)\n• भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष (2005–09 और 2013–14)\n• केंद्रीय गृह मंत्री (2014–2019)\n• केंद्रीय रक्षा मंत्री (2019 से)\n• लखनऊ से सांसद\n\nरोचक तथ्य\n• राजनीति में आने से पहले भौतिकी के व्याख्याता रहे।\n• 1975 के आपातकाल में लगभग दो साल जेल में रहे।",
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  "category": "नेता जी",
  "publishedAt": "2026-08-07",
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